नरेन्द्रनगर महाविद्यालय में उद्यमिता ओरिएंटेशन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

नरेन्द्रनगर, 29 अप्रैल। उद्यमिता एवं नवाचार की संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से राजकीय महाविद्यालय नरेन्द्रनगर में बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को देवभूमि उद्यमिता योजना के अंतर्गत एक दिवसीय उद्यमिता ओरिएंटेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. प्रणिता नन्द, नोडल अधिकारी डॉ. संजय महर तथा भारतीय उद्यमिता संस्थान अहमदाबाद के प्रोजेक्ट ऑफिसर एवं मुख्य वक्ता दिग्विजय सजवाण द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को उद्यमिता, स्टार्ट-अप, नवाचार तथा व्यावसायिक आइडिया पर कार्य करने और स्वरोजगार के प्रति प्रेरित एवं जागरूक करना था, ताकि वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. प्रणिता नन्द ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा देवभूमि उद्यमिता योजना के माध्यम से उद्यमिता एवं स्वरोजगार की भावना को विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के हर्बल उत्पाद, बुरांश, माल्टा एवं औषधीय जड़ी-बूटियों के माध्यम से स्वरोजगार के साथ-साथ अपना उद्यम स्थापित करने की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। आज के दौर में प्राकृतिक उत्पादों की मांग भी लगातार बढ़ रही है, जिसके माध्यम से छात्र-छात्राएं स्वयं का उद्यम स्थापित कर आजीविका के साधन विकसित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत एवं न्यू इंडिया विजन को साकार करने के लिए युवाओं में उद्यमशीलता एवं स्वावलंबन का भाव होना आवश्यक है।
मुख्य वक्ता भारतीय उद्यमिता संस्थान अहमदाबाद के प्रोजेक्ट ऑफिसर दिग्विजय सजवाण ने कहा कि उद्यमिता विकास प्रशिक्षण के माध्यम से छात्रों के आइडिया एवं उत्तराखण्ड आधारित उत्पादों को बाजार विस्तार एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में ईडीआई अहमदाबाद सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि सीड फंडिंग प्राप्त करने के लिए उत्पाद की ब्रांड वैल्यू होना अत्यंत आवश्यक है, तभी उत्पाद एवं सेवाओं की मार्केटिंग सुदृढ़ तरीके से की जा सकती है।
देवभूमि उद्यमिता केन्द्र के नोडल अधिकारी डॉ. संजय महर ने बताया कि छात्र-छात्राओं के लिए स्टार्ट-अप हेतु आइडिया क्रिएशन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्टार्ट-अप के लिए नवाचार, नवोन्मेष एवं सृजनशीलता जरूरी है। चुनौतियों के बीच जोखिम प्रबंधन के माध्यम से ही उद्यमिता में सफलता प्राप्त की जा सकती है। इस कार्यशाला के माध्यम से छात्र-छात्राओं में उद्यमिता की भावना विकसित कर उनके हुनर को पहचानने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने छात्र-छात्राओं को संदेश देते हुए कहा कि आइडिया से आय तक, रचनात्मकता से कमाई तक, प्रदर्शन से पहचान तक, उन्नयन से उद्योग तक, नवाचार से नवोन्मेष तक, युवा जोश से युवा उद्यमी बनने के सफर तक, रोजगार के रोडमैप से उद्यमिता की नई उड़ान तक, कौशल विकास से विकसित भारत की कल्पना तक, ‘वोकल फॉर लोकल’ से वैश्विक बाजार तक तथा स्टार्ट-अप से स्टैंड-अप तक की इस यात्रा में सहभागी बनें और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ें।
प्रशिक्षण के दौरान पर्यटन, होमस्टे, इको-टूरिज्म, औषधीय पुष्प, हर्बल शैम्पू, आईटी क्षेत्र में नवाचार, उद्यम एवं वित्तीय प्रबंधन, उद्योग स्थापना की प्रक्रिया, उद्यमशीलता के गुण, सफल उद्यमी बनने के टिप्स, विपणन कौशल, उत्पाद गुणवत्ता, बाजार सर्वेक्षण तथा व्यवसाय विस्तार जैसे विषयों पर छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन किया गया। साथ ही स्टार्ट-अप एवं कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया और छात्र-छात्राओं ने अपने-अपने व्यावसायिक आइडिया का प्रस्तुतिकरण भी किया।
इस अवसर पर डॉ. उमेश मैठाणी, डॉ. राजपाल, डॉ. सुशील, नताशा, सुधा रानी, डॉ. सृचना सचदेवा, डॉ. हिमांशु, डॉ. आराधना, डॉ. विजय प्रकाश, डॉ. विक्रम, जितेन्द्र नौटियाल, शिशुपाल, अजय, विशाल त्यागी, छात्रसंघ अध्यक्ष राहुल, आशु सहित विभिन्न संकायों के 50 से अधिक छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
