क्षेत्रीय समाचार

फूलों की खेती से स्वरोजगार की ओर बढ़ेंगी जोशीमठ की महिलाएं

 

जोशीमठ, 25 अगस्त (कपरूवाण)। जोशीमठ क्षेत्र की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से फूलों की व्यावसायिक खेती को प्रोत्साहित करने की पहल शुरू की गई है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती के प्रयासों और उद्यान विभाग के सहयोग से महिलाओं को प्रशिक्षण देने के बाद सोमवार को फूलों के बीज का वितरण किया गया। पहले चरण में महिलाओं को 56 पैकेट उपलब्ध कराए गए हैं।
इस पहल के तहत सती ने जिलाधिकारी से वार्ता कर जोशीमठ क्षेत्र की महिलाओं को फूलों की खेती का प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का विषय रखा था। इसके बाद उद्यान विभाग से समन्वय कर महिलाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को फूलों की खेती की तकनीक, पौधों की देखभाल, उत्पादन की गुणवत्ता और विपणन के साथ ही इससे आय अर्जित करने के तरीकों की जानकारी दी गई। प्रयास है कि महिलाएं फूलों की खेती को व्यावसायिक रूप से अपनाकर स्थानीय स्तर पर ही नियमित आय का साधन विकसित कर सकें।
नगर पालिका क्षेत्र के फेडरेशन से करीब 400 महिलाएं जुड़ी हैं और इसके अंतर्गत लगभग 40 स्वयं सहायता समूह कार्य कर रहे हैं। फेडरेशन की अध्यक्ष अनीता पवार और सचिव सुमेधा भट्ट के समन्वय से इन समूहों की महिलाओं को भी इस पहल से जोड़ा जा रहा है।
प्रशिक्षण के बाद अब महिलाओं को फूलों की खेती के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रथम चरण में 56 पैकेट वितरित किए गए हैं। अन्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को भी चरणबद्ध तरीके से इसका लाभ दिए जाने की योजना है।
ऋषि प्रसाद सती ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण के साथ आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना भी जरूरी है। फूलों की खेती से महिलाओं को अपने क्षेत्र में ही स्वरोजगार मिल सकता है और उनकी आय में वृद्धि के साथ स्थानीय स्तर पर फूलों का उत्पादन भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आगे भी प्रयास जारी रखे जाएंगे।
ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक सोमेश भंडारी ने बताया कि नगर क्षेत्र की महिलाओं को पहले फूलों की खेती का प्रशिक्षण दिया गया था। इसी क्रम में अब उन्हें फूलों के बीज वितरित किए गए हैं। विभाग का प्रयास है कि प्रशिक्षण प्राप्त महिलाएं फूल उत्पादन को आय के नियमित साधन के रूप में विकसित कर सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!