डाक्टरों ने पैर की हड्डी से बना डाला जबड़ा
मुरादाबाद, 5 अगस्त। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने 25 वर्षीय युवक किशन के जबड़े का पुनर्निर्माण उसकी पैर की फिबुला हड्डी की मदद से किया। अस्पताल के अनुसार यह सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क की गई।
बिलारी निवासी किशन पिछले करीब दो वर्षों से दांतों में दर्द, सूजन और मुंह ठीक से न खुलने की समस्या से परेशान था। उसे खाना चबाने में भी कठिनाई होती थी। स्थानीय स्तर पर इलाज से लाभ नहीं मिलने पर वह टीएमयू अस्पताल पहुंचा।
अस्पताल में सीबीसीटी जांच और बायोप्सी के बाद पता चला कि उसके निचले दाएं जबड़े में अमेलोब्लास्टोमा नाम का ट्यूमर है। चिकित्सकों के अनुसार यह कैंसर नहीं होता, लेकिन तेजी से बढ़कर जबड़े की हड्डी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए प्रभावित हिस्से को हटाकर नया जबड़ा बनाने का निर्णय लिया गया।
करीब पांच घंटे चली सर्जरी के दौरान चिकित्सकों ने पहले प्रभावित जबड़े को हटाया और फिर पैर की फिबुला हड्डी से नया जबड़ा तैयार कर प्रत्यारोपित किया। ऑपरेशन के दौरान नसों की सुरक्षा, रक्तस्राव को नियंत्रित रखना तथा स्वस्थ दांतों और ऊतकों को सुरक्षित रखना प्रमुख चुनौतियां थीं।
सर्जरी के बाद मरीज को दर्द से राहत मिली है और अब वह पहले की तुलना में सामान्य रूप से भोजन कर पा रहा है। अस्पताल का कहना है कि भर्ती, जांच, ऑपरेशन और दवाओं सहित पूरा उपचार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निःशुल्क उपलब्ध कराया गया।
इस सर्जरी में ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. दीपक ठाकुर के नेतृत्व में डॉ. नकुल चौधरी, डॉ. शुभम मिश्रा, डॉ. मीमांषा दफ्तरी तथा पीजी रेजीडेंट्स की टीम शामिल रही। डेंटल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. प्रदीप तांगड़े ने कहा कि इस प्रकार की सर्जरी तकनीकी रूप से जटिल होती है और विशेष विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। अस्पताल के अनुसार प्रो. दीपक ठाकुर को ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र में 19 वर्षों का अनुभव है।की हड्डी से जबड़े का पुनर्निर्माण, आयुष्मान योजना के तहत निःशुल्क सर्जरी
मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने 25 वर्षीय युवक किशन के जबड़े का पुनर्निर्माण उसकी पैर की फिबुला हड्डी की मदद से किया। अस्पताल के अनुसार यह सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क की गई।
बिलारी निवासी किशन पिछले करीब दो वर्षों से दांतों में दर्द, सूजन और मुंह ठीक से न खुलने की समस्या से परेशान था। उसे खाना चबाने में भी कठिनाई होती थी। स्थानीय स्तर पर इलाज से लाभ नहीं मिलने पर वह टीएमयू अस्पताल पहुंचा।
अस्पताल में सीबीसीटी जांच और बायोप्सी के बाद पता चला कि उसके निचले दाएं जबड़े में अमेलोब्लास्टोमा नाम का ट्यूमर है। चिकित्सकों के अनुसार यह कैंसर नहीं होता, लेकिन तेजी से बढ़कर जबड़े की हड्डी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए प्रभावित हिस्से को हटाकर नया जबड़ा बनाने का निर्णय लिया गया।
करीब पांच घंटे चली सर्जरी के दौरान चिकित्सकों ने पहले प्रभावित जबड़े को हटाया और फिर पैर की फिबुला हड्डी से नया जबड़ा तैयार कर प्रत्यारोपित किया। ऑपरेशन के दौरान नसों की सुरक्षा, रक्तस्राव को नियंत्रित रखना तथा स्वस्थ दांतों और ऊतकों को सुरक्षित रखना प्रमुख चुनौतियां थीं।
सर्जरी के बाद मरीज को दर्द से राहत मिली है और अब वह पहले की तुलना में सामान्य रूप से भोजन कर पा रहा है। अस्पताल का कहना है कि भर्ती, जांच, ऑपरेशन और दवाओं सहित पूरा उपचार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निःशुल्क उपलब्ध कराया गया।
इस सर्जरी में ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. दीपक ठाकुर के नेतृत्व में डॉ. नकुल चौधरी, डॉ. शुभम मिश्रा, डॉ. मीमांषा दफ्तरी तथा पीजी रेजीडेंट्स की टीम शामिल रही। डेंटल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. प्रदीप तांगड़े ने कहा कि इस प्रकार की सर्जरी तकनीकी रूप से जटिल होती है और विशेष विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। अस्पताल के अनुसार प्रो. दीपक ठाकुर को ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र में 19 वर्षों का अनुभव है।
