पतंजलि विश्वविद्यालय में 29 अक्टूबर से प्राच्य विद्या सम्मेलन
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर। पतंजलि विश्वविद्यालय में 29 से 31 अक्टूबर तक 52वां अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ आधुनिक विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संगणकीय विज्ञान सहित विभिन्न विषयों पर शोध और अकादमिक विमर्श होगा।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने बताया कि सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वान, शोधार्थी, शिक्षक और विद्यार्थी भाग लेंगे। तीन दिवसीय आयोजन में वेद, वेदांत, योग, आयुर्वेद, दर्शन, साहित्य, भाषा, इतिहास और पुरातत्त्व के साथ समकालीन विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और प्राच्य विद्याओं के अध्ययन के लिए करीब एक शताब्दी पहले अखिल भारतीय प्राच्य विद्या परिषद की स्थापना की गई थी। इसकी शुरुआत पुणे स्थित भंडारकर प्राच्यविद्या अनुसंधान संस्थान से हुई। आर.एन. डांडेकर सहित अनेक विद्वान परिषद से जुड़े रहे। परिषद का शताब्दी वर्ष सम्मेलन नागपुर में आयोजित किया गया था।
प्रो. वरखेड़ी के अनुसार 52वें सम्मेलन की मेजबानी पतंजलि विश्वविद्यालय कर रहा है। आयोजन में भारतीय ज्ञान परंपरा के अष्टादश विद्या-स्थानों सहित प्राचीन और आधुनिक ज्ञान की विभिन्न धाराओं पर चर्चा की जाएगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, संगणकीय विज्ञान और अन्य आधुनिक विषयों पर भी अलग अकादमिक सत्र रखे गए हैं।
सम्मेलन के अंतर्गत ‘सनातन धर्म एवं शास्त्र-विमर्श’ विषय पर विशेष संगोष्ठी भी होगी। इसमें विभिन्न संप्रदायों और दार्शनिक परंपराओं से जुड़े आचार्य एवं विद्वान सनातन धर्म, भारतीय दर्शन और अलग-अलग मत-परंपराओं के बीच संवाद के विषयों पर चर्चा करेंगे।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन में विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवा अध्यापकों की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उनके शोधपत्र और अकादमिक प्रस्तुतियां भी विभिन्न सत्रों में शामिल की जाएंगी।
प्रो. वरखेड़ी ने कहा कि वर्तमान समय में भारतविद्या और भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पक्षों पर देश-विदेश में शोध हो रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य परंपरागत विषयों के साथ आधुनिक ज्ञान-विज्ञान को भी अकादमिक चर्चा के एक मंच पर लाना है। आयोजकों के अनुसार तीन दिवसीय सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में विद्वानों के भाग लेने की संभावना है।

