अब मेडिकल टीचर्स निभाएंगे फैसिलिटेटर और मेंटर की भूमिका

टीएमयू मेडिकल कॉलेज में एनएमसी के दिशानिर्देशों पर तीन दिवसीय बीसीएमई कार्यशाला संपन्न
मुरादाबाद, 11 जुलाई। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) के मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की मेडिकल एजुकेशन यूनिट (एमईयू) द्वारा नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के दिशानिर्देशों के अनुरूप बेसिक कोर्स इन मेडिकल एजुकेशन (बीसीएमई) पर तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य मेडिकल फैकल्टी को नए एमबीबीएस पाठ्यक्रम में हुए बदलावों से अवगत कराना तथा उन्हें प्रभावी शिक्षक, फैसिलिटेटर और मेंटर के रूप में तैयार करना था।
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में चिकित्सा शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, छात्र-केंद्रित और आधुनिक बनाने पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों को शिक्षण-प्रशिक्षण की नई विधियों, सीखने के सिद्धांतों, इंटरएक्टिव लार्ज एवं स्मॉल ग्रुप टीचिंग, आंतरिक एवं रचनात्मक मूल्यांकन, प्रभावी पाठ योजना निर्माण तथा क्लीनिकल एवं प्रायोगिक शिक्षण की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। इसके अलावा नए एमबीबीएस पाठ्यक्रम में शामिल इलेक्टिव्स, अर्ली क्लीनिकल एक्सपोजर, स्किल असेसमेंट और एटीकॉम (Attitude, Ethics and Communication) के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
एनएमसी के क्षेत्रीय केंद्र एसआरएमएस इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसआरएमएसआईएमएस), बरेली के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में एनएमसी के आधिकारिक पर्यवेक्षक एवं एसआरएमएसआईएमएस के एमईयू समन्वयक डॉ. जसविंदर सिंह की विशेष उपस्थिति रही।
टीएमयू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एन.के. सिंह ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा तेजी से बदल रही है। ऐसे में शिक्षकों की भूमिका केवल पारंपरिक अध्यापन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उन्हें छात्रों के मार्गदर्शक, फैसिलिटेटर और मेंटर के रूप में कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्रों के समग्र विकास, संचार कौशल और नैदानिक दक्षता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
तीन दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न विभागों के 30 चयनित फैकल्टी सदस्यों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान आइस ब्रेकिंग एवं समूह गतिशीलता, सीखने की प्रक्रिया एवं सिद्धांत, सीबीएमई (Competency-Based Medical Education) में शिक्षण उद्देश्यों का निर्धारण, प्रभावी शिक्षण पद्धतियां, आंतरिक एवं रचनात्मक मूल्यांकन, मूल्यांकन योजना तैयार करना, गुणवत्तापूर्ण निबंधात्मक प्रश्न एवं एमसीक्यू निर्माण तथा पाठ योजना तैयार करने जैसे विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला में उप-प्राचार्य एवं एमईयू समन्वयक प्रो. प्रीथपाल सिंह मटरेजा, पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. सीमा अवस्थी, डॉ. आशुतोष कुमार, कम्युनिटी मेडिसिन की प्रो. साधना सिंह, रेडियोडायग्नोसिस के प्रो. राजुल रस्तोगी, प्रो. श्रुति चंदक, माइक्रोबायोलॉजी के प्रो. सुधीर सिंह, ऑप्थैल्मोलॉजी के प्रो. पी.एस. रस्तोगी, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रो. आस्था लालवानी, फार्माकोलॉजी की प्रो. शिल्पा पैट्रिक, पैथोलॉजी की डॉ. प्राची सिंह, डॉ. फैजा समीन, डॉ. निखिल सहित अनेक फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे।
