एसआईआर के विरोध में देहरादून में नागरिक मार्च, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
मतदाता सूची से 17 लाख नाम हटाने पर सवाल, पुनरीक्षण प्रक्रिया रद्द करने और नाम बहाल करने की मांग

देहरादून, 12 अक्टूबर। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और प्री-एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में सोमवार को विभिन्न सामाजिक, महिला, छात्र और जन संगठनों ने देहरादून में नागरिक मार्च निकाला। गांधी पार्क से मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने सचिवालय के निकट रोककर हिरासत में ले लिया।
उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच के नेतृत्व में आयोजित मार्च में सीटू, एसएफआई, किसान सभा, नौजवान सभा, जनवादी महिला समिति, इप्टा, जन संवाद सहित अनेक संगठनों ने भाग लिया। माकपा, भाकपा, आम आदमी पार्टी और उत्तराखंड क्रांति दल के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
आयोजकों के अनुसार, सचिवालय के निकट पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने कई आंदोलनकारियों को बसों में बैठाकर हिरासत में ले लिया। इनमें कमला पंत, निर्मला बिष्ट और डॉ. रवि चोपड़ा प्रमुख थे। पुलिस कार्रवाई के कारण प्रदर्शनकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन नहीं सौंप सके।
प्रस्तावित ज्ञापन में दावा किया गया कि प्रदेश में प्री-एसआईआर और एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लगभग 17.05 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, जबकि करीब 4.01 लाख नाम जोड़े गए। संगठनों ने इन आंकड़ों की स्वतंत्र जांच कराने और वर्ष 2024 की लोकसभा चुनाव मतदाता सूची को आधार बनाने की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि बिना समुचित सत्यापन, पूर्व सूचना और सुनवाई के किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाना अनुचित है। उन्होंने वर्ष 2026 की एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने, गलत तरीके से हटाए गए नाम बहाल करने, स्वतंत्र ऑडिट कराने तथा बूथ स्तर पर शिकायत निवारण शिविर आयोजित करने की मांग की।
मार्च में राजेंद्र पुरोहित, त्रिलोचन भट्ट, सुरेंद्र सिंह सजवाण, समर भंडारी, गरिमा दसौनी, इंद्रेश नौटियाल सुजाता पॉल और जगदीश कुकरेती सहित बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।

