भालुओं के हमलों से ग्रामीण दहशत में, मवेशियों को बना रहा शिकार

गत वर्ष दो गौशालाओं पर हमला, इस बार बैल को मारा; ग्रामीणों ने रात्रि गश्त और मुआवजे की मांग की
ज्योतिर्मठ, 17 सितम्बर (कपरूवाण)। ज्योतिर्मठ प्रखंड के लाँजी गांव में लगातार भालू के हमलों से ग्रामीण दहशत में हैं। गत वर्ष भालू ने दो गौशालाओं को क्षतिग्रस्त कर गाय और बछिया को मार डाला था, जबकि इस वर्ष भी एक गौशाला में घुसकर बैल को अपना शिकार बना लिया। लगातार बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए ग्रामीणों ने वन विभाग से रात्रि गश्त बढ़ाने और नुकसान का शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवरों के कारण पहले ही खेती करना मुश्किल होता जा रहा है और अब पशुधन भी सुरक्षित नहीं है। इससे ग्रामीणों के सामने आजीविका के साथ ही अपनी सुरक्षा की चिंता भी बढ़ गई है।
गत वर्ष नवंबर और दिसंबर में लाँजी गांव के दरमान सिंह और पूरण सिंह की गौशालाओं को भालू ने क्षतिग्रस्त कर वहां बंधी गाय और बछिया को मार दिया था। वन बीट अधिकारी और वन पंचायत सरपंच की मौजूदगी में दोनों घटनाओं की संयुक्त जांच भी की गई, लेकिन पीड़ित ग्रामीणों को अभी तक मुआवजा नहीं मिल पाया है।
इस वर्ष 11 सितम्बर को भालू ने मुकेश सिंह भंडारी की गौशाला की छत तोड़कर भीतर बंधे बैल को मार डाला। इस घटना की भी वन विभाग की मौजूदगी में संयुक्त जांच कर रिपोर्ट तैयार की गई है।
वन पंचायत लाँजी के सरपंच दिनेश राणा ने बुधवार को बदरीनाथ वन प्रभाग, गोपेश्वर में विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर प्रभावित ग्रामीणों को शीघ्र मुआवजा देने का आग्रह किया। उन्होंने क्षेत्र में भालू की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा के प्रभावी उपाय किए जाने की भी मांग की।
बदरीनाथ वन प्रभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी विकास दरमोड़ा ने बताया कि लाँजी गांव में भालू के हमलों के मामले विभाग के संज्ञान में हैं। गत वर्ष की दो घटनाओं में से एक की विस्तृत रिपोर्ट मिल चुकी है और उसका मुआवजा शीघ्र दिया जाएगा। दूसरी घटना तथा इस वर्ष हुई घटना की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराने के लिए संबंधित रेंज कार्यालय को निर्देश दिए गए हैं।
भालू की सक्रियता केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। जोशीमठ नगर के विभिन्न वार्डों में भी भालू के दिखाई देने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इससे लोगों में भय बना हुआ है और कई इलाकों में लोग अंधेरा होने के बाद घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
