मध्य प्रदेश में जंगली गौर के हमले में देहरादून के 26 वर्षीय सैनिक की मौत
सेना के प्रशिक्षण केंद्र में फुटबॉल मैच के दौरान हुआ हादसा, मैदान के किनारे आराम कर रहे दो जवानों पर अचानक झपटा जंगली जानवर
देहरादून, 31 अक्टूबर। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में स्थित सेना के एक प्रशिक्षण केंद्र में जंगली गौर (भारतीय बाइसन) के हमले में उत्तराखंड के देहरादून जिले के एक युवा सैनिक की मौत हो गई। मृतक की पहचान देहरादून जिले के दुधली गांव निवासी 26 वर्षीय आकाश चौधरी के रूप में हुई है। यह दर्दनाक घटना उस समय हुई, जब सेना के प्रशिक्षण केंद्र में नियमित फुटबॉल मैच चल रहा था और दो सैनिक मैदान के किनारे आराम कर रहे थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना बुधवार को नर्मदापुरम स्थित आर्मी एजुकेशन कोर (एईसी) ट्रेनिंग कॉलेज एवं सेंटर के परेड मैदान के समीप हुई। यह सैन्य प्रशिक्षण केंद्र सतपुड़ा बाघ अभयारण्य के बफर क्षेत्र में स्थित है। फुटबॉल मैच के दौरान अचानक एक जंगली गौर मैदान के पास पहुंच गया और किनारे बैठे दो सैनिकों पर हमला कर दिया। इस दौरान गौर ने आकाश चौधरी को अपने सींगों से गंभीर रूप से घायल कर दिया।
हमले के तुरंत बाद साथी सैनिक घायल आकाश चौधरी को छावनी परिसर में स्थित सैन्य अस्पताल ले गए, लेकिन वहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अचानक हुई इस घटना से प्रशिक्षण केंद्र में शोक का माहौल पैदा हो गया।
घटना की सूचना मिलने पर सतपुड़ा बाघ अभयारण्य की एक टीम भी मौके पर पहुंची। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में हमलावर वन्यजीव की बाद की गतिविधियों तथा घटना के संबंध में की गई कार्रवाई का विवरण नहीं दिया गया है।
गौर भारत में पाया जाने वाला विशालकाय जंगली गोवंशीय पशु है, जिसे सामान्यतः भारतीय बाइसन भी कहा जाता है। यह अत्यंत शक्तिशाली वन्यजीव होता है और खतरा महसूस होने अथवा उत्तेजित होने पर मनुष्यों पर जानलेवा हमला कर सकता है। सतपुड़ा के जंगलों में गौर सहित अनेक वन्यजीव पाए जाते हैं।
इस घटना का उत्तराखंड से सीधा संबंध इसलिए है क्योंकि जान गंवाने वाले सैनिक आकाश चौधरी देहरादून जिले के दुधली गांव के निवासी थे। महज 26 वर्ष की आयु में एक युवा सैनिक की इस प्रकार असामयिक मृत्यु अत्यंत दुखद है।
यह हादसा वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास स्थित सैन्य और अन्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े करता है। विशेष रूप से जंगलों से सटे खुले मैदानों और प्रशिक्षण परिसरों में वन्यजीवों की आवाजाही रोकने तथा जवानों की सुरक्षा के लिए प्रभावी उपाय किए जाने की आवश्यकता है।

