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भारत के प्रथम गांव माणा से नशामुक्त भारत अभियान का आगाज

गंगा से गंगासागर और कश्मीर से कन्याकुमारी तक पहुंचेगा नशामुक्ति का संदेश

-हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट
थराली/माणा, 20 सितम्बर। भारत के प्रथम गांव माणा (बदरीनाथ) से रविवार को नशामुक्त भारत अभियान का आगाज किया गया। बदरीनाथ में आयोजित देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान सजग इंडिया की ओर से शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के साथ देशभर में नशामुक्ति का संदेश पहुंचाना है। अभियान को ‘गंगा से गंगासागर और कश्मीर से कन्याकुमारी तक’ पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
अभियान के शुभारंभ में सजग इंडिया के साथ भारतीय सेना, गढ़वाल स्काउट्स, एनसीसी कैडेट्स और स्थानीय लोगों ने भागीदारी की। सीमांत गांव माणा से शुरू हुई इस मुहिम के माध्यम से युवाओं और आम लोगों से नशे से दूर रहकर स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया गया। देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी स्थानीय लोगों, युवाओं और सेना के जवानों से संवाद करते हुए नशे के बढ़ते दुष्प्रभावों के प्रति आगाह किया। उन्होंने समाज को नशामुक्त बनाने के लिए सामूहिक भागीदारी पर जोर देते हुए युवाओं से शिक्षा, खेल और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने का आह्वान किया।

सजग इंडिया के अध्यक्ष ललित जोशी पिछले 18 वर्षों से युवा संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से नशे के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान चला रहे हैं। संगठन के अनुसार अब तक उत्तराखंड के 1600 से अधिक स्कूल-कॉलेजों में करीब आठ लाख युवाओं से सीधा संवाद कर उन्हें नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया है। इस कार्य के लिए ललित जोशी को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से ‘नशा मुक्त मित्र-2026’ से सम्मानित किया जा चुका है।
ललित जोशी ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई किसी एक संस्था या विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को इसमें भागीदारी करनी होगी। युवाओं को नशे से बचाने के लिए जागरूकता के साथ उन्हें शिक्षा, खेल, रोजगार और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि माणा से शुरू अभियान को देश के विभिन्न हिस्सों तक ले जाया जाएगा। इसमें युवाओं के साथ सेना, एनसीसी, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी, ताकि नशामुक्ति के संदेश को व्यापक जन-अभियान का स्वरूप दिया जा सके।

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