चमोली जिले में भी पहुंची पशुओं की बीमारी लम्पी : पशुपालक दहशत में

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–गौचर से दिगपाल गुसाईं —
पशुओं की लंपी बीमारी के जनपद चमोली में भी दस्तक देने से पशुपालकों में दहशत का माहौल देखने को मिल रहा है।सब जानते हुए भी पशुपालन विभाग क्यों मौन साधे हुए है यह बात किसी के समझ में नहीं आ रही है।
मैदानी भागों से शुरू हुई पशुओं की अज्ञात लंपी बीमारी ने जनपद चमोली में भी दस्तक दे दी है। जानकारी के अनुसार देवली बगड़ में इस बीमारी की चपेट में 6 पशु आ गए हैं। हालांकि पशुपालन विभाग टीकाकरण की बात तो कर रहा है लेकिन पशुपालन विभाग का यह टीकाकरण अभियान यहां दूर दूर तक नजर नहीं आ रहा है। टीकाकरण तो रहा दूर पशु चिकित्सालयों में चिकित्सकों की कमी भी पशुपालकों को खल रही है। पालिका क्षेत्र गौचर में इन दिनों आवारा पशुओं की तादाद बढ़ती ही जा रही है।जो खुलेआम जहां तहां बीमारी फैला सकते हैं। यही नहीं इनमें से कई पशु खुरपका बीमारी से ग्रसित हैं। हालांकि इन आवारा पशुओं की देखभाल के लिए गौचर के विशाल मैदान के एक बड़े भू भाग पर गौ सदन की स्थापना भी की गई है।इस गौ सदन को सरकार आवारा जानवरों की देखभाल के लिए प्रति वर्ष दो लाख रुपए की सहायता राशि भी देती है बावजूद इसके इस गौ सदन के कर्ता धरतावों ने गौ सदन के जानवरों को खुले में छोड़ दिया है। आवारा जानवर जहां कास्तकारों की पकने के कगार पर पहुंच चुकी फसल को नुक़सान तो पहुंचा ही रहे हैं वहीं जहां तहां गंदगी फैलाने के साथ साथ बीमारी के संक्रमण को भी बढ़ावा दे रहे हैं।गौ सदन के प्रबंधक अनिल नेगी का कहना है कि उन्होंने नगरपालिका को अपना स्तीफा सौंप दिया है। अभी इस वर्ष गौ सदन को किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली है। प्रगतिशील कास्तकार कंचन कनवासी, विजया देवी, विपुल नेगी रमेश डिमरी आदि का कहना है कि आवारा जानवरों के मामले में प्रशासन शीघ्र संज्ञान लेना चाहिए ताकि बीमारी के संक्रमण पर रोक लगाया जा सके।

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