मुख्यमंत्री धामी बोले-एससी-एसटी अत्याचार के लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण करें
2024 से अब तक 462 अभियोग दर्ज, पीड़ितों को 4.71 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता

देहरादून, 22 सितम्बर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार से जुड़े लंबित मामलों की विवेचना और न्यायालयीन प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को राहत राशि के भुगतान में देरी न हो और गंभीर मामलों में उनकी तथा उनके परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति की बैठक केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा, सम्मान और अधिकार मिलना सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024 में अधिनियम के तहत 189 और 2025 में 157 अभियोग पंजीकृत हुए। वर्ष 2026 में 15 सितम्बर तक 116 अभियोग दर्ज किए गए हैं, जिनमें 25 प्रकरण विवेचनाधीन हैं। इस प्रकार 2024 से 15 सितम्बर 2026 तक कुल 462 अभियोग पंजीकृत हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने लंबित विवेचनाओं के कारणों की समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर उनका समयबद्ध निस्तारण करने को कहा। पुराने और गंभीर मामलों में पुलिस, प्रशासन तथा अभियोजन विभाग को समन्वित कार्रवाई और विशेष न्यायालयों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। आवश्यकता के अनुसार विशेष लोक अभियोजकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख रुपये और 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख रुपये की सहायता दी गई। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 18 सितम्बर तक 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये दिए गए। इस तरह तीन वित्तीय वर्षों में 436 पीड़ितों को कुल 471.398 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सहायता केवल आर्थिक राहत तक सीमित न रहे। प्रभावित परिवारों को आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाए। उन्होंने मामलों की विवेचना, न्यायालयीन स्थिति और राहत राशि की निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था विकसित करने तथा ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में कानूनी अधिकारों के प्रति व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए।
