गौचर पालीटेक्निक भूस्खलन की जद में, उपचार न होने से बढ़ी चिंता

47 वर्ष पुराना संस्थान झेल रहा उपेक्षा का दंश, बरसात से पहले सुरक्षा कार्य की मांग
-दिग्पाल गुसाईं की रिपोर्ट –
गौचर, 19 मई। लगभग 47 वर्ष पुराना राजकीय पॉलिटेक्निक गौचर इन दिनों शासन-प्रशासन की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। संस्थान भवन के ठीक सामने हुए भूस्खलन का अब तक उपचार नहीं किए जाने से छात्र-छात्राओं और शिक्षकों में चिंता बनी हुई है। बरसात का मौसम नजदीक आने के कारण खतरा और बढ़ गया है।
बताया जाता है कि वर्ष 1998 में तत्कालीन पर्वतीय विकास मंत्री स्वर्गीय शिवानन्द नौटियाल के विशेष प्रयासों से गौचर में इस राजकीय पॉलिटेक्निक की स्थापना को मजबूती मिली थी। उस समय जनपद चमोली में यह तकनीकी शिक्षा का प्रमुख संस्थान माना जाता था। पहाड़ी क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित यह संस्थान लंबे समय तक जनपद की पहचान बना रहा।
वर्तमान में यह संस्थान कई समस्याओं से जूझ रहा है। यहां विभिन्न ट्रेडों में अध्यापकों की कमी बनी हुई है, वहीं गत वर्ष विद्यालय भवन के सामने हुए भूस्खलन का उपचार आज तक नहीं हो पाया है। संस्थान में करीब 400 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जो भय के माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
राजकीय पॉलिटेक्निक गौचर उत्तराखंड तकनीकी शिक्षा बोर्ड, रुड़की से संबद्ध है तथा यहां प्रतिवर्ष प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से छात्र-छात्राओं का चयन किया जाता है। कभी प्रदेश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में गिने जाने वाले इस पॉलिटेक्निक की वर्तमान स्थिति स्थानीय लोगों और पूर्व छात्रों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
संस्थान के प्रधानाचार्य राजकुमार ने बताया कि भूस्खलन के उपचार और सुरक्षा कार्य को लेकर संस्थान स्तर से जिलाधिकारी एवं क्षेत्रीय विधायक को पहले ही ज्ञापन भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से दावेदारी कर रहे मुकेश नेगी ने आरोप लगाया कि गौचर का पॉलिटेक्निक कभी जनपद की शान हुआ करता था, लेकिन आज यह उपेक्षा का शिकार है। उन्होंने कहा कि गत वर्ष बरसात में विद्यालय भवन का बड़ा हिस्सा भूस्खलन की जद में आ गया था, बावजूद इसके अब तक सुरक्षा कार्य शुरू नहीं होना सरकार की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन से बरसात शुरू होने से पहले भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का उपचार कर संस्थान की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
