राजनीति

विपक्ष के उपनेता का आरोप- उत्तराखंड में 10 वर्षों से सरकार नदारद

 

कांग्रेस जनता की आवाज से बनाएगी घोषणा पत्र: भुवन कापड़ी

देहरादून, 18 अगस्त। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष एवं विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में प्रदेश में सरकार पूरी तरह नदारद रही है। उन्होंने कहा कि सरकार होने का भ्रम पालने वाले लोग केवल ‘मैनेजर’ बनकर रह गए हैं और उनका जनता से संवाद तथा संवेदनशीलता लगातार कम हुई है। कांग्रेस का घोषणा पत्र जनता द्वारा चुनी, जनता के लिए और जनता के प्रति जवाबदेह सरकार की पुनर्स्थापना का संकल्प होगा।
कापड़ी ने घोषणा पत्र के पांच प्रमुख संकल्प गिनाते हुए कहा कि सरकार को जनता की भागीदारी से संचालित किया जाएगा। घोषणा पत्र केवल चुनावी वादों का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं, आकांक्षाओं और सुझावों का दस्तावेज होगा। इसके निर्माण में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाली कांग्रेस सरकार को अपने वादों के प्रति राजनीतिक और लोकतांत्रिक रूप से जवाबदेह बनाया जाएगा तथा सरकार और जनता के बीच संवाद को शासन का आधार बनाया जाएगा।
घोषणा पत्र समिति के संयोजक डॉ. प्रेम बहुखंडी ने कहा कि नेहरूवादी समाजवाद और सार्वजनिक संस्थाओं की पुनर्स्थापना घोषणा पत्र का मूलमंत्र होगा। कांग्रेस सरकार बनने पर सरकारी स्कूलों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को मजबूत करने, सरकारी अस्पतालों की स्थिति सुधारने तथा पुरानी पेंशन व्यवस्था की वापसी का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सार्वजनिक संस्थानों को कमजोर करना और स्कूलों तथा स्वास्थ्य केंद्रों को बंद करना सरकार की नाकामी है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस गांधीवादी-सर्वोदयी ग्रामीण विकास मॉडल को भी पुनर्स्थापित करेगी। गांव, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अंतिम व्यक्ति को विकास के केंद्र में रखा जाएगा। कृषि, बागवानी, पशुपालन, वनोपज, कुटीर उद्योग और स्थानीय उद्यमों के माध्यम से रोजगार बढ़ाकर पलायन रोकने का प्रयास होगा। ग्राम सभाओं और स्थानीय संस्थाओं को अधिक अधिकार देकर जनभागीदारी मजबूत की जाएगी।
समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि जिस उत्तराखंड के निर्माण के लिए हजारों लोगों ने आंदोलन किया, उसी राज्य में आज आंदोलनकारियों को अपनी मांगों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस घोषणा पत्र निर्माण की प्रक्रिया को जनभागीदारी का अभियान बनाएगी। किसान, मजदूर, युवा, महिलाएं, कर्मचारी, व्यापारी, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी, उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा ग्रामीण और प्रवासी उत्तराखंडियों से संवाद कर उनके सुझाव शामिल किए जाएंगे।
समिति की सदस्य सुजाता पॉल ने कहा कि रोजगार की मांग करने वाले युवाओं पर लाठीचार्ज और जोशीमठ-हेलंग के लोगों की समस्याओं के प्रति सरकार का रवैया चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि धरना, प्रदर्शन और आंदोलन लोकतंत्र की ताकत हैं तथा सरकार को संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड की जनता केवल घोषणा पत्र की पाठक नहीं, बल्कि उसके निर्माण की सहभागी होगी। जनता की आकांक्षाएं और सुझाव आगामी कांग्रेस सरकार के लिए राजनीतिक प्रतिबद्धता बनेंगे।

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