टाटा मेमोरियल का पपीते की पत्तियों की गोलियों से प्लेटलेट बढ़ने का दावा सवालों के घेरे में
मुंबई: टाटा मेमोरियल अस्पताल (टीएमएच) द्वारा प्रकाशित उस शोध पर वैश्विक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं, जिसमें दावा किया गया था कि पपीते की पत्तियों के अर्क (पपाया लीफ एक्सट्रैक्ट) की गोलियां कैंसर उपचार करा रहे मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने में मदद करती हैं।
यह शोध प्रतिष्ठित सहकर्मी-समीक्षित (पीयर-रिव्यूड) चिकित्सा पत्रिका जर्नल ऑफ ग्लोबल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित हुआ था। हालांकि, कुछ ही दिनों बाद कोच्चि के हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. सायरिएक एबी फिलिप्स (जो सोशल मीडिया पर ‘द लिवर डॉक’ के नाम से जाने जाते हैं) ने इस अध्ययन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
टाटा अस्पताल के शोध पर उठे सवाल
डॉ. फिलिप्स का आरोप है कि अध्ययन में असफल मामलों (फेल्योर) को हटाकर पपीते के अर्क की सफलता दर कृत्रिम रूप से बढ़ा दी गई।
उनका यह भी कहना है कि अध्ययन का मुख्य मूल्यांकन बिंदु (प्राइमरी एंडपॉइंट) सातवें दिन (Day 7) से बदलकर चौथे दिन (Day 4) कर दिया गया, जो सामान्य वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप नहीं है।
दूसरी ओर, टाटा मेमोरियल अस्पताल के वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. विकास ओस्तवाल का कहना है कि अस्पताल चिकित्सा पत्रिका द्वारा उठाए गए सभी प्रश्नों का उत्तर दे रहा है।
उनका कहना है कि प्लेटलेट्स बढ़ाने वाली दवाएं पहले से उपलब्ध हैं, लेकिन हमारा उद्देश्य कम लागत वाला एक विकल्प तलाशना था।
क्या हैं विवाद के प्रमुख बिंदु?
डॉ. फिलिप्स के अनुसार, शोधकर्ताओं ने उन मरीजों को अंतिम विश्लेषण से बाहर कर दिया, जिनमें अपेक्षित सुधार नहीं हुआ था। उनका कहना है कि इससे अध्ययन के निष्कर्षों की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।
उन्होंने दावा किया कि केवल असफल मामलों को हटाने से पपीते के अर्क की कथित सफलता दर लगभग 64 प्रतिशत से बढ़कर 87.5 प्रतिशत दिखाई गई।
उन्होंने यह भी कहा कि अध्ययन के निष्कर्षों की चिकित्सकीय व्याख्या सावधानी से की जानी चाहिए और संबंधित शोधपत्र फिलहाल समीक्षा के दायरे में है।
219 मरीजों पर हुआ था अध्ययन
रिपोर्ट के अनुसार, अध्ययन की शुरुआत 219 मरीजों के साथ हुई थी। बाद में कुछ मरीजों को अंतिम विश्लेषण से बाहर कर दिया गया, जिससे परिणामों की वैधता पर प्रश्न उठे हैं।
डॉ. फिलिप्स ने यह भी कहा कि अध्ययन का प्राथमिक एंडपॉइंट सातवें दिन से चौथे दिन कर दिया गया, जबकि सामान्यतः इस प्रकार के बदलाव पूर्व निर्धारित वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के अनुसार ही किए जाते हैं।
टाटा मेमोरियल अस्पताल का पक्ष
डॉ. विकास ओस्तवाल ने कहा कि अस्पताल ने चिकित्सा पत्रिका द्वारा उठाए गए प्रश्नों का विस्तृत उत्तर भेज दिया है।
उन्होंने कहा कि अध्ययन में शामिल मरीजों के प्लेटलेट्स की संख्या दिन-प्रतिदिन लगातार बढ़ती रही, इसलिए अस्पताल को अपने निष्कर्षों पर भरोसा है।
उन्होंने यह भी बताया कि अध्ययन के लिए दवाएं दवा कंपनियों माइक्रो लैब्स प्राइवेट लिमिटेड, ज़ाइडस फार्मास्यूटिकल्स और ज़ाइडस फार्मा प्राइवेट लिमिटेड ने उपलब्ध कराई थीं। हालांकि, उनका कहना है कि अध्ययन की रूपरेखा, संचालन, विश्लेषण या निष्कर्षों पर इन कंपनियों का कोई प्रभाव नहीं था।
डॉ. ओस्तवाल ने यह भी कहा कि उन्हें विश्वास है कि पत्रिका की समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अध्ययन के निष्कर्ष सही साबित होंगे।
