उत्तराखंड पूर्ण साक्षर राज्य घोषित, नवसाक्षरों और स्वयंसेवी शिक्षकों का सम्मान

देहरादून, 6 अक्टूबर। उत्तराखंड ने साक्षरता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए स्वयं को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया है। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘उल्लास पर्व’ का आयोजन किया गया, जिसमें नवसाक्षरों और स्वयंसेवी शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखंड का पूर्ण साक्षर राज्य बनना सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अब नवसाक्षरों को केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित न रखकर आगे की शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी ज्ञान से भी जोड़ने की जरूरत है।
कार्यक्रम में बताया गया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में ‘उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ शुरू किया था। उत्तराखंड में इसके तहत करीब 25 हजार लोगों की सहभागिता रही और राज्य ने निर्धारित साक्षरता लक्ष्य हासिल किया। कार्यक्रम में नवसाक्षरों के साथ उन्हें पढ़ाने वाले स्वयंसेवी शिक्षकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य के सामने अब तीन प्रमुख लक्ष्य हैं—साक्षरता को शत-प्रतिशत स्तर तक पहुंचाना, विद्यालयों में ड्रॉपआउट को शून्य करना और वर्ष 2035 तक माध्यमिक शिक्षा के बाद कम से कम 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ना। नवसाक्षरों को आगे की औपचारिक शिक्षा और विभिन्न कौशल विकास योजनाओं से जोड़ने की भी तैयारी है।
भारत सरकार के विद्यालयी शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की अपर सचिव अर्चना अवस्थी ने उत्तराखंड की उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि नवसाक्षरों के लिए आगे की शिक्षा की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के माध्यम से उन्हें प्राथमिक स्तर की आगे की पढ़ाई से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
विद्यालयी शिक्षा सचिव ज्योति यादव ने कहा कि राज्य को पूर्ण साक्षर बनाने में स्वयंसेवी शिक्षकों, शिक्षा विभाग, एससीईआरटी, समग्र शिक्षा तथा जिला और विकासखंड स्तर पर कार्यरत अधिकारियों एवं समन्वयकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इस अवसर पर ऊधम सिंह नगर के नवसाक्षरों ने ‘देश में चमक गया उत्तराखंड, पूर्ण साक्षर बन गया उत्तराखंड’ साक्षरता गीत प्रस्तुत किया। रुद्रप्रयाग की नवसाक्षर रामप्यारी ने पढ़ना-लिखना सीखने के अपने अनुभव साझा किए, जबकि चम्पावत की स्वयंसेवी शिक्षिका मधु कालोनी ने उल्लास कार्यक्रम में काम करने के अनुभव बताए। एससीईआरटी की ओर से कार्यक्रम की उपलब्धियों पर तैयार लघु फिल्म भी दिखाई गई।
कार्यक्रम में कैंट विधायक सविता कपूर, शिक्षा विभाग की अपर सचिव नमामि बंसल सहित शिक्षा विभाग, एससीईआरटी और समग्र शिक्षा के अधिकारी तथा विभिन्न क्षेत्रों से आए नवसाक्षर और स्वयंसेवी शिक्षक उपस्थित रहे।
मैंने विशेष रूप से “पूर्ण साक्षर राज्य” घोषित होने और शिक्षा मंत्री के “अगले छह माह में 100 प्रतिशत साक्षरता” वाले कथन के बीच दिखने वाले विरोधाभास को ध्यान में रखते हुए भाषा संयत रखी है। प्रकाशित करने से पहले सरकार द्वारा “पूर्ण साक्षर” घोषित करने के लिए अपनाए गए प्रतिशत/मानदंड का उल्लेख मिल जाए तो समाचार और अधिक तथ्यपूर्ण होगा।

