गढ़ भोज दिवस पर पारंपरिक अनाज और व्यंजनों की प्रदर्शनी

नरेंद्रनगर, 7 अक्टूबर। धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर में गढ़ भोज दिवस के अवसर पर उत्तराखंड की पारंपरिक खाद्य संस्कृति और स्थानीय अनाजों के पोषण एवं आर्थिक महत्व पर व्याख्यान और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम बीएससी गृह विज्ञान विभाग और सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में प्राचार्य डॉ. विजय सिंह नेगी की अध्यक्षता में हुआ।
सांस्कृतिक समिति के सदस्य डॉ. जितेंद्र नौटियाल ने कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए कहा कि इसका मकसद नई पीढ़ी को उत्तराखंड के पारंपरिक खान-पान और स्थानीय अनाजों के महत्व से परिचित कराना है।
गृह विज्ञान विभाग प्रभारी डॉ. सोनी तिलारा ने चौलाई, मंडुवा, झंगोरा, कोणी, नौरंगी दाल, जख्या, भांग, भांजीरा और भट्ट की दाल सहित विभिन्न स्थानीय खाद्य पदार्थों के पोषक गुणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में परंपरागत रूप से उपयोग किए जाने वाले मोटे अनाज पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं और इन्हें दैनिक भोजन में शामिल किया जा सकता है।
वाणिज्य विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. भारती जायसवाल ने स्थानीय अनाज और पारंपरिक व्यंजनों के आर्थिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बेहतर विपणन और पहचान के जरिए उत्तराखंड के इन उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे स्थानीय उत्पादकों की आय बढ़ाने के साथ ही पारंपरिक खेती को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
प्राचार्य डॉ. विजय सिंह नेगी ने छात्र-छात्राओं और उपस्थित लोगों से स्थानीय खाद्य पदार्थों का अधिकाधिक उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खान-पान को बढ़ावा देना स्वास्थ्य के साथ स्थानीय कृषि और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर स्थानीय अनाजों और उनसे तैयार व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई। प्रतिभागियों ने झंगोरे की खीर, ककड़ी-लूण, मारसे के लड्डू और अरसे सहित विभिन्न पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षक और कर्मचारी मौजूद रहे।

