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गीता को नये संदर्भ के साथ पढ़ने में मजा आता है

  -गोविंद प्रसाद बहुगुणा- “सुदुर्दर्शमिदं रुपं दृष्टवानसि यन्मम देवानामपि: नित्यं दर्शनकाङ्क्षिणः।।”।।५२।।(श्रीमद्भगवद्गीता ११वां अध्याय) कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि देखो

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