विज्ञान प्रोद्योगिकी

हाई-फ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रॉनिक्स की चुनौतियों के समाधान में एआई और मशीन लर्निंग की अहम भूमिका

तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय में डिजिटल परिवर्तन और इंटेलिजेंट सिस्टम्स पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, 90 शोधपत्र प्रस्तुत

मुरादाबाद, 8 अक्टूबर। उच्च आवृत्ति वाली इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों की जटिल चुनौतियों के समाधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग और डीप न्यूरल नेटवर्क जैसी आधुनिक तकनीकें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन तकनीकों की सहायता से न केवल सटीक पूर्वानुमान संभव हो रहे हैं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के डिजाइन और उनकी कार्यक्षमता में भी व्यापक सुधार हो रहा है।

यह बात दिल्ली विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक साइंस विभाग के डॉ. बिस्वजीत मुखर्जी ने तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में कही। विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ कंप्यूटिंग साइंसेज एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (सीसीएसआईटी) तथा फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग (एफओई) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन का विषय ‘डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स’ था।

डॉ. मुखर्जी ने कहा कि मशीन लर्निंग और डीप न्यूरल नेटवर्क डेटा तथा अनुभवों से सीखकर जटिल तकनीकी समस्याओं के अधिक सटीक समाधान उपलब्ध करा रहे हैं। भविष्य में मानवीय विशेषज्ञता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समन्वय तकनीकी प्रणालियों को अधिक तेज, सक्षम और प्रभावी बनाएगा। उन्होंने माइक्रोवेव एवं इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में एआई की उपयोगिता समझाते हुए 1940 और 1950 के दशक की पारंपरिक तकनीकों से लेकर आधुनिक एआई आधारित प्रणालियों तक के विकास पर प्रकाश डाला।

अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के सहयोग से आयोजित सम्मेलन में देश-विदेश के शोधकर्ताओं ने कुल 90 शोधपत्र प्रस्तुत किए। विभिन्न तकनीकी सत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, डेटा विज्ञान, साइबर सुरक्षा, डिजिटल परिवर्तन, स्मार्ट तकनीक और इंटेलिजेंट सिस्टम्स से संबंधित नवीन अनुसंधान एवं नवाचारों पर विचार-विमर्श हुआ।
सीसीएसआईटी के वाइस प्रिंसिपल प्रो. अशोक कुमार ने शोधकर्ताओं से सैद्धांतिक अध्ययन के साथ समाज और उद्योग की वास्तविक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान का उद्देश्य ऐसी टिकाऊ और प्रभावी तकनीकें विकसित करना होना चाहिए, जिनका लाभ व्यापक स्तर पर मिल सके।

सम्मेलन की संयोजक डॉ. शालिनी निनोरिया ने कहा कि डिजिटल क्रांति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वर्तमान दौर में इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय आयोजन नए विचारों, शोध सहयोग और तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इससे पूर्व मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। समापन समारोह में सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ प्रो. एसएस ठाकुर सहित अनेक शिक्षाविद् और शोधकर्ता उपस्थित रहे।

सम्मेलन में डॉ. नूपा राम चौहान, डॉ. रूपल गुप्ता, डॉ. मोहन विशाल गुप्ता, प्रो. प्रदीप कुमार, डॉ. नमित गुप्ता, डॉ. प्रियांक सिंघल, डॉ. इंदु त्रिपाठी, हरजिंदर सिंह, ज्योति रंजन लाभ, नवनीत विश्नोई, डॉ. पराग अग्रवाल, डॉ. आदित्य जैन, डॉ. अमित सिंह, डॉ. नृपेश चौहान, शिखा गंभीर, डॉ. प्रीति रानी, डॉ. विशाल मिश्रा और वर्षा सैनी सहित अनेक प्रतिभागी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन गौरवी प्रजापति ने किया।

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