धरती के सबसे नए बंदर से मिलिए (और इसके नारंगी होंठों को देखिए)
यह पिछले 75 वर्षों में एक नई प्रजाति के रूप में पहचाना गया केवल पांचवां नया अफ्रीकी बंदर है।
यह बंदर की नई प्रजाति, ‘कोलोबस कांगोएन्सिस’ (Colobus congoensis) है, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘लिक्वेली’ (Likweli) के नाम से जाना जाता है। अन्य कोलोबस प्रजातियों की तरह इसकी भी गहरी, गूंजने वाली और दहाड़ने जैसी आवाजें होती हैं।
-लेखिका: केट गोलेम्बिएव्स्की (Kate Golembiewski)-
अक्सर धुंधली तस्वीरों को नेसी (Nessie) और बिगफुट (Bigfoot) जैसे मायावी जीवों के कथित सबूत के रूप में पेश किया जाता है। लेकिन लगभग दो दशक पहले डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के सुदूर जंगलों में ली गई एक धुंधली तस्वीर का विषय—एक अजीब, नारंगी चेहरे वाला बंदर—अब बिल्कुल सच साबित हुआ है। अब, इसे आधिकारिक तौर पर एक नई प्रजाति के रूप में मान्यता दे दी गई है, जो पिछले 75 वर्षों में वर्णित केवल पांचवां नया अफ्रीकी बंदर है।

साल 2008 में, लुकुरु वाइल्डलाइफ रिसर्च फाउंडेशन (Lukuru Wildlife Research Foundation) के शोधकर्ताओं की एक टीम ने कांगो के एक वर्षावन (जो अब लोमामी नेशनल पार्क का हिस्सा है) में पेड़ों की ऊंची चोटियों पर एक असामान्य बंदर देखा था। लेकिन वे जो तस्वीर ले पाए, वह काफी धुंधली थी।
इस नई प्रजाति का वर्णन करने वाले जर्नल ‘PLOS One’ में प्रकाशित पेपर के लेखक और फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी के पीएचडी छात्र जूनियर डी. अम्बोको (Junior D. Amboko) ने कहा, “चूंकि वह तस्वीर साफ नहीं थी, इसलिए किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया।”
एक दशक बाद, यह रहस्यमयी बंदर अधिक स्पष्ट रूप से सामने आया। एक अन्य फील्ड टीम ने घने काले बालों और नाक व मुंह के आसपास नारंगी रंग के धब्बे वाले एक मध्यम आकार के बंदर की तस्वीर ली। उन्होंने इन तस्वीरों को मिस्टर अम्बोको और लुकुरु वाइल्डलाइफ रिसर्च फाउंडेशन के वैज्ञानिक निदेशक जॉन हार्ट (John Hart) के साथ साझा किया। यह बिल्कुल साफ था कि यह उस क्षेत्र में जानी जाने वाली किसी भी प्रजाति जैसा नहीं दिखता था।
इसके बाद, शोधकर्ताओं ने इस अनोखे जीव को खोजने के लिए एक प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसे आंशिक रूप से नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी द्वारा वित्तपोषित किया गया था।

