ब्लॉग

सड़कों की नई तस्वीर: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के इकोसिस्टम का उदय

India is rapidly shifting to electric vehicles (EVs). eMobility is now turning into a key driver of economic growth, energy security, and a cleaner future. EV sales have grown ~46x since 2016, showing strong consumer shift. Exports have surged from USD 1.2 million in 2020 to USD 84 million in 2024. This is positioning India as an emerging EV hub. Government schemes like National Mission on ManufacturingPLI Scheme for Automobile & Auto Components Industry and PM Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement Scheme (PM E-DRIVE) are strengthening a more self-reliant eMobility ecosystem.

 

-A PIB FEATURE-

पूरे भारत में भीड़-भाड़ वाले शहरों में रोज़ाना आने-जाने और छोटे शहरों में ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ (यानी यात्रा के आखिरी चरण की सुविधा) के तरीकों को पूरी तरह से नए सिरे से विचार किया जा रहा है। इस बदलाव के केंद्र में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी है। यह तकनीकी बदलाव देश की जलवायु रणनीति और टिकाऊ परिवहन के विज़न के लिए महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। सरकारी प्रोत्साहन, पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता और तेज़ी से हो रही तकनीकी प्रगति की वजह से, ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गए हैं और ऑटोमोबाइल उद्योग के भविष्य को आकार दे रहे हैं।

भारत में मोबिलिटी में हो रहा बदलाव न सिर्फ़ पर्यावरण के लिहाज़ से ज़रूरी है, बल्कि यह एक आर्थिक मौक़ा भी है  यह देश के सबसे बड़े और सबसे प्रभावी उद्योगों में से एक को नया रूप दे रहा है। यह बदलाव ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए एक रणनीतिक ज़रिया बनकर उभर रहा है। साथ ही, इससे जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम हो रही है और अर्थव्यवस्था के लिए कम कार्बन उत्सर्जन वालीकुशल विकास की राह बन रही है।

इलेक्ट्रिक वाहन (ईवीक्या है?

ईवी एक ऐसा वाहन है जो इलेक्ट्रिक मोटर से चलता है और बैटरी में जमा ऊर्जा का इस्तेमाल करता है। इसे बाहरी पावर सोर्स से रिचार्ज किया जा सकता है।

ईवी चार तरह के होते हैं:

– बैटरी ईवी (बीईवी) जो पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होते हैं।

– हाइब्रिड ईवी (एचईवी) और प्लगइन एचईवी, जो वाहन को चलाने के लिए इंटरनल कंबशन इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों का इस्तेमाल करते हैं। पीएचईवी में ज़्यादा देर तक सिर्फ़ इलेक्ट्रिक मोड में चलने के लिए बाहरी तौर पर रिचार्ज होने वाले बैटरी पैक भी होते हैं।

– फ्यूल सेल ईवी (एफसीईवी), जिनमें केमिकल एनर्जी से इलेक्ट्रिक एनर्जी बनाई जाती है।

 

भारत में ईवी क्रांतिपिछला दशक

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की शुरुआत 2015 में हुई। इसकी शुरुआत नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान‘ और एफएएमई स्कीम‘ को लॉन्च करके की गई, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी ) को अपनाने को बढ़ावा दिया जा सके। यह कदम कुछ खास रणनीतिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर उठाया गया था। इनमें पेट्रोलियम ईंधन के बढ़ते आयात बिल को कम करना और शहरों में बिगड़ते वायु प्रदूषण की समस्या से निपटना शामिल था। साथ ही, इसका मकसद परिवहन क्षेत्र से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना भी था, जो भारत के कुल उत्सर्जन का लगभग 9 प्रतिशत हिस्सा है।

नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान (एनईएमएमपी 2020)

एनईएमएमपी ने 2020 भारत में ईवी (इलेक्ट्रिक वाहनों) को अपनाने और उनके घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार किया है। इसके दो मुख्य उद्देश्य हैं, ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करना और साफ़-सुथरी, टिकाऊ मोबिलिटी को बढ़ावा देना।

भारत में (हाइब्रिड एवंईवी को तेज़ी से अपनाना और उनका विनिर्माण बढ़ाना (एफएएमई इंडिया)

एनईएमएमपी 2020 के तहत, ईवी को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए 2015 में एफएएमई इंडिया योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत खरीदारों को प्रोत्साहन दिए गए और चार्जिंग अवसंरचना के निर्माण तथा उत्पादन में मदद की गई। इसका पहला चरण मार्च 2019 तक चला, जिसके बाद दूसरा चरण शुरू हुआ, जिसे अप्रैल 2024 तक पांच वर्षों के लिए लागू किया गया।

कोविड के बाद के समययानी वित्तीय वर्ष 22 में एक अहम मोड़ आया। खास नीतिगत प्रोत्साहन, ज़्यादा सब्सिडी और गाड़ियों की बेहतर उपलब्धता की वजह से ईवी को अपनाने की रफ़्तार तेज़ी से बढ़ी। इस दौरान बाज़ार में एक बड़ा ढांचागत बदलाव भी देखने को मिला। जहां वित्तीय वर्ष 20 – वित्तीय वर्ष 21 में शुरुआत में ई-रिक्शा का दबदबा था, वहीं जल्द ही इलेक्ट्रिक टूव्हीलर्स भी काफ़ी लोकप्रिय हो गए। वित्तीय वर्ष 25 तक, वे एक प्रमुख सेगमेंट बन गए, जो अनौपचारिक, शेयर्ड मोबिलिटी से मुख्यधारा के निजी और कमर्शियल इस्तेमाल की ओर एक बड़े बदलाव का संकेत था।

क्या आप जानते हैं?

ईवी को अपनाने में कई गुना बढ़ोतरी हुई है; यह वित्तीय वर्ष 15-16 में 0.08 प्रतिशत से बढ़कर वित्तीय वर्ष 25-26 में 8.26 प्रतिशत हो गया है।

 

भारत तीव्र गति की राह परवैश्विक विस्तार के बीच ईवी की बढ़ोतरी 

दुनिया भर में लोग ईवी को तेज़ी से अपना रहे हैं। बेहतर ड्राइविंग रेंज और अच्छी कीमत वाले कई मॉडल बाज़ार में आ रहे हैं। साथ ही, सार्वजनिक तौर पर चार्जिंग अवसंरचना का भी तेज़ी से विस्तार हो रहा है  भारत में  मज़बूत नीतिगत समर्थनबढ़ती बिक्री और रजिस्ट्रेशन के ज़रिए यह तेज़ी देखी जा रही है। घरेलू विनिर्माण और चार्जिंग नेटवर्क के बढ़ते इकोसिस्टम से इसे और बढ़ावा मिल रहा हैजिससे ईवी को अपनाने वालों की संख्या बढ़ रही है।

भारत का ईवी स्कोरकार्ड– बढ़ती बिक्रीरजिस्ट्रेशन और निर्यात

2016 में लगभग 50,000 ईवी की मामूली बिक्री के मुकाबले, 2025 में 23 लाख यूनिट्स बेची गईं। यह भारत के ईवी मार्केट में 46 गुना बढ़ोतरी को दिखाता है। भारत की यह बढ़ोतरी वैश्विक प्रदर्शन से कहीं ज़्यादा रही है। जहां वैश्विक स्तर पर ईवी की बिक्री लगभग 20 गुना बढ़ी और 2016 में 9,18,000 से बढ़कर 2024 में 1.878 करोड़  हो गई।

क्या आप जानते हैं?

2025 में, उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा ईवी बाज़ार बनकर उभरा। 4 लाख से ज़्यादा यूनिट्स के साथ, इसने देश की कुल ईवी बिक्री का 18 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया। इसके बाद महाराष्ट्र (2.66 लाख यूनिट्स – 12 प्रतिशत) और कर्नाटक (2 लाख यूनिट्स – कुल बिक्री का 9 प्रतिशत) का स्थान रहा।

 

2020 में भारत में ईवी के इस्तेमाल का स्तर वैश्विक स्तर के मुकाबले सिर्फ़ पांचवां हिस्सा था। 2024 में यह बढ़कर वैश्विक स्तर के दो बटा पांचवें हिस्से से भी ज़्यादा हो गया। इस तरक्की में सबसे बड़ा योगदान 2025 में बिके मोटर लगे टूव्हीलर्स (12.8 लाख यूनिट्स) और थ्री-व्हीलर्स (8 लाख यूनिट्स) का रहा।

पिछले दशक में ईवी रजिस्ट्रेशन में 62 प्रतिशत से ज़्यादा की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) के साथ काफ़ी बढ़ोतरी हुई है  यह ईवी को अपनाने की रफ़्तार में तेज़ी को दिखाता है। नीतिगत समर्थन, तकनीक में तरक्की और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में ग्राहकों का बढ़ता भरोसा इसके मुख्य कारण हैं।

हाल के वर्षों में घरेलू स्तर पर बड़ी कामयाबी जाने के बाद, भारतीय ईवी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अच्छी-खासी बढ़त बनानी शुरू कर दी है। इसका निर्यात 2020 में 12 लाख अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 84 लाख अमेरिकी डॉलर हो गया है। निर्यात के प्रमुख देशों में नेपाल, इंडोनेशिया और जापान शामिल हैं।

अवसंरचना का विस्तार

अवसंरचना के मामले में, भारत का सार्वजनिक तौर पर चार्जिंग नेटवर्क तेज़ी से बढ़ रहा है। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) के अनुसार, जुलाई 2026 तक मौजूद 52,718 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों में से 16,561 स्टेशनों पर फ़ास्ट ईवी चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है।

‘ई-अमृत’ टूल किसी जरूरतमंद की लोकेशन के आधार पर चार्जिंग स्टेशन खोजने में मदद करता है। इस उद्योग की बड़ी कंपनियां चार्जिंग अवसंरचना को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। उदाहरण के लिए, 2024 में हुंडई मोटर इंडिया ने प्रमुख शहरों में 11 नए स्टेशनों के साथ अपने अत्यधिक-तीव्र नेटवर्क का विस्तार किया। इन शहरों में मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, हैदराबाद, गुरुग्राम और बैंगलोर शामिल थे। साथ ही प्रमुख हाईवे पर भी ये स्टेशन बनाए गए।

इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (आईईएमआई)

साफ़-सुथरे परिवहन भविष्य की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, नीति आयोग ने अगस्त 2025 में आईईएमआई लॉन्च किया। अपनी तरह का यह पहला फ़्रेमवर्क है जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को आगे बढ़ाने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रगति पर नजर रखता है और उनकी तुलना करता है। यह इंडेक्स तीन मुख्य आधारों – परिवहन का विद्युतीकरणचार्जिंग अवसंरचना की तैयारीऔर ईवी शोध एवं नवाचार  से जुड़े 16 संकेतकों के आधार पर प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है। इससे हर क्षेत्र के इकोसिस्टम की मज़बूती की साफ़ तस्वीर मिलती है।

स्कोर के आधार पर, क्षेत्रों को ‘फ्रंटरनर‘ (मज़बूत इकोसिस्टम के साथ सबसे आगे),’परफ़ॉर्मर (प्रगति कर रहे) और एस्पिरेंट (जिन पर ध्यान देने की ज़रूरत है) के तौर पर बांटा गया है। दिल्लीमहाराष्ट्र और चंडीगढ़ ‘फ्रंटरनर‘ के तौर पर उभरे हैं, जो मज़बूत और परिपक्व ईवी इकोसिस्टम को दिखाते हैं।

तेज़ी से घरेलू विनिर्माणस्टार्टअप्स और एआई की मदद से

भारत सिर्फ़ असेंबली करने वाले बाज़ार से बदलकर एक बड़े ईवी विनिर्माण केन्द्र के तौर पर विकसित हो रहा है। सप्लायर इकोसिस्टम के बढ़ने से अब देश में ही बैटरी पैक, मोटर, ड्राइवट्रेन, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, वायरिंग और चार्जिंग इक्विपमेंट का उत्पादन हो रहा है। टाटा मोटर्स, महिंद्रा, टीवीएस और बजाज ऑटो जैसी बड़ी मूल उपकरण निर्माता (ओईएमकंपनियां अनुसंधान एवं विकास, गीगाफ़ैक्ट्री और खास ईवी प्लेटफ़ॉर्म में निवेश करके अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं। साथ ही, विनफ़ास्ट, टेस्ला और कोरिया व जापान की बड़ी वैश्विक बैटरी कंपनियां भी भारत में बड़े पैमाने पर विनिर्माण की संभावनाएँ तलाश रही हैं। इस विस्तार से स्थानीयता मज़बूत हो रही है, लागत के मामले में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ रही है और भारत वैश्विक ईवी सप्लाई चेन का एक अहम हिस्सा बन रहा है।

 विटारा ”, सुज़ुकी की पहली ‘मेडइनइंडिया‘ ग्लोबल स्ट्रैटेजिक बैटरी ईवी

भारत की ग्रीन मोबिलिटी यात्रा में अगस्त 2025 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई। यह उपलब्धि

सुज़ुकी की पहली ग्लोबल स्ट्रैटेजिक बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (बीईवी), “ई विटारा” के लॉन्च के साथ हासिल हुई। इन ‘मेड-इन-इंडिया’ बीईवी को यूरोप और जापान जैसे विकसित बाज़ारों सहित 100 से ज़्यादा देशों में निर्यात करने का लक्ष्य है। इस उपलब्धि के साथ, भारत ईवी के लिए सुज़ुकी का वैश्विक विनिर्माण केन्द्र  बन गया।

भारतीय स्टार्टअप्स ईवी की संभावनाओं को पहचान रहे हैं। वे चार्जिंग अवसंरचना की उपलब्धता को बढ़ावा दे रहे हैं, बैटरी संबंधी नवाचार में सुधार कर रहे हैं, कम लागत वाले विनिर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं और डेटा-आधारित समाधान पेश कर रहे हैं। भारत में अभी लगभग 400 ईवी स्टार्टअप काम कर रहे हैं और वे भारत के बदलते ईवी इकोसिस्टम को आकार देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा, आगे बढ़ रहा ईवी इकोसिस्टम ड्राइविंग के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआईका इस्तेमाल कर रहा है। इसमें वॉइस-इनेबल्ड नेविगेशन, रियल-टाइम ट्रैफ़िक की जानकारी और इंटेलिजेंट रूट प्लानिंग जैसे फ़ीचर अहम हैं। एआई वॉइस-बेस्ड कंट्रोल, कनेक्टेड फ़ीचर और एक्सेसिबिलिटी पर केंद्रित क्रियाकलापों के ज़रिए सुरक्षित और ज़्यादा समावेशी मोबिलिटी में भी योगदान दे रहा है

निवेश की बढ़ती रफ़्तार

इस सेक्टर में निवेश की गतिविधियां ज़ोरदार रही हैं। भारत के ईवी इकोसिस्टम ने वित्त वर्ष 2025 में 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा की रकम जुटाई, जो 2024 के मुकाबले लगभग 27 प्रतिशत ज़्यादा है। इस वित्तपोषण का ज़्यादातर हिस्सा ईवी बनाने वाली कंपनियों को मिला, जिन्होंने करीब 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर हासिल किए। इसमें दिल्ली ईवी निवेश के लिए सबसे आगे रहने वाला शहर बनकर उभरा।

भारत के ईवी के लिए रणनीतिक नीतिगत उपाय

सरकार 2015 से ऑटो इंडस्ट्री के लिए कई स्कीम के ज़रिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा दे रही है। इसने खास नीतिगत उपायोंवित्तीय प्रोत्साहनों और मिशनआधारित पहलों के ज़रिए ईवी को अपनाने की रफ़्तार बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक तरीका अपनाया है। एफएएमई, एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल्स के लिए पीएलआई स्कीम और बैटरी लोकलाइज़ेशन जैसी अहम पहल का मकसद एक मज़बूत और भविष्य के लिए तैयार मोबिलिटी इकोसिस्टम बनाना है।

राज्य अपनी प्रगतिशील नीतियों, चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार और मज़बूत निवेश समर्थन के ज़रिए भारत के ईवी बदलाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

  • दिसंबर 2025 तक, 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ईवी नीति अधिसूचित कर दी थींजबकि चार और राज्यों में ये ड्राफ़्ट स्टेज पर थीं।
  • 15–25 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी, प्राथमिकता के आधार पर ज़मीन का आवंटन, स्टाम्प ड्यूटी में छूट और 100 प्रतिशत तक एसजीएसटी रिइम्बर्समेंट जैसे प्रोत्साहन निवेशकों की लागत को कम करते हैं।
  • तमिलनाडुमहाराष्ट्रकर्नाटकगुजरातहरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य बड़े ईवी हब बन गए हैं और मज़बूत विनिर्माण इकोसिस्टम को बढ़ावा दे रहे हैं।
दिल्ली की ईवी नीति

दिल्ली की ईवी नीति भारत की सबसे प्रगतिशील ईवी नीति  में से एक है। इसका मकसद गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करना और शहर में हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

जून 2026 में, सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में पुरानी और ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाली ट्रकों और बसों को बदलने के लिए एक व्यापक योजना को मंज़ूरी दी। इस पहल का मकसद हवा की गुणवत्ता में सुधार करना और साफ़-सुथरी मोबिलिटी को बढ़ावा देना है। 9,585 करोड़ रुपये के बजट वाली इस दो साल की योजना के तहत दिल्ली-एनसीआर (दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश) में लगभग 2.07 लाख कमर्शियल गाड़ियों को बदला जाएगा, जिनमें 1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें शामिल हैं।

विनिर्माण पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमएम)

एनएमएम (2025) में ईवी को नवाचारआधारित विकास के लिए एक अहम “सीड” सेक्टर के तौर पर पहचाना गया है। इस मिशन के 2035 के लिए बड़े लक्ष्य हैं। इसका मकसद जीडीपी में विनिर्माण सेक्टर के योगदान को 12.9 प्रतिशत (2023) से बढ़ाकर 25 प्रतिशत यानि लगभग दोगुना करना है। साथ ही, एनएमएम का इरादा 14.3 करोड़ नौकरियां पैदा करने और सामान के निर्यात को 1.2 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने का है। यह आधुनिक विनिर्माण को बढ़ावा देकरतकनीकी विकास को आगे बढ़ाकर और ईवी उत्पादन को वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़कर भारत के ईवी इकोसिस्टम को मजबूत करता है। खास क्लस्टर-आधारित उपायों और नीतिगत समर्थन के ज़रिए, एनएमएम घरेलू ईवी विनिर्माण क्षमता को तेज़ी से बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रेवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट स्कीम (पीएम ड्राइव स्कीम)

2024 में शुरू की गई पीएम ई-ड्राइव स्कीम, भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) की एक अहम पहल है। इसका मकसद मांग संबंधी प्रोत्साहन बढ़ाकरघरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर और चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार के ज़रिए ईवी को अपनाने की रफ़्तार बढ़ाना है। इस स्कीम का बजट 10,900 करोड़ रुपये है और इसमें ईृ-दोपहिया, ई-तिपहिया, ई-ट्रक, ई-बस और ई-एंबुलेंस जैसे कई सेगमेंट शामिल हैं। इस योजना के तहत, चरणगत विनिर्माण कार्यक्रम (पीएमपी) में कुछ खास ईवी उपकरणों का घरेलू विनिर्माण ज़रूरी है।

पीएम ई-ड्राइव स्कीम का मकसद 28 लाख से ज़्यादा ईवी को समर्थन देना है। इनमें से, जनवरी 2026 तक 22.12 लाख ईवी बेचे जा चुके हैं। ऐसा शुरुआती प्रोत्साहन की वजह से हुआ है, जिससे ग्राहकों के लिए खरीदने की लागत कम हो जाती है। यह स्कीम सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण को प्राथमिकता देती है। देश में 14,028 ई-बसों के लिए 4,391 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इनमें से 13,800 बसें सात बड़े शहरों – बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे और सूरत – को आवंटित की गई हैं। पहले चरण में आवंटित 10,900 ई-बसों के लिए टेंडर पूरे हो चुके हैं। देश भर में ईवी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन ( ईवीपीसीएसके लिए 2,000 करोड़ रुपये तय किए गए हैं। इसके अलावा, भारी उद्योग मंत्रालय के तहत वाहन टेस्टिंग एजेंसियों के आधुनिकीकरण और अपग्रेडेशन के लिए 780 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

यह योजना पर्यावरण प्रदूषण और ईंधन सुरक्षा से जुड़ी अहम चुनौतियों का समाधान करने के साथ-साथ टिकाऊ परिवहन समाधानों को बढ़ावा देगी। यह भारत में परिवहन के लिए एक साफ़-सुथरे और ज़्यादा टिकाऊ भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पीएम बस सेवापेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज़्म (पीएसएमयोजना

पीएम बस सेवा– पीएएसएम योजना (2024) के तहत, चलाई जाने वाली हर बस के लिए 12 साल तक पेमेंट सिक्योरिटी कवर मिलता है। ये बसें आमतौर पर समझौते पर हस्ताक्षर होने के दो साल के अंदर चलाई जाती हैं। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल (सरकार और प्राइवेट सेक्टर के सहयोग) के ज़रिए कुल 10,000 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। इसका मकसद शहरी इलाकों में सिटी बस सर्विस को बेहतर बनाना है। कई तरह के उपायों को शामिल करते हुए, यह योजना बस सर्विसडिपो अवसंरचनाचार्जिंग नेटवर्क और ग्रीन मोबिलिटी पहल जैसी चीज़ों के लिए सरकारी मदद देती है।

फरवरी 2026 में, गुजरात के भावनगर में 50 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई गई। शुरुआती चरण में महाराष्ट्र के नागपुर, चंडीगढ़ और असम के गुवाहाटी जैसे शहरों को भी शामिल किया गया है।

भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना (एसपीएमईपीसीआई)

एसपीएमईपीसीआई स्कीम (2024) इलेक्ट्रिक कारों के विनिर्माण को बढ़ावा देती है। इसके तहत कम से कम 4,150 करोड़ रुपये का निवेश करना ज़रूरी है। साथ ही, कंपनियों को तीसरे साल तक कम से कम 25 प्रतिशत और पांचवें साल तक 50 प्रतिशत  ‘डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन’ (डीवीए) हासिल करना होगा। एमएचआई ने एक साफ़-सुथरे, हरे-भरे और ज़्यादा आत्मनिर्भर भारत के विज़न के साथ यह योजना शुरू की है। ईवी को बढ़ावा देकर, इसका मकसद वायु प्रदूषण कम करना, तेल आयात और व्यापार घाटे में कमी लाना, और इनोवेशन, रोज़गार व आर्थिक विकास को गति देना है।

ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के लिए पीएलआई स्कीम (पीएलआईऑटो स्कीम)

पीएलआई-ऑटो स्कीम (2021) का मकसद आधुनिक ऑटोमोटिव तकनीक (एएटी) में भारत की विनिर्माण क्षमता को मज़बूत करना है, जिसमें ईवी भी शामिल हैं। यह योजना कम से कम 50 प्रतिशत घरेलू वैल्यू एडिशन के साथ घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देती है। इसका मकसद ऑटोमोटिव वैल्यू चेन में निवेश को आकर्षित करना भी है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर अपने पूरा ध्यान प्रदर्शित करते हुए, स्वीकृत आवेदकों को कुल 2,377.56 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया है। इसमें से 2,319.88 करोड़ रुपये अलग-अलग सेगमेंट के ईवी विनिर्माताओं को दिए गए हैं, जिनमें दोपहियातिपहियाचौपहियाबसें   शामिल  हैं (जनवरी 2026)।

आत्मनिर्भर भारत विज़न के साथ जुड़ी पीएलआई योजना, 14 क्षेत्रों में  औद्योगिक विकास के एक मुख्य कारक के तौर पर उभरी है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ी है।

एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसीबैटरी स्टोरेज पर राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए पीएलआई योजना (पीएलआई एसीसी योजना)

पीएलआई एसीसी योजना (2021) का बजट 18,100 करोड़ रुपये है और इसका मकसद देश में बैटरी बनाने विनिर्माण को बढ़ावा देना है। इसका लक्ष्य भारत में कुल 50 जीडबल्यूएच की एसीसी क्षमता बनाना है। यह योजना बिक्री से जुड़े प्रोत्साहन के ज़रिए आधुनिकलंबी दूरी तक चलने वाली ईवी बैटरी के विकास में भी मदद करती है। शुरुआती तैयारी के समय के बाद, यह योजना अब अपने कामयाबी वाले चरण में आ गई है, जो जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2029 तक चलेगा।

ईवी की कुल लागत का 35-40 प्रतिशत  हिस्सा बैटरी का होता है – जो इसका सबसे बड़ा सिंगल कंपोनेंट है। इसलिए, गाड़ियों की कीमतें कम करनेएनर्जी सिक्योरिटी बढ़ानेनौकरियां पैदा करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए घरेलू एसीसी विनिर्माण  को बढ़ाना बहुत ज़रूरी है।

एसीसी नई पीढ़ी की एडवांस्ड एनर्जी स्टोरेज तकनीक है। ये इलेक्ट्रिक एनर्जी को इलेक्ट्रोकेमिकल या केमिकल एनर्जी के तौर पर स्टोर कर सकती हैं और ज़रूरत पड़ने पर इसे वापस इलेक्ट्रिक एनर्जी में बदल सकती हैं।

ईवी  पर कम जीएसटी

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों पर 5 प्रतिशत की रियायती जीएसटी दर लागू होती है, जो सभी इलेक्ट्रिक कारों, दो-पहिया और तीन-पहिया वाहनों पर लागू होती है। इस वजह से पारंपरिक गाड़ियों की तुलना में इन पर लगने वाला टैक्स काफी कम होता है।

आगे की ओरभारत में ईवी के विकास की संभावना

भारत खुद को आयात पर निर्भर बाज़ार से बदलकर ईवी विनिर्माण के लिए एक वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक केन्द्र बना रहा है। यह ऊर्जा सुरक्षा, तेल आयात में कमी और 2070 तक नेटज़ीरो का लक्ष्य हासिल करने की उसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

‘मेक इन इंडिया’ पहल के ज़रिए देश में ही ईवी के विनिर्माण पर ज़ोर दिया जा रहा है।

  • भारत का ईवी बाजार, जिसका मूल्य 2025 में 3.71 अरब अमेरिकी डॉलर था, उसके 2034 तक 54.94 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़कर 191.04 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
  • भारत का ईवी बैटरी बाजार 2025 में 2.71 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2034 तक 21.70 प्रतिशत की सीएजीआर से 15.90 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
  • भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक कुल गाड़ियों की बिक्री में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की हो, जो ग्लोबल ईवी 30@30 पहल के अनुरूप है।
  • 2030 तक पूरे भारत में 13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन स्थापित करके ईवी इकोसिस्टम को मज़बूत किया जा रहा है।

मांग और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहनस्थानीयकरण नीति और शुरुआती चार्जिंग अवसंरचना की वजह से भारत बड़े पैमाने पर काम करने के एक अहम दौर में पहुंच गया है। जैसे-जैसे वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव हो रहा है, उम्मीद है कि भारत ईवी विनिर्माण में निवेश के लिए सबसे आकर्षक जगहों में से एक बन जाएगा।

घरेलू क्षमताएं मज़बूत होने के साथ, भारत एक निर्यात केन्द्र के तौर पर उभरने के लिए तैयार है। यह बात इलेक्ट्रिक दो-पहिया, कॉम्पैक्ट ईवी, बैटरी पैक और मुख्य ड्राइवट्रेन उपकरणों जैसे कई तरह के उत्पादों पर लागू होती है। इसे अनुसंधान एवं विकास में निवेश और वैश्विक साझेदारी से भी बढ़ावा मिल रहा है।

आगे नजर डालें तो सरकार कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (सीएएफई) नियमों के अगले चरण – सीएएफई  III (2027–2032) और सीएएफई IV (2033–2037) – तैयार कर रही है। इनमें वर्ल्डवाइड हार्मोनाइज़्ड लाइट व्हीकल टेस्ट प्रोसीजर‘ (डबल्यूएलटीपीके आधार पर सीओ₂ उत्सर्जन के कड़े लक्ष्य प्रस्तावित हैं। प्रस्तावित सीमाएं सीएएफई III के लिए 91.7 जी सीओ₂/किमी और सीएएफई IV के लिए 70 जी सीओ₂/किमी हैं। उम्मीद है कि इन मानकों को सुपरक्रेडिट मैकेनिज्म के साथ लागू किया जाएगा। इससे ओईएम के लिए पारंपरिक कारों और नॉन-प्लग-इन हाइब्रिड की बिक्री की बजाय ईवी की बिक्री बढ़ाकर अनुपालन लक्ष्यों को आसानी से पूरा करना संभव हो सकेगा।

भारत के कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (सीएएफईनियम 2017 में लागू किए गए थे। इन्हें इस तरह से बनाया गया है कि वाहन बनाने वाली कंपनियां (ओईएमज़्यादा ईंधनकिफायती और कम उत्सर्जन वाली पैसेंजर गाड़ियां (जिनमें ईवी भी शामिल हैंबनाने की ओर बढ़ें। अलगअलग तरह की गाड़ियों में बेहतर माइलेज या क्षमता को बढ़ावा देकर, ये नियम ईवी को अपनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाते हैं। साथ ही, ये बड़े पैमाने पर कुल ईंधन की खपत और सीओ₂ उत्सर्जन को भी कम करते हैं।

बदलाव की दहलीज पर

भारत मोबिलिटी में एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रही है। मांग तेज़ी से बढ़ रही हैविनिर्माण का दायरा बढ़ रहा है और तकनीक के मामले में क्षमताएं बेहतर हो रही हैं। नतीजतन, देश अनुसंधान एवं विकास और ईवी विनिर्माण के लिए तेज़ी से एक वैश्विक केन्द्र के तौर पर उभर रहा है। बेहतर वित्तीय सुविधाबढ़ती जागरूकतातकनीक में तरक्कीभरोसेमंद चार्जिंग और कुशल कार्यबल जैसे अहम कारक भारत में ईवी को अपनाने की प्रक्रिया को तेज़ कर रहे हैं। सुधारों पर आधारित नीति का माहौल बड़े पैमाने पर मज़बूत और टिकाऊ फ़ायदा भी देता है।

आगे का रास्ता सप्लाई चेन के बेहतर समायोजन, बैटरी के विनिर्माण में तेज़ी से स्थानीयकरण और मज़बूत चार्जिंग अवसंरचना से तय होगा। ये सभी मिलकर वैश्विक ईवी क्षेत्र में भारत की नेतृत्व को स्थापित करने के लिए तैयार हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!