कुमाऊं कार रैली ने सीमांत पर्यटन और पलायन वापसी का दिया संदेश

पिथौरागढ़, 22 सितम्बर। भारतीय सेना की ओर से रेनॉल्ट इंडिया के सहयोग से आयोजित सप्ताहभर की कुमाऊं कार रैली-2026 का पिथौरागढ़ में समापन हो गया। बरेली से शुरू हुई इस रैली ने कुमाऊं के दुर्गम सीमांत क्षेत्रों से गुजरते हुए साहसिक पर्यटन, स्थानीय आजीविका और पलायन वापसी के साथ सीमावर्ती गांवों के विकास का संदेश दिया।
रैली को 15 सितम्बर को बरेली से लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा, एवीएसएम, जीओसी उत्तर भारत ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। रैली पिथौरागढ़, धारचूला, गुंजी, लिपुलेख, ॐ पर्वत, कालापानी और आदि कैलाश से होते हुए वापस पिथौरागढ़ पहुंची। इस दौरान प्रतिभागियों ने कुमाऊं की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के साथ सीमांत क्षेत्र के जनजीवन को करीब से जाना।

रैली में पंचशूल गनर्स के 10 जवानों के अलावा सेना के पूर्व सैनिक, सोशल मीडिया से जुड़े लोग और उद्यमी शामिल हुए। अभियान के दौरान प्रतिभागियों ने दूरदराज के सीमावर्ती गांवों में स्कूली बच्चों, पूर्व सैनिकों और स्थानीय लोगों से संवाद किया। युवाओं को सशस्त्र सेनाओं में शामिल होकर राष्ट्रसेवा करने और सीमाओं की रक्षा की वीरता तथा समर्पण की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।
सेना के अनुसार रैली का उद्देश्य केवल साहसिक यात्रा नहीं, बल्कि सीमांत पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा करने की संभावनाओं को सामने लाना भी था। इसके माध्यम से पलायन वापसी को प्रोत्साहित करने और केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के उद्देश्यों को समर्थन देने का संदेश दिया गया।
अभियान के दौरान कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संपदा को सामने लाने के साथ सीमावर्ती समुदायों और भारतीय सेना के बीच जुड़ाव मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। रैली ने सीमांत गांवों को देश की भौगोलिक सीमाओं के प्रहरी होने के साथ सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय एकता और विकास के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में रेखांकित किया।
