एसआईआर में अनियमितताओं का आरोप, कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से की कार्रवाई की मांग

देहरादून, 12 अगस्त। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान सामने आ रही कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एक ही व्यक्ति के नाम से बड़ी संख्या में फॉर्म-7 दाखिल किए जा रहे हैं। पार्टी के अनुसार कुछ मामलों में एक व्यक्ति द्वारा 150 से अधिक आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। कांग्रेस ने ऐसे मामलों की तत्काल जांच कराने और वास्तविक मतदाताओं के नाम बिना सत्यापन हटाए जाने पर रोक लगाने की मांग की।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपे ज्ञापन में गोदियाल ने कहा कि उत्तराखंड में एसआईआर की प्रक्रिया 29 मई 2026 से शुरू हुई तथा प्रारूप निर्वाचक नामावली 14 जुलाई को प्रकाशित की गई। दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि 14 जुलाई से 13 अगस्त तक निर्धारित है। कांग्रेस का कहना है कि इस दौरान फॉर्म-10 में उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर कई असामान्य मामले सामने आए हैं।
गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश कमेटी ने इस संबंध में 30 जुलाई, 6 अगस्त और 10 अगस्त को भी शिकायतें और प्रत्यावेदन दिए हैं। इसके बावजूद कुछ व्यक्तियों द्वारा एक ही प्रकार की बड़ी संख्या में फॉर्म-7 दाखिल करने का सिलसिला जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के बीएलए-2 ने भी ऐसे मामलों की शिकायत की है, जिनमें कुछ व्यक्तियों द्वारा ऑनलाइन माध्यम से बार-बार आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, पार्टी के स्तर पर किए गए सत्यापन में ऐसे कई मतदाता अपने घोषित पते पर निवास करते हुए पाए गए हैं, जिनके नाम पर आपत्तियां दाखिल की गई हैं। उन्होंने कहा कि इससे संबंधित आपत्तियों की वास्तविकता और प्रामाणिकता पर सवाल उठते हैं। कुछ मामलों में एक ही आपत्तिकर्ता द्वारा अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में फॉर्म-7 दाखिल किए जाने की बात भी ज्ञापन में कही गई है। कांग्रेस ने आशंका जताई कि इस तरह की गतिविधियों के जरिए लक्षित तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास हो सकता है।
ज्ञापन में फॉर्म-10 के आंकड़ों और कांग्रेस द्वारा तैयार की गई आपत्तिकर्ताओं की सूची का हवाला देते हुए कहा गया है कि कुछ व्यक्तियों ने 150 से अधिक आपत्तियां दाखिल की हैं, जबकि कई अन्य आपत्तिकर्ताओं द्वारा अलग-अलग बूथों और विधानसभा क्षेत्रों में 50 से 150 तक आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। कांग्रेस ने इसे निर्वाचक नामावली पुनरीक्षण की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए गंभीर विषय बताया।
गोदियाल ने कहा कि निर्वाचक नामावली में गलत घोषणा या झूठी सूचना देने के संबंध में कानून में दंडात्मक प्रावधान हैं। उन्होंने मांग की कि बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल करने वाले व्यक्तियों की पहचान, संपर्क विवरण और उनके द्वारा दाखिल किए गए फॉर्म-7 की वास्तविकता की विधिवत जांच की जाए। उन्होंने कहा कि केवल ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त आपत्ति के आधार पर किसी पात्र मतदाता का नाम निर्वाचक नामावली से नहीं हटाया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मांग की कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) से नियमानुसार स्थलीय सत्यापन कराया जाए और उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई हो। पार्टी ने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में असामान्य रूप से बड़ी संख्या में दाखिल फॉर्म-7 की नियमित निगरानी के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी निर्देश जारी करने की मांग की है।
ज्ञापन में झूठी, दुर्भावनापूर्ण या तथ्यहीन आपत्तियां दाखिल करने वाले लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की मांग भी की गई है। कांग्रेस ने कहा कि निर्वाचक नामावली में किसी वास्तविक और पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर विषय होगा। इसलिए एसआईआर के दौरान पारदर्शिता, निष्पक्षता और प्रभावी सत्यापन सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।
प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के अलावा प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह, एसआईआर समिति के सदस्य एवं प्रदेश सचिव अमेंद्र सिंह बिष्ट, प्रदेश प्रवक्ता एवं चार्जशीट कमेटी सदस्य डॉ. प्रतिमा सिंह, अधिवक्ता संदीप चमोली, राकेश नेगी, विनोद कुमार, सुरभि शाह, डिंपल, नितिन बिष्ट आदि शामिल रहे।
