टीएमयू में विशेषज्ञों ने बताया, आप कैसे रख सकते हैँ अपने फेफड़े मजबूत और कष्ट रहित

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तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरैपी विभाग की ओर से इंनोवेटिव ट्रेन्ड्स इन पलमोनरी रिहैबिलिटेशन पर दो दिनी वर्कशॉप

प्रो0 श्याम सुंदर भाटिया

नई दिल्ली के जाने-माने वरिष्ठ फिजियोथेरैपिस्ट डॉ. सुमंता घोष का मानना है, यदि आपका फेफड़ा जाम है तो इसकी वजह बैक्टीरिया वायरस या धुंआ, धूल आदि हो सकते हैं। यदि आपको एलर्जी हो। श्वास लेने में दुश्वारी हो तो मान लीजिएगा आपके फेफड़े में सूजन हो गयी है। श्वास नली में भी सूजन हो सकती है। वरिष्ठ फिजियोथेरैपिस्ट डॉ. घोष तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरैपी विभाग की ओर से इंनोवेटिव ट्रेन्ड्स इन पलमोनरी रिहैबिलिटेशन पर आयोजित दो दिवसीय वर्कशॉप में बोल रहे थे। इससे पूर्व वरिष्ठ फिजियोथेरैपिस्ट डॉ. घोष और फिजियोथेरैपी विभाग की एचओडी डॉ. शिवानी एम. कौल ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके वर्कशॉप का शुभारम्भ किया। अन्त में एचओडी डॉ. कौल ने डॉ. सुगंता घोष को पौधा भेंट करके किया। इस मौके पर डॉ. कॉल ने वर्कशॉप को संबोधित करते हुए सलह दी कि कोविड-19 के बाद लोग श्वास से संबंधित समस्याओं को पहचानें और इसके निदान के लिए समय रहते प्रमुख कदम उठाएं।

 

डॉ. घोष ने फेफड़ों की जटिल बीमारियों का विवरण देते हुए कहा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज, वातस्फीति (एम्फाइजिमा), ऑक्सीजन थेरेपी, मैनेजमेन्ट ऑफ पॉस्चर (सोने के तरीके), बलगम निकासी तकनीक- (कपिंग, हैकिंग, टेपिंग) की मदद से फेफड़ों को बलगम मुक्त किया जा सकता है। स्पाइरोमेंट्री उपकरण की मदद से हम फेफड़ो की माँसपेशियों को मजबूत बना सकते हैं। डॉ. घोष ने कहा, की हम यदि अपने जीवन में कुछ सावधानियां करें तो फेफड़ों की होने वाली बीमारियों से दूर रह सकते हैं अथवा मात दे सकते हैं। यदि कोई मरीज को श्वास की जटिल समस्या हो रही हैं तो उसे हमें मशीन जनित ऑक्सीजन (वेन्टिलेटर) और ए.सी.बी.टी. (फेफड़ों के मार्ग की निकासी करना), ऑक्सीजन थेरेपी, आपातकालीन श्वसन के लिए अंबू बैग, सकसन तकनीक की सहायता से निजात पा सकते है।

इसके बाद डॉ. सुमंता घोष परकशन तकनीक को विस्तार से समझाया, जिसमें हमें सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों को थोड़ा गहरा मोड कर कप जैसी संरचना बनानी चाहिए। फिर मरीज के पीठ पर तकरीबन 1 मिनट में 120 बार थपथपाना है। थपथपाने की तकनीक ऐसी होनी चाहिए, जिसमें मरीज को चोट न लगे। पीठ के उपरी भाग से थपथपाते हुए हमें नीचे आना चाहिए। उन्होंने कोविड-19 का जिक्र करते हुए यह नसीहत दी कि आज के समय में यह बहुत जरूरी है कि हम अपने श्वास को दुरुस्त रखें। बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण आज फेफड़ों से संबंधित मरीजों की संख्या बहुत बढ़ गयी है। इस वर्कशॉप में तृतीय वर्ष, चतुर्थ वर्ष और एमपीटी (मास्टर्स) के लगभग 150 विधार्थी उपस्थित रहे। वर्कशॉप में डॉ. फरहान खान, डॉ. हरीश शर्मा आदि भी मौजूद रहे।

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