गोठिंडा प्रसव प्रकरण: सरकारी विज्ञप्ति पर उठे सवाल, विभागीय दावे और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान में विरोधाभास

-हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली, 3 जुलाई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) थराली का नाम पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में बना हुआ है। अब एक प्रसव प्रकरण को लेकर जारी सरकारी प्रेस विज्ञप्ति ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि भारी बारिश और सड़क बंद होने के कारण चिकित्सकीय टीम करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर गर्भवती महिला तक पहुंची और रास्ते में ही सुरक्षित प्रसव कराया। वहीं, घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए अलग कहानी सामने रखी है।
जानकारी के अनुसार, थराली विकासखंड के गोठिंडा गांव निवासी पुष्पा देवी को बुधवार-गुरुवार की रात करीब दो बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। लगातार बारिश के कारण मोटर मार्ग बंद होने से परिजन उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली नहीं पहुंचा सके।
चमोली के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अभिषेक गुप्ता की ओर से सूचना विभाग के माध्यम से 2 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि सूचना मिलने पर सीएचसी थराली के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय गुप्ता के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग की टीम आवश्यक चिकित्सा सामग्री के साथ गांव के लिए रवाना हुई। टीम ने करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर प्रसूता तक पहुंचने के बाद परिस्थितियों को देखते हुए रास्ते में ही सुरक्षित प्रसव कराया। विज्ञप्ति में जच्चा और नवजात दोनों के स्वस्थ होने की जानकारी भी दी गई।
हालांकि, घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के बयान विभागीय दावों से अलग हैं।
प्रसूता को गांव से प्रसव स्थल तक लाने वाले टैक्सी चालक बिरेंद्र सोनी ने फेसबुक लाइव के माध्यम से दावा किया कि प्रसव उनकी माता किशनी देवी ने कराया, जो पहले भी घरेलू दाई के रूप में कार्य कर चुकी हैं। उनके अनुसार महिला का प्रसव सुबह लगभग 8:05 बजे हो चुका था, जबकि स्वास्थ्य विभाग की टीम करीब 10:30 बजे मौके पर पहुंची। उनका कहना है कि टीम ने प्रसव के बाद जच्चा और नवजात को आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई, लेकिन सरकारी विज्ञप्ति में सुरक्षित प्रसव कराने का श्रेय विभाग ने स्वयं ले लिया।
प्रसव स्थल पर मौजूद आशा कार्यकर्ता मीना देवी तथा ग्रामीण नरेंद्र कुमार ने भी कथित तौर पर यही कहा कि वे रात से ही प्रसूता के साथ थे और स्वास्थ्य विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही प्रसव हो चुका था।
उल्लेखनीय है कि पिछले दो महीनों के दौरान सीएचसी थराली कई कारणों से चर्चा में रहा है। पहले अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों के घूमने का मामला सामने आया। इसके बाद एक्सपायरी दवाओं का मामला चर्चा में रहा। हाल ही में कुराड़ गांव की एक महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। अब सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के तथ्यों को लेकर नया विवाद सामने आ गया है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अभिषेक गुप्ता ने कहा कि उनके कार्यालय को थराली से जो सूचना प्राप्त हुई, उसी के आधार पर प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। उन्होंने कहा कि यदि जांच में तथ्यों में कोई अंतर पाया जाता है तो पूरे मामले की विभागीय जांच कराई जाएगी।
अब यह मामला केवल एक प्रसव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी सूचनाओं की विश्वसनीयता से भी जुड़ गया है। विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विषम परिस्थितियों में सुरक्षित प्रसव का वास्तविक श्रेय किसे जाता है और सरकारी विज्ञप्ति में दर्ज तथ्यों का आधार क्या था।
