होमकुंड में चौसिंगा खांडुओं को कैलाश विदाई, बड़ी जात की वापसी शुरू

-हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली/नंदानगर, 20 सितम्बर। श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा-2026 रविवार को हिमशृंखलाओं की तलहटी में पंचगंगा स्थित पवित्र होमकुंड पहुंची, जहां नंदा-भगवती की विशेष बड़ी पूजा, अनुष्ठान और तीन चौसिंगा खांडुओं की कैलाश विदाई संपन्न हुई। इसके बाद बड़ी जात यात्रा ने श्री नंदादेवी सिद्धपीठ कुरूड़, नंदानगर के लिए वापसी शुरू कर दी और यात्रा अपने 17वें तथा चौथे निर्जन पड़ाव जामुन डाली पहुंच गई। होमकुंड में शांतिपूर्वक पूजा-अनुष्ठान संपन्न होने पर नंदा भक्तों ने माता का आभार जताया।
रविवार तड़के यात्रा के 16वें और तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र में स्नान के बाद श्रद्धालु माता नंदा के जयकारों के साथ आगे बढ़े। दशोली, बंड और ज्वाल्पा की नंदादेवी की डोलियों, छंतोलियों तथा पिछले 17 दिनों से यात्रा के साथ चल रहे चौसिंगा खांडुओं के साथ यात्री त्रिशूली और नंदा घुंघटी की तलहटी में स्थित पंचगंगा होमकुंड पहुंचे। खुशगवार मौसम के बीच कठिन उच्च हिमालयी यात्रा पूरी कर होमकुंड पहुंचने पर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दिया।

होमकुंड में नंदादेवी के पुजारियों और पंडितों मुंशी राम गौड़, दिनेश गौड़, प्रकाश गौड़, उमेश गौड़, नवीन गौड़ और प्रवीण गौड़ सहित अन्य पुजारियों ने नंदा-भगवती की विशेष पूजा और अनुष्ठान संपन्न कराए। इस अवसर पर बंड डोली के अध्यक्ष अशोक गौड़, श्री नंदादेवी बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत, कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला सहित दोनों समितियों के पदाधिकारी और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। अनुष्ठान के दौरान कई नंदा भक्तों पर देवी-देवताओं के अवतरण की पारंपरिक मान्यता के अनुरूप पश्वा नृत्य भी हुआ और उन्होंने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।
पूजा के बाद यात्रा के साथ आए तीनों चौसिंगा खांडुओं को कैलाश विदाई के लिए विशेष रूप से सजाया गया। उनकी पीठ पर नंदादेवी के लिए भेंट के रूप में खाजा, कलेऊ, प्रसाद, फल-फूल, आभूषण और शृंगार सामग्री रखी गई। पुजारियों के मंत्रोच्चार और नंदा-भगवती के जयकारों के बीच चौसिंगा खांडुओं को कैलाश की ओर विदा किया गया। इस भावुक क्षण में अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। परंपरा के अनुसार इसे मायके से अपनी लाडली नंदा की कैलाश विदाई माना जाता है।
होमकुंड में बड़ी पूजा और चौसिंगा खांडुओं की विदाई के बाद नंदादेवी बड़ी जात ने सिद्धपीठ कुरूड़ के लिए वापसी शुरू की। देवी की डोलियों और छंतोलियों के साथ श्रद्धालु भोजपत्र, रिंगाल और अन्य वनस्पतियों से घिरे दुर्गम क्षेत्र से होते हुए चंदनियाघाट के रास्ते जामुन डाली पहुंचे। यहां यात्रा का रात्रि प्रवास और जागरण होगा। कुछ यात्री लाट खोपड़ी और तातणा सहित आसपास के स्थानों पर भी रात्रि विश्राम के लिए रुके हैं।
सोमवार को यात्रा जामुन डाली से आगे बढ़ते हुए पांच दिन बाद पुनः आबादी वाले क्षेत्र में प्रवेश करेगी। 23 सितम्बर को दशोली और बंड की नंदादेवी डोलियां सिद्धपीठ कुरूड़ पहुंचेंगी, जहां यज्ञ-अनुष्ठान के साथ श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा-2026 का विधिवत समापन होगा। होमकुंड से वापसी शुरू होने के साथ ही कई यात्री विभिन्न मार्गों से अपने घरों की ओर भी लौटने लगे हैं।
