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उपला टकनौर : उत्तराखण्ड में शीतकालीन पर्यटन की नई चमक

 

-DIO Uttarkashi-
उपला टकनौर : उत्तराखण्ड में शीतकालीन पर्यटन की नई चमक
उत्तरकाशी जनपद के भटवाड़ी विकासखंड का उपला टकनौर क्षेत्र आज उत्तराखण्ड के पर्यटन मानचित्र पर तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहा है। समुद्र तल से ऊंचाई पर स्थित बगोरी, हर्षिल, मुखवा, झाला, धराली और पुराली जैसे गांव अब केवल अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, सेब के बागानों और सांस्कृतिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि शीतकालीन पर्यटन (विंटर टूरिज्म) के उभरते केंद्रों के रूप में भी देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।
भागीरथी नदी की मनोरम घाटी में बसे ये गांव वर्षभर अपनी मनमोहक छटा बिखेरते हैं, लेकिन सर्दियों में बर्फ की सफेद चादर ओढ़ते ही इनकी सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। दिसंबर से फरवरी तक यहां होने वाली भारी बर्फबारी पर्यटकों को किसी यूरोपीय हिमस्थल जैसा अनुभव कराती है। यही कारण है कि अब पर्यटक केवल गंगोत्री धाम के दर्शन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इन गांवों में कई दिनों तक ठहरकर हिमालय की शांति, रोमांच और स्थानीय संस्कृति का आनंद लेना पसंद कर रहे हैं।
विशेष रूप से हर्षिल और मुखवा गांव ने विंटर टूरिज्म के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। मुखवा गांव, जहां शीतकाल में मां गंगा की पूजा-अर्चना होती है, धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। दूसरी ओर हर्षिल अपने देवदार के घने जंगलों, बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं, सेब के बगीचों और शांत वातावरण के कारण पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। वहीं भारत-तिब्बत सीमा के निकट स्थित बगोरी गांव अपनी पारंपरिक स्थापत्य कला, विशिष्ट संस्कृति और स्थानीय रीति-रिवाजों के कारण सांस्कृतिक पर्यटन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है।
राज्य सरकार द्वारा शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सड़क, आवास, होम-स्टे, साहसिक पर्यटन और स्थानीय उत्पादों के विपणन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसका लाभ स्थानीय युवाओं को भी मिल रहा है। बड़ी संख्या में युवा होम-स्टे संचालन, ट्रैकिंग गाइड, एडवेंचर गतिविधियों, स्थानीय व्यंजनों और हस्तशिल्प के माध्यम से स्वरोजगार की ओर बढ़ रहे हैं। इससे पलायन की समस्या पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक समृद्धि और साहसिक गतिविधियों का अनूठा संगम उपला टकनौर क्षेत्र को उत्तराखण्ड के सबसे संभावनाशील पर्यटन क्षेत्रों में शामिल कर रहा है। यदि यहां पर्यटन सुविधाओं का सुनियोजित और पर्यावरण-अनुकूल विकास किया जाए, तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र न केवल राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनेगा, बल्कि हिमालयी ग्रामीण पर्यटन का एक राष्ट्रीय मॉडल भी स्थापित हो सकता है।

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