केदारताल ट्रेक पर हिमस्खलन से आठ लोग फंसे, चार सुरक्षित मिले, बचाव अभियान तेज
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, वन विभाग और स्थानीय गाइडों की टीमें बचाव कार्य में जुटीं, हेलीकॉप्टर की सहायता मांगी
उत्तरकाशी, 31 अक्टूबर। गंगोत्री से केदारताल ट्रेक पर गए पर्यटकों और उनके सहयोगी कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने के लिए जिला प्रशासन ने बचाव अभियान तेज कर दिया है। खराब मौसम, भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण ट्रेकिंग मार्ग अवरुद्ध होने से कई लोग उच्च हिमालयी क्षेत्र में फंस गए हैं। शनिवार को गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन से प्राप्त नवीनतम सूचना के अनुसार कच्ची ढांग के आसपास तीन पोर्टर और एक रसोइया सहित चार लोग सुरक्षित मिल गए हैं, जबकि आठ अन्य लोग भोजखड़क से आगे हिमस्खलन के कारण फंसे हुए हैं। उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, वन विभाग और स्थानीय गाइडों की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं।
जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार 27 अक्टूबर को गंगोत्री से सात ट्रेकर्स और छह सहयोगी कर्मचारियों सहित कुल 13 सदस्यीय दल केदारताल के लिए रवाना हुआ था। इस दल को 29 अक्टूबर को वापस लौटना था, लेकिन अचानक मौसम बिगड़ने, बर्फबारी और ग्लेशियर क्षेत्र में मार्ग अवरुद्ध होने के कारण दल निर्धारित समय पर वापस नहीं लौट सका।
बताया गया कि 30 अक्टूबर को ट्रेकिंग एजेंसी के माध्यम से फोन पर संपर्क होने पर दल के सदस्यों ने स्वयं को कच्ची ढांग के पास सुरक्षित बताया था। उन्होंने बर्फबारी के कारण आगे बढ़ने में असमर्थता जताते हुए प्रशासन से सहायता मांगी थी। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने संबंधित विभागों को तत्काल बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी के निर्देश पर 30 अक्टूबर को ट्रेकिंग एजेंसी ने पोर्टरों और गाइडों की एक टीम रवाना की। इस टीम ने प्रतिकूल मौसम और बर्फबारी के बीच लगभग छह किलोमीटर तक अवरुद्ध ट्रेकिंग मार्ग खोलने का कार्य किया, ताकि फंसे हुए लोगों तक पहुंचा जा सके।
शनिवार, 31 अक्टूबर को सुबह छह बजे उत्तरकाशी से एनडीआरएफ की दस सदस्यीय टीम गंगोत्री के लिए रवाना की गई। इसके अतिरिक्त गंगोत्री से वन विभाग के दो कर्मचारियों, ट्रेकिंग एजेंसी के सात सदस्यों तथा एसडीआरएफ के छह जवानों को भी केदारताल की ओर भेजा गया। इस प्रकार विभिन्न एजेंसियों के कम से कम 25 बचावकर्मियों और सहयोगियों को अभियान में लगाया गया है।
गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के रेंज अधिकारी से प्राप्त सूचना के अनुसार कच्ची ढांग के आसपास तीन पोर्टर और एक रसोइया सुरक्षित मिल गए हैं। हालांकि भोजखड़क से आगे हिमस्खलन आने के कारण शेष आठ लोगों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। बर्फ और हिमस्खलन के मलबे से रास्ता अवरुद्ध होने के कारण बचाव दलों को अत्यंत सावधानी से आगे बढ़ना पड़ रहा है।
प्रशासन ने घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए हैं। दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में राहत अभियान को गति देने के लिए हेलीकॉप्टर की सहायता मांगी गई है। इस संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग ने संबंधित अधिकारियों और विभागों को पत्र भेजा है। हालांकि हेलीकॉप्टर की उपलब्धता और उड़ान की स्थिति के संबंध में अभी पुष्टि नहीं हुई है।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बचाव कार्य में जुटी सभी एजेंसियों को आपसी समन्वय बनाए रखने और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है।
इस बीच केदारताल क्षेत्र में हुई बर्फबारी और हिमस्खलन ने उच्च हिमालयी ट्रेकिंग मार्गों पर मौसम संबंधी खतरों को एक बार फिर उजागर किया है। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलने और बर्फ जमने से पैदल मार्गों पर आवाजाही जोखिमपूर्ण हो जाती है। ऐसे में बचाव दलों के सामने फंसे हुए लोगों तक जल्द पहुंचने के साथ अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी चुनौती है।
संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी
प्रशासन की प्रारंभिक सूचना में दल के कुल 13 सदस्य बताए गए हैं, जबकि नवीनतम विवरण में चार लोगों के सुरक्षित मिलने और आठ के फंसे होने की जानकारी दी गई है। इस प्रकार एक व्यक्ति की स्थिति का विवरण अभी स्पष्ट नहीं है। प्रशासन की अगली आधिकारिक सूचना से ही सभी 13 सदस्यों की स्थिति की पुष्टि हो सकेगी।

