मुख्यमंत्री धामी ने बद्रीनाथ में मास्टर प्लान कार्यों की समीक्षा की

बद्रीनाथ, 20 सितम्बर (कपरुवाण)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरीविशाल के दर्शन और पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने बदरीनाथ मास्टर प्लान के तहत चल रहे विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ सभी कार्य समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने आस्था पथ सहित विभिन्न निर्माणाधीन कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों से उनकी प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप होने चाहिए और इन्हें तय समयसीमा में पूरा किया जाए। निर्माण के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ ही धाम की धार्मिक, आध्यात्मिक और पारंपरिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
धामी ने कहा कि बदरीनाथ धाम को उसके धार्मिक और पौराणिक महत्व के अनुरूप भव्य, दिव्य एवं सुव्यवस्थित स्वरूप देने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। मास्टर प्लान के तहत विकसित की जा रही सुविधाओं से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने विकास कार्यों में धाम की पारंपरिक पहचान, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक स्वरूप के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने श्री स्वामीनारायण गुरुकुल राजकोट संस्थान के तत्वावधान में आयोजित ‘बदरीनाथ धाम कथा महोत्सव’ में प्रतिभाग किया। महोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 150 से अधिक संत-साध्वी और 1200 से अधिक हरिभक्त शामिल हुए। इस अवसर पर संस्थान के महंत स्वामी देवप्रसाददास जी स्वामी और सद्गुरुवर्य धर्मवल्लभदास जी स्वामी सहित बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदरीनाथ धाम आना अपने आप में विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभूति है। भगवान बदरीविशाल की कृपा और आशीर्वाद से इस पावन धाम में संतों और श्रद्धालुओं के बीच कथा महोत्सव में सहभागी होना सौभाग्य का विषय है। बदरीनाथ धाम भारत की सनातन चेतना और आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र है। भारतीय शास्त्रों में भी इस पवित्र धाम की महिमा का विशेष वर्णन मिलता है। यह भूमि सदियों से तप, साधना और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्राचीन विरासत, सनातन संस्कृति और आस्था के केंद्रों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार करने के साथ उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बाबा केदार की भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया था और राज्य सरकार इस संकल्प को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उत्तराखंड को प्रकृति ने अनुपम सौंदर्य के साथ अद्वितीय आध्यात्मिक संपदा भी प्रदान की है। चारधाम, गंगा-यमुना, हिमालय और हेमकुंड साहिब सहित अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल देवभूमि की विशिष्ट पहचान हैं। सरकार का प्रयास है कि इन तीर्थस्थलों का विकास श्रद्धालुओं की सुविधा के अनुरूप सुव्यवस्थित ढंग से हो और उनकी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा भी अक्षुण्ण रहे।
धामी ने कहा कि संत समाज का आशीर्वाद और मार्गदर्शन समाज एवं राष्ट्र के लिए सदैव प्रेरणादायी रहा है। ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों से सनातन परंपराओं, संस्कृति और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित संतों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, राज्य मंत्री हरक सिंह, माधव प्रसाद सेमवाल, बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़, मुख्य सलाहकार बीडी सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल बर्त्वाल, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष गजेन्द्र सिंह रावत, भाजपा जिला महामंत्री विनोद कनवासी एवं अरुण मैठाणी, भाजपा नगर अध्यक्ष अमित सती, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुभाष डिमरी, चारधाम होटल एसोसिएशन अध्यक्ष राजेश मेहता, गोपेश्वर नगरपालिका अध्यक्ष संदीप रावत, पूर्व जिलाध्यक्ष रघुबीर बिष्ट, बीकेटीसी के पूर्व उपाध्यक्ष किशोर पंवार, जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
