दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर पहाड़ी से मलबा गिरने से यातायात प्रभावित, वन्यजीव कॉरिडोर में दो लेन बंद
देहरादून/सहारनपुर, 8 जुलाई। मानसून की पहली तेज बारिश ने हाल ही में शुरू हुए दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। सहारनपुर के बिहारीगढ़ क्षेत्र में स्थित एशिया के सबसे लंबे एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर के निकट पहाड़ी से मलबा और पत्थर सड़क पर आ गिरे, जिससे एक दिशा की तीन में से दो लेन अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ीं। सुरक्षा की दृष्टि से यातायात को केवल एक लेन से नियंत्रित तरीके से संचालित किया गया।
लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों से मलबा गिरने की आशंका बनी हुई है। घटना के तुरंत बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और निर्माण एजेंसी की टीमें मौके पर पहुंचीं। जेसीबी और अन्य मशीनों की सहायता से मलबा हटाने का कार्य शुरू किया गया तथा ढलान को सुरक्षित बनाने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित हिस्से में वाहनों की गति सीमित कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, जब तक ढलान पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाती, तब तक यातायात नियंत्रित तरीके से ही संचालित किया जाएगा। बारिश जारी रहने के कारण यात्रियों से सावधानी बरतने और निर्धारित गति सीमा का पालन करने की अपील की गई है।
निर्माण गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल
यह घटना ऐसे समय हुई है जब कुछ दिन पहले ही भारी बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में सड़क धंसने (केव-इन) का मामला सामने आया था। उस घटना के बाद एनएचएआई ने परियोजना निदेशक, ठेकेदार और अथॉरिटी इंजीनियर को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे तथा प्रारंभिक जांच में जल निकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था की कमी को प्रमुख कारण माना गया था।
पहले भी बंद हुआ था दातकाली मार्ग
बारिश के चलते दातकाली मंदिर मार्ग पर भी पहले मलबा आने की घटनाएं हो चुकी हैं। इस बार वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर के पास मलबा गिरने से स्पष्ट हो गया है कि मानसून के दौरान इस पूरे पर्वतीय हिस्से में ढलानों की निगरानी और स्थायी सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
अन्य स्थानों पर भी बारिश का असर
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में भी दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे पर भारी वर्षा के कारण सड़क क्षतिग्रस्त होने और बड़े गड्ढे बनने की घटनाएं सामने आई थीं। वहीं मुजफ्फरनगर और अन्य इलाकों में जलभराव तथा जल निकासी की समस्याओं ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना
करीब 210 किलोमीटर लंबे दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे की प्रमुख विशेषता 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर है, जिसे राजाजी परिक्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए बनाया गया है। यह परियोजना दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय को लगभग ढाई घंटे तक सीमित करने के उद्देश्य से विकसित की गई है। हाल में जारी एक अध्ययन में इस कॉरिडोर के अंडरपास का उपयोग 18 से अधिक वन्यजीव प्रजातियों द्वारा किए जाने की पुष्टि भी हुई है।
मानसून की शुरुआत में ही मलबा गिरने और सड़क धंसने जैसी घटनाओं ने इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता, ढलान स्थिरीकरण और ड्रेनेज व्यवस्था पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिवालिक क्षेत्र की संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए केवल त्वरित मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि व्यापक भू-तकनीकी अध्ययन, मजबूत जल निकासी तंत्र और ढलानों के स्थायी संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
