उर्दू शायरी में भगवद्गीता –

-गोविंद प्रसाद बहुगुणा-
मशहूर शायर अल्लामा इकबाल के इस दर्शन से प्रेरित कि ,”मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा ‘” एक अन्य शयर जो, पद्मश्री तथा यश भारती सम्मान से विभूषित हुए थे, स्व अनवर जलालपुरी ने भी उर्दू शायरी में गीता के इन दो श्लोकों का अनुवाद किया तो पढकर खुशी हुई । कोशिश अच्छी है और अनुकरणीय भी,देखिए आप भी । -GPB
“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत्।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मांन सृजाम्यहम्॥७॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे”॥८॥ अध्याय ४
“फ़राएज़ से इंसा हो बेज़ार जब
हो माहौल सारा गुनहगार जब,
बुरे लोगों का बोलबाला रहे,
न सच बात को कहने वाला रहे।
कि जब धर्म का दम भी घुटने लगे,
शराफत का सरमाया लुटने लगे,
तो फिर जग में होना है ज़ाहिर मुझे..
जहां भर में रहना है हाज़िर मुझे!
बुरे जो हैं उनका करूँ खात्मा,
जो अच्छे हैं उनका करूँ में भला,
धरम का ज़माने में हो जाए राज,
चले नेक रास्ते पे सारा समाज
इसी वास्ते जन्म लेता हूँ मैं,
नया एक संदेश देता हूँ मैं।।”
