नए थल सेनाध्यक्ष के कार्यभार संभालने के बाद शीर्ष सैन्य नेतृत्व में महत्वपूर्ण नियुक्तियां


नई दिल्ली, 1 जुलाई। भारतीय सेना में नए नेतृत्व की शुरुआत के साथ ही रक्षा मंत्रालय ने शीर्ष सैन्य ढांचे में महत्वपूर्ण नियुक्तियां करते हुए संयुक्त सैन्य नेतृत्व को नई दिशा देने की पहल की है। नए जनरल प्रतीक शर्मा के कार्यभार संभालने के तुरंत बाद बुधवार को एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी) के अध्यक्ष के एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख (Chief of Integrated Defence Staff to the Chairman, COSC) का पदभार ग्रहण किया। इन नियुक्तियों को तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, संयुक्त सैन्य संचालन और थिएटर कमांड की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने 1 जुलाई को आधिकारिक रूप से अपना नया दायित्व संभाला। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज तथा राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। उन्हें 13 जून 1987 को भारतीय वायु सेना की लड़ाकू शाखा में कमीशन मिला था। वे श्रेणी ‘ए’ के योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं और 4,500 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव रखते हैं।
करीब चार दशक के सैन्य करियर में उन्होंने एक लड़ाकू स्क्वाड्रन, रडार स्टेशन और एक प्रमुख लड़ाकू वायु अड्डे की कमान संभाली है। इसके अलावा वे जम्मू-कश्मीर में एयर ऑफिसर कमांडिंग के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके हैं। परिचालन अनुभव, प्रशिक्षण और रणनीतिक योजना के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें यह अहम दायित्व सौंपा गया है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नए थल सेनाध्यक्ष के कार्यभार ग्रहण करने के साथ शीर्ष सैन्य नेतृत्व में हुए ये बदलाव भारत की संयुक्त सैन्य क्षमता को और मजबूत करेंगे। चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ का दायित्व तीनों सेनाओं—थल सेना, नौसेना और वायु सेना—के बीच समन्वय स्थापित करने, संयुक्त अभियान, संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा भविष्य के थिएटर कमांड ढांचे को आगे बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
हाल के वर्षों में रक्षा मंत्रालय सैन्य आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, संयुक्त कमान प्रणाली और भविष्य की युद्ध चुनौतियों के अनुरूप सैन्य संरचना विकसित करने पर विशेष बल दे रहा है। ऐसे समय में शीर्ष स्तर पर अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार सीमा सुरक्षा से जुड़े बदलते सुरक्षा परिदृश्य, अत्याधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग, साइबर एवं अंतरिक्ष क्षेत्र में नई चुनौतियों तथा संयुक्त सैन्य अभियानों की आवश्यकता को देखते हुए भारतीय सशस्त्र बलों में नेतृत्व परिवर्तन का विशेष महत्व है। नए सैन्य नेतृत्व से रक्षा सुधारों की गति तेज होने और तीनों सेनाओं के बीच समन्वित संचालन को और मजबूती मिलने की उम्मीद की जा रही है।
