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जस्टिस चंद्रचूड़ बोले, न्याय और न्यायार्थी के बीच भाषाई दीवार समाप्त हो, सुप्रीम कोर्ट ने कराया 20 हजार फैसलों का हिंदी अनुवाद

-By Usha Rawat

देहरादून, 2 दिसंबर। भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस डी . वाई. चंद्रचूड ने न्यायिक फैसलों को लोगों की अपनी भाषा दिये जाने वकालत करते हुए कहा कि  अदालतों की भाषा  अंग्रेजी में होती  है जिसे सामान्यतः न्यायार्थी नहीं समझ पाते हैं । उन्होंने कहा कि  न्याय और न्यायार्थी के बीच भाषा की दीवार नहीं होनी चाहिए।

शनिवार को को देहरादून में कर्मभूमि फाउंडेशन द्वारा आयोजित जस्टिस केशव चंद्र धूलिया  स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि के तौर पर प्रधान न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड ने कहा भाषा के कारण भी आम आदमी न्यायपालिका से दूर रहता है। उन्हीने कहा कि  आम आदमी की भाषाई कठिनाई को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पुराने फैसलों को लोक भाषाओं में बदलने की पहल की है।

जस्टिस चंद्रचूड ने कहा कि आजादी के बाद से अब तक सुप्रीम कोर्ट ने 36000 न्यायिक फैसले दिये हैं उनमें से लगभग 30 हजार फैसलो का लोक भाषाइकरण कर दिया गया है और इनमे 20,000 फैसलों को  केवल  हिंदी मे अनुवाद कर सुप्रीम कोर्ट म्कीन् वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। उन्होने  अधिवक्ताओं को सलाह दी कि  वे न्यायिक फैसलों के भाषाईकरण का लाभ उठाएं।

प्रधान न्यायाधीश ने देश के उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायलयों से भी अपेक्षा की कि  वे अपने न्यायिक क्षेत्र की संविधान की 21 विं अनुसूची में दर्ज भाषाओं में  फैसले देंगे ताकि  न्यायार्थी सहजता से न्याय को समझ सकें।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने सिल्क्यारा सुरंग हादसे में 41 श्रमिकों के सकुशल रेस्क्यू पर खुशी जताते हुए भविष्य में अत्यंत सावधानी की जरूरत बताई और कहा कि  विकास जरूरी है मगर आदमी का जीवन उससे जरूरी है।

 

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