नवरात्रि के पर्व पर बधाणगढ़ी में लगा नंदा भक्तों का तांता

-हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली, 12 अक्टूबर । गढ़वाल के 52 गढ़ों में सुमार बधाणगढ़ी में शरादीय नवरात्रि के पर्व पर नंदा भगवती के भक्तों का तांता लगा हुआ हैं। करीब तीन किमी की खड़ी चढ़ाई को पार कर देवी भक्त बधाणगढ़ी में नंदादेवी मां भगवती, दक्षिण कालिंका के साथ ही गढ़ी की चोटी पर स्थित शिवलिंग की पूजा अर्चना कर नवरात्रि पर्व का पूर्णय अर्जित करने में जुटे हुए हैं।
गढ़वाल एवं कुमाऊं की सीमा पर समुद्र तल से करीब 7500 फिट की ऊंचाई पर स्थित बधाणगढ़ी गढ़वाल के 52 में से एक हैं।इस गढ़ी को लेकर गढ़वाल एवं कुमाऊं के राजाओं के बीच कई बार युद्ध होते रहें, इतिहास के अनुसार बधाणगढ़ी राजनीति के हिसाब से सबसे अधिक अस्थिर गढ़ीयों में सुमार रही हैं। इस गढ़ी पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिए गढ़वाली राजाओं एवं कुमाऊं के राजाओं के बीच लगातार टकराव होते रहें। माना जाता हैं कि राज्य की राजधानी के दौरान ही राजाओं ने यहां पर राजराजेश्वरी नंदा भगवती के साथ ही दक्षिण कालिंका सहित तमाम अन्य देवी, देवताओं के साथ ही गढ़ी की सबसे ऊंची चोटी पर शिवलिंग की स्थापना की थी।
बधाणगढ़ी को किस राजा ने सबसे पहले अपनी राजधानी स्थापित की इसकी सही-सही ऐतिहासिक जानकारी नही हैं। किंतु माना जाता हैं कि 1500 ई०
के आसपास बधाणगढ़ी में गढ़वाल राजा ने अपनी राजधानी बनाईं,इसी दौरान राजाओं ने अपनी कुल देवी मां नंदा भगवती के मंदिर की यहां पर स्थापित की होगी ऐसा माना जाता हैं। बहरहाल समय बिताने के साथ ही देश में राजतंत्र समाप्त हो कर प्रजातंत्र स्थापित हो चुका हैं परन्तु बधाणगढ़ी की महत्ता लगातार बढ़ती जा रही हैं। आबादी क्षेत्रों से करीब 3 किमी की दूरी पर स्थित बधाणगढ़ी में यूं तो लगभग पूरे वर्ष देवी भक्तों का आने-जाने एवं पूजा पाठ का सिलसिला बना रहता हैं, परंतु चैत्र नवरात्राओं के दौरान एवं शरादीय नवरात्रि के पावन पर्वों पर यहां पर देवी भक्तों की आमद काफी अधिक बढ़ जाती हैं। इन दिनों शरादीय नवरात्रि के पर्व पर भी यहां पर गढ़वाल, कुमाऊं के साथ ही अन्य तमाम क्षेत्रों के देवी भक्त देवी की पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहें हैं।
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कुमाऊं एवं गढ़वाल मंडल की मध्यस्थली पर्यटन नगरी ग्वालदम से ग्वालदम-सिमली राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब 5 किमी ताल नामक स्थान पर वाहनों के जरिए पहुंचा जाता हैं। यहां से करीब 3 किमी की खड़ी चढ़ाई को तय कर बधाणगढ़ी पहुंचा जाता हैं। इसके अलावा इसी मार्ग पर स्थित तलवाड़ी व घनियालधार कस्बे से भी बधाणगढ़ी पहुंचा जा सकता हैं।
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बधाणढ़ी उत्तराखंड के ऊंचाई वाली चोटियों में सुमार हैं। यहां से हिमपर्वत श्रंखलाओं के तहत त्रिशूली, नंदा घुंघटी, नंदा देवी, पंचाचुली,काकोट,हाथी,घोड़ा, पिंडारी ग्लेशियर के अलावा नेपाल की कई पर्वत श्रंखलाओं के बेहतरीन व्यू देखते ही बनते हैं। देवी भक्त देवी की स्तुति के साथ ही यहां से दिखाई देने वाले प्राकृतिक सौंदर्य का दिदार करने से भी नही चूकते हैं।

