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नया कंप्यूटर मॉडल चुंबकीय ऊर्जा के संचय का पता लगाने और परिणामी सीएमई के प्रभाव का पूर्वानुमान लगाने में मददगार

 

विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों की एक टीम ने त्रि-आयामी कंप्यूटर सिमुलेशन मॉडल विकसित किया है, जो वैज्ञानिकों को कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) के पृथ्वी तक पहुंचने से पहले उसके आगमन और प्रभाव का पूर्वानुमान लगाने की दिशा में एक कदम और आगे ले जा सकता है।

सीएमई हमारे सौरमंडल में होने वाली सबसे नाटकीय और शक्तिशाली घटनाओं में से हैं—ये चुंबकीय प्लाज्मा के विशाल विस्फोट होते हैं, जो सूर्य से लाखों किलोमीटर प्रति घंटे की गति से अंतरिक्ष में बाहर निकलते हैं। जब इनका रुख पृथ्वी की ओर होता है, तो ये उपग्रह प्रणालियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, विद्युत ग्रिड को बाधित कर सकते हैं और वैश्विक संचार सेवाओं में बाधा पैदा कर सकते हैं। इन विस्फोटों के केन्द्र में चुंबकीय फ्लक्स रोप (एमएफआर) होते हैं, जो प्लाज्मा में मौजूद चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के मुड़े हुए गुच्छे होते हैं और जिन्हें व्यापक रूप से सीएमई के प्राथमिक प्रेरक के रूप में माना जाता है। हालांकि, सीएमई के दौरान चुंबकीय ऊर्जा किस प्रकार संचित होती है और फिर मुक्त होती है, यह सौर भौतिकी की सबसे जटिल अनसुलझी पहेलियों में से एक रही है। इन विस्फोटों के दौरान चुंबकीय ऊर्जा के हिंसक निष्कासन की प्रक्रिया अब तक पूरी तरह समझी नहीं जा सकी थी।

सीएमई में चुंबकीय ऊर्जा के विकास का पता लगाने के लिए, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के शोधकर्ताओं ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक अत्याधुनिक त्रि-आयामी मैग्नेटोहाइड्रोडायनामिक (एमएचडी) कंप्यूटर सिमुलेशन मॉडल विकसित किया है।

यह मॉडल चरण-दर-चरण यह पता लगाता है कि चुंबकीय पुनर्संयोजन फ्लक्स किस प्रकार बदलता है, जब एक चुंबकीय फ्लक्स रोप ऊपर उठती है, आसपास के परिवेशी चुंबकीय क्षेत्र को खींचकर फैलाती है और अंततः विस्फोटित होकर बाहर निकलती है। मॉडल की शुरुआत सूर्य के वायुमंडल की एक यथार्थपरक कोरोनल संरचना से होती है, जिसमें अवलोकनों में दिखाई देने वाले कोरोनल स्ट्रीमर जैसी चुंबकीय क्षेत्र संरचना मौजूद होती है। इसके बाद, सूर्य की सतह के नीचे से नए चुंबकीय फ्लक्स के उभरने की प्रक्रिया का अनुकरण करते हुए, एक मुड़ी हुई चुंबकीय फ्लक्स रोप को नीचे से धीरे-धीरे इस संरचना में प्रविष्ट कराया जाता है।

चित्र 2: पुनर्संयोजन तंत्र की प्रक्रिया। सफेद सतह (पैनल ए) करंट शीट को दर्शाती है—वह क्षेत्र जहां सूर्य की चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं टूटकर पुनः जुड़ती हैं और ऊर्जा मुक्त होती है, जिससे सीएमई के प्रक्षेपण के लिए आवश्यक ऊर्जा उत्पन्न होती है। पैनल (बी) और (सी) में दिखाई गई एस-आकार की क्षेत्र रेखाएं इस ऊर्जा-मुक्ति वाले क्षेत्र से होकर गुजरने वाली चुंबकीय रेखाओं को दर्शाती हैं।

इस अध्ययन में की गई कंप्यूटेशनल गणनाएं नोवा एचपीसी सुविधा पर की गईं। यह उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग अवसंरचना भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (आईआईए) के डेटा सेंटर में स्थित है।

जैसे-जैसे फ्लक्स रोप ऊपर उठी, टीम ने अपने कंप्यूटर मॉडल में देखा कि उसके ऊपर स्थित चुंबकीय क्षेत्र उसके नीचे काफी अधिक खिंचता और संकुचित होता है। चुंबकीय पुनर्संयोजन की प्रक्रिया अचानक विस्फोटक रूप से शुरू नहीं होती। इसके बजाय, इसकी शुरुआत धीरे-धीरे होती है, जिसमें प्रबल विद्युत धारा वाली एक पतली शीट का निर्माण होता है—यह वह पतली परत होती है जहां विपरीत दिशाओं वाले चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे के पास धकेले जाते हैं। समय के साथ यह प्रक्रिया तीव्र होती जाती है और अंततः फ्लक्स रोप के तीव्र एवं बड़े पैमाने पर अंतरिक्ष में निष्कासन के रूप में परिणत होती है।

इस अध्ययन को, जो एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है, विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाने वाली बात इसका दोहरा दृष्टिकोण है। शोधकर्ताओं ने न केवल अपने मॉडल में लगातार होने वाले दो फ्लक्स रोप विस्फोटों का सिमुलेशन किया, बल्कि अपने निष्कर्षों का एक अन्य शोधकर्ता के साथ स्वतंत्र रूप से सत्यापन भी किया। फिनलैंड स्थित हेलसिंकी विश्वविद्यालय के इस शोधकर्ता ने भारतीय वैज्ञानिकों की टीम के साथ मिलकर नासा के हेलियोसिस्मिक एंड मैग्नेटिक इमेजर (एचएमआई) और एटमॉस्फेरिक इमेजिंग असेंबली (एआईए) से प्राप्त अवलोकन संबंधी आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण में योगदान दिया। ये दोनों वर्तमान में सूर्य का अवलोकन करने वाले सबसे शक्तिशाली उपकरणों में शामिल हैं।

चित्र 3: पृथ्वी से चुंबकीय पुनर्संयोजन को देखना। बाईं ओर सौर ज्वाला (फ्लेयर) की चमक दिखाई गई है। दाईं ओर इसका चुंबकीय पदचिह्न दिखाया गया है—रंगों से दर्शाई गई पट्टियां 36 मिनट के दौरान सूर्य की सतह पर बाहर की ओर फैलती हुई दिखाई देती हैं। इन पट्टियों द्वारा घेरा गया क्षेत्रफल इस बात का प्रेक्षणात्मक माप है कि विस्फोट के दौरान कितना चुंबकीय फ्लक्स पुनर्संयोजित हुआ।

सिमुलेशन और प्रेक्षण के बीच की तुलना से एक महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया: चुंबकीय पुनर्संयोजन की दर का सीएमई की गति बढ़ने के साथ स्पष्ट और एक दिशा में संबंध पाया गया। इसका अर्थ है कि जैसे-जैसे पुनर्संयोजन की गति बढ़ती है, वैसे-वैसे सीएमई का विस्फोट भी शुरुआत से अंत तक अधिक तेज होता जाता है। यह निष्कर्ष पुनर्संयोजन फ्लक्स को न केवल इस बात को निर्धारित करने में एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में स्थापित करता है कि सीएमई विस्फोटित होगा या नहीं, बल्कि यह भी निर्धारित करता है कि वह कितनी तेजी और कितनी ऊर्जा के साथ विस्फोटित होगा।

डॉ. समृद्धि शंकर मैती (नासा एवं जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका में पोस्टडॉक), डॉ. पियली चटर्जी (आईआईए), श्री इजास एस. मिथीन (पीएचडी छात्र, एटवॉश यूनिवर्सिटी, हंगरी) तथा डॉ. रणदीप सरकार (हेलसिंकी विश्वविद्यालय, फिनलैंड) की टीम द्वारा किए गए इस अध्ययन से उन घटनाक्रमों की श्रृंखला के बारे में महत्वपूर्ण नई जानकारी प्राप्त होती है, जो धीरे-धीरे विकसित होने वाली चुंबकीय संरचना को हमारे सौरमंडल के सबसे शक्तिशाली विस्फोटों में से एक में बदल देती है।

प्रकाशन लिंक: https://iopscience.iop.org/article/10.3847/1538-4357/ae3d9a.

 

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