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“रामराज्य” को एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करने की एक दिलचस्प प्रस्ताव

-गोविन्द प्रसाद बहुगुणा-
वनवास से लौटकर राम के अयोध्या पहुंचते ही उनके राज तिलक की तैयारियां शुरू हो गई थी ‌। राज्याभिषेक से पहले दिन राम अपने कुल गुरु मुनि वशिष्ठ से आशीर्वाद लेने उनके पास गए I गुरु वशिष्ठ ने राम को अपनी शुभ कामनाएं देते हुए एक सलाह यह दी कि- देखो राम ! यदि सही तरह से रामराज्य स्थापित करना चाहते हो तो तुमको “विष्णु ” बनना पड़ेगा I तुमको चार प्रतीक चिन्ह के तौर पर अपनी कल्पना में बसाने होंगे – – शंख, चक्र, गदा और पद्म।
शंख इस बात का प्रतीक होगा कि तुम्हारे राज्य में ज्ञान- विज्ञान के प्रसार की ध्वनि दूर तक जानी चाहिए , ज्ञान सबके लिए जरुरी है उसे सबको उपलब्ध कराना तुम्हारा मुख्य कर्तव्य होना चाहिए। तुम्हारे राज्य में कोई अनपढ़ न रहे , “चक्र” का धारण करना इसलिए आवश्यक है कि वह गतिशीलता का प्रतीक है -तुम्हारे राज्य में प्रगतिशीलता का वातावरण बना रहे ,उद्यम और उद्योग के प्रति नागरिक सतत प्रयत्नशील रहें I तुम्हारी नीतियों के कारण राज्य की प्रगति का चक्का जाम न हो जाए,यह ध्यान रखना I “गदा” इसलिए जरूरी है कि गदा शक्ति का प्रतीक है I लोग यह न समझें की राजा कमजोर है, हम कुछ भी कर सकते हैं I चोर उचक्के और शत्रु तुमसे डरे रहें I दुष्टों के दमन के लिए, उच्छृखंलता को दण्डित करने के लिए गदा जरूरी है I राज्य में यदि कहीं से आतताई पहुँच गए तो उन्हें बहार निकलने के लिए गदा धारण करना आवश्यक है I
और “कमल” का पुष्प तुम्हारे हाथ में इसलिए रहना चाहिए कि यह इस बात का द्योतक है कि कमल से लक्ष्मी पैदा हुई I आपको अनासक्त होकर चलना और लक्ष्मी की वृद्धि करनी चाहिए। कमल प्रसन्नता का प्रतीक तो है ही लेकिन यह प्रसन्नता तभी रह सकती है जब आपका राज्य संपन्न और वैभवशाली हो आप राज्य की श्रीवृद्धि के लिए सदैव यत्न करते रहें I आ
खिरी बात वशिष्ठ ने यह कही कि देखो आपने नाम से मठ- मंदिर मत बनवाना , इससे पाखंड बढ़ता है और भक्ति गायब हो जाती है – तुम्हारी लोकप्रियता ही तुम्हारा मंदिर हो ,तुम सबके मन में बसे रहो ऐसा काम करो …. गुरु वशिष्ठ की उपरोक्त सलाह तो देश के सभी शासकों पर लागू होती है I …..
GPB

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