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भारतीय आमों की मिठास अब आइसलैंड तक पहुँची

रेक्याविक और अक्यूरेरी में पहली बार हुआ भारतीय आमों का प्रचार, निर्यात की नई संभावनाएं खुलीं

-A PIB FEATURE-

भारत के विश्व प्रसिद्ध आम अब यूरोप के उत्तरी द्वीपीय देश आइसलैंड के बाजार में भी अपनी पहचान बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। इसी दिशा में रेक्याविक स्थित भारतीय दूतावास ने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से 24 जून को रेक्याविक और 25 जून को उत्तरी आइसलैंड के अक्यूरेरी में पहली बार भारतीय आमों के प्रचार-प्रसार का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय आमों की विविधता, गुणवत्ता और निर्यात क्षमता को आइसलैंड के आयातकों, व्यापारिक समुदाय और उपभोक्ताओं के सामने प्रस्तुत करना था।

भारत के राजदूत आर. रविंद्र ने कहा कि भारतीय आम अपनी अनूठी मिठास, स्वाद और सुगंध के कारण पूरी दुनिया में लोकप्रिय हैं। उन्होंने आइसलैंड में भारतीय आमों के निर्यात की व्यापक संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

आइसलैंड के विदेश मंत्रालय में व्यापार समझौता निदेशक स्वेन के. एइनार्सन ने भारत–ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा और भारतीय आमों के आयात को भी नई गति मिलेगी।

आइसलैंड ट्रेड फेडरेशन के महासचिव ओलाफुर स्टीफेंसन ने बताया कि आइसलैंड के कारोबारी समुदाय की भारत में रुचि लगातार बढ़ रही है। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय कृषि उत्पादों, खासकर आमों के आयात की संभावनाओं को उत्साहजनक बताया।

भारतीय दूतावास की द्वितीय सचिव अनिशा तोमर ने अपने प्रस्तुतीकरण में बताया कि भारत विश्व का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। उन्होंने गुणवत्ता नियंत्रण, अंतरराष्ट्रीय मानकों और बाजार विस्तार के लिए भारत सरकार की विभिन्न पहलों की भी जानकारी दी।

कार्यक्रम में आयातकों, राजनयिकों, व्यापारिक प्रतिनिधियों और आइसलैंड के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने भाग लिया। अतिथियों को भारतीय आमों की चार लोकप्रिय किस्में—दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर—चखने का अवसर मिला। सभी ने इनके स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता की सराहना की।

वर्तमान में आइसलैंड मुख्य रूप से थाईलैंड, ब्राज़ील, कंबोडिया, घाना और पेरू से आम आयात करता है। वर्ष 2025 में देश ने लगभग 33 लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य के आम आयात किए, जिनमें करीब 10 लाख अमेरिकी डॉलर के आम केवल थाईलैंड से आए थे।

भारतीय दूतावास के अनुसार, स्थानीय उपभोक्ताओं से बातचीत में पता चला कि आइसलैंड के लोग आमों को विशेष रूप से स्मूदी, डेज़र्ट और फ्रूट सलाद में पसंद करते हैं। इससे स्पष्ट है कि भारतीय आमों के लिए वहां का बाजार काफी संभावनाशील है।

यह आयोजन भारत और आइसलैंड के बीच कृषि व्यापार को बढ़ावा देने, भारतीय फलों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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