ब्रह्मांड का अनोखा चमत्कार: वैज्ञानिकों ने देखी एक तारे के ‘पुनर्जन्म’ की लाइव घटना
By- Jyoti Rawat
रात के समय आसमान में जगमगाते अनगिनत तारों की भी इंसानों की तरह एक निश्चित उम्र और जीवनचक्र होता है। एक ही तारा समूह (स्टार क्लस्टर) में पैदा होने वाले तारे आमतौर पर एक ही उम्र के होते हैं। बड़े और भारी तारे अपना ईंधन जल्दी खत्म करके लाल दानव (रेड जायंट) बनकर नष्ट हो जाते हैं, जबकि छोटे तारे अरबों साल तक धीरे-धीरे चमकते रहते हैं।
लेकिन वैज्ञानिकों को लंबे समय से अंतरिक्ष में कुछ ऐसे अजीबोगरीब तारे मिलते रहे हैं, जो अपनी उम्र के बाकी साथी तारों की तुलना में बहुत अधिक जवान, नीले और चमकदार दिखाई देते हैं। इन्हें खगोलशास्त्र की भाषा में ‘ब्लू स्ट्रैग्लर’ (Blue Stragglers) यानी ‘नीले पिछड़े तारे’ कहा जाता है। ऐसा लगता है मानो इन तारों को अमरता या फिर से जवान होने की कोई ‘संजीवनी जड़ी-बूटी’ मिल गई हो!
वैज्ञानिकों का मानना था कि ये तारे अपने पास मौजूद किसी दूसरे साथी तारे का पदार्थ (गैस) चुराकर या फिर दो तारों के आपस में टकराकर जुड़ जाने से दोबारा जवान हो जाते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया को लाइव (प्रत्यक्ष) देखना अब तक बेहद दुर्लभ था।
अब भारतीय वैज्ञानिकों की अगुवाई में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने अंतरिक्ष में एक नीले तारे को अपने साथी तारे से गैस चुराकर ‘दोबारा जवान’ होते हुए रंगे हाथों पकड़ा है।
9,500 प्रकाश-वर्ष दूर घटा यह वाकया
यह ऐतिहासिक खोज ‘कॉलिंडर 261’ (Collinder 261) नाम के एक प्राचीन तारा समूह में हुई है, जो पृथ्वी से लगभग 9,500 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित है। यह तारा समूह लगभग 7 अरब साल पुराना है।
इस खोज में मुख्य भूमिका भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA – बेंगलुरु), गुवाहाटी विश्वविद्यालय और आईयूसीए (IUCAA – पुणे) के वैज्ञानिकों की रही। उन्होंने नासा के ‘टैस’ (TESS) स्पेस टेलीस्कोप और चिली में स्थित यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला (ESO) के विशाल टेलीस्कोप के आंकड़ों का अध्ययन किया।
शोधकर्ताओं ने TIC 327546480 नामक एक दोहरे तारे (बाइनरी स्टार सिस्टम) का अध्ययन किया, जिसमें दो तारे एक-दूसरे का चक्कर लगा रहे हैं:
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बड़ा नीला तारा (ब्लू स्ट्रैग्लर): इसका द्रव्यमान हमारे सूर्य से लगभग 1.67 गुना अधिक है।
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छोटा साथी तारा (दाता तारा): इसका द्रव्यमान सूर्य का केवल 0.32 गुना (लगभग एक-तिहाई) है।
अंतरिक्ष में ‘चोरी’: कैसे हो रहा है द्रव्यमान का तबादला?
अध्ययन में पाया गया कि छोटा साथी तारा अपने आकार से ज्यादा फैल चुका है। इस वजह से उसकी बाहरी गैसें उसके गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर बड़े नीले तारे की ओर बह रही हैं।
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सुपर-हॉट एक्स-रे किरणें: छोटे तारे से बहकर आ रही गैस जब बड़े नीले तारे की सतह से बहुत तेज रफ्तार में टकराती है, तो वहां बहुत अधिक गर्मी और शॉकवेव्स पैदा होती हैं। इससे शक्तिशाली एक्स-रे (X-ray) किरणें निकलती हैं, जिन्हें वैज्ञानिकों ने अपने टेलीस्कोप से रिकॉर्ड किया।
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तारे की बढ़ती रफ्तार: जैसे-जैसे बड़ा तारा अपने साथी से पदार्थ (मास) खींच रहा है, उसकी घूमने की गति भी बहुत तेज हो गई है। यह बड़ा तारा फिलहाल लगभग 70 किलोमीटर प्रति सेकंड की तेज रफ्तार से घूम रहा है।
5.4 अरब सालों से चल रहा है यह खेल
कंप्यूटर सिमुलेशन और वैज्ञानिक मॉडलों से पता चला है कि इस प्रणाली में द्रव्यमान के ट्रांसफर (Mass Transfer) का यह खेल आज से लगभग 5.46 अरब साल पहले शुरू हुआ था।
पिछले 1.6 अरब सालों में इस नीले तारे ने अपने छोटे साथी से इतनी गैस खींच ली है कि इसका वजन हमारे सूर्य के पौने हिस्से ($0.75\,M_\odot$) के बराबर बढ़ गया है। इसी चुराए गए ईंधन की वजह से यह बूढ़ा होने के बजाय फिर से जवान और चमकदार दिखाई दे रहा है।
भविष्य में क्या होगा इस जोड़ी का?
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह छोटा तारा तब तक अपनी गैस बड़े तारे को देता रहेगा जब तक कि उसका केवल एक ठोस कोर (हीलियम वाइट ड्वार्फ) न बच जाए।आगे चलकर, जब यह नया बना ‘ब्लू स्ट्रैग्लर’ भी अपना ईंधन खत्म करके फैलना शुरू करेगा, तो दोनों तारे एक विशाल गैसीय गुब्बारे (कॉमन एनवलप) में लिपट जाएंगे। इसके बाद या तो ये दोनों तारे आपस में टकराकर एक विशालकाय तारा बना लेंगे, या फिर एक-दूसरे के बेहद करीब रहकर चक्कर लगाते रहेंगे।
खगोल विज्ञान के लिए क्यों खास है यह खोज?
आईआईए (IIA) के प्रोफेसर राम सागर और शोध के मुख्य लेखक अली हसन शेख के अनुसार, “यह खोज इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि ब्रह्मांड में तारे दूसरे तारों से पदार्थ छीनकर खुद को फिर से जवान बना सकते हैं।”दशकों से चला आ रहा यह रहस्य अब सुलझ गया है कि आखिर ‘ब्लू स्ट्रैग्लर’ तारे कैसे बनते हैं। यह खोज वैज्ञानिकों को तारों के जन्म, उनके जीवन और उनके अंत को और बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगी।
