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बड़ी जात शुरू : चल पड़ी नंदा भगवती कैलाश की ओर

 

  • नंदा के मार्मिक विदाई गीतों और जयकारों से गूंजा सिद्धपीठ कुरूड़, भक्तों की छलछलाई आंखें

  • दो चौसिंगा खाडु भी बड़ी जात के साथ रवाना, बधाण, दशोली और बंड़ की नंदा डोलियां अपने-अपने पड़ावों पर पहुंचीं

हरेंद्र बिष्ट / महिपाल गुसाईं की रिपोर्ट-
नंदाधाम कुरूड़, 5 सितम्बर। “ …तून जाण नंदा ऊंचा कैलाशों, तेरा साथ जाल यो चौसिंगा खाडु, तेरो साथ जाल यो लाटू भुमियाल, तेरे साथ जाल यों धर्म जात्रियों…” जैसे नंदा की कैलाश यात्रा और विदाई से जुड़े दर्जनों मार्मिक लोकगीतों के बीच शनिवार को नंदाधाम कुरूड़ से श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी की बड़ी जात यात्रा अपने पहले पड़ाव चरबंग के लिए रवाना हुई। नंदा की विदाई की बेला आते ही मंदिर परिसर का माहौल अत्यंत भावुक हो उठा। अपनी आराध्य देवी को कैलाश के लिए विदा करते समय बड़ी संख्या में मौजूद नंदा भक्तों की आंखें छलछला उठीं। इस दौरान कई महिलाओं और पुरुषों पर देवी भी अवतरित हुईं।

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शनिवार को प्रातःकाल से ही नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ में नंदा देवी की विदाई की तैयारियां शुरू हो गई थीं। सुबह से मंदिर परिसर में देवी स्तुति, पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हो गए। इसी के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का कुरूड़ पहुंचना शुरू हो गया। नंदा भक्तों ने देवी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और मनौतियां मांगीं। सुबह शुरू हुआ दर्शनों का यह सिलसिला अपराह्न तीन बजे तक लगातार चलता रहा।


इसके बाद विदाई की घड़ी करीब आने के साथ मंदिर परिसर में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। “कुरूड़ की नंदा देवी दैणा होई जाएं, कुशल मंगल तू सोरास जाली, 12 साल में होद माता बड़ी जात, चौसिंगा खंडु होद तेरों…”, “अब आगे नंदा सोरास की बेला, तूने जाणी नंदा तें ऊंचा कैलाश…” और “पैटण बंटी गे मेरी नंदा भवानी, अपणो सोरास मेरी नंदा भवानी…” जैसे पारंपरिक और मार्मिक नंदा गीतों के बीच सिद्धपीठ से देवी की विदाई की प्रक्रिया शुरू हुई।


अपराह्न करीब साढ़े तीन बजे “नंदा भगवती” के जोरदार जयकारों से पूरा कुरूड़ क्षेत्र गूंज उठा और श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा के तहत देवी का उत्सव डोला अपने पहले पड़ाव चरबंग के लिए रवाना हो गया। बड़ी जात यात्रा के साथ दो चौसिंगा खाडु भी चल रहे हैं। डोले के मंदिर परिसर से बाहर निकलते ही माहौल और अधिक भावुक हो गया। वहां मौजूद अनेक महिलाओं के साथ पुरुषों की आंखें भी नम हो गईं। नंदा भक्तों ने अपनी आराध्य देवी और हिमालय की बेटी को एक तरह से अश्रुपूरित विदाई दी।
सुबह से ही नंदाधाम कुरूड़ में नंदा भक्तों का रेला उमड़ पड़ा था।

मंदिर और आसपास का पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं से भरा रहा। बधाण की नंदा डोली के साथ ही सिद्धपीठ देवराड़ा से दशोली और बंड़ क्षेत्र की नंदा देवी की डोलियां भी अपने-अपने पड़ावों के लिए रवाना हुईं। बधाण की नंदा डोली अपने पहले पड़ाव चरबंग, दशोली की डोली पहले पड़ाव कुमजुग तथा बंड़ की नंदा डोली मैठाणा प्रवास पर पहुंच गई है। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह नंदा भक्तों ने देवी की डोलियों का भव्य स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर देवी से मनौतियां मांगीं और यात्रा की मंगलकामना की।
तीन दिवसीय नंदा मेले का समापन, विधायक ने की एक लाख रुपये देने की घोषणा
इससे पहले सिद्धपीठ कुरूड़ में आयोजित तीन दिवसीय नंदा मेले का मंदिर प्रांगण में समापन हुआ। मुख्य अतिथि थराली विधायक भूपाल राम टम्टा ने मेले का समापन करते हुए कहा कि जिस तादाद में नंदा भक्त सिद्धपीठ कुरूड़ से शुरू हो रही श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा में उमड़े हैं, वह अपने आप में ऐतिहासिक है। उन्होंने बड़ी जात यात्रा की सफलता और सभी श्रद्धालुओं के मंगल के लिए नंदा भगवती से प्रार्थना की। विधायक ने मेले के सफल संचालन के लिए एक लाख रुपये दिए जाने की घोषणा भी की।
जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट ने कुरूड़ में उमड़े श्रद्धालुओं के जनसैलाब को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि नंदा के प्रति लोगों की अपार आस्था इस यात्रा को विशिष्ट बनाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि बड़ी जात यात्रा सफलतापूर्वक अपने निर्धारित मुकाम तक पहुंचेगी।
श्री नंदादेवी बड़ी जात समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उत्साह से अभिभूत नजर आए। उन्होंने कहा कि नंदा के भक्तों की आस्था किसी राजनीति की मोहताज नहीं है। चार सितम्बर से ही देश के अलग-अलग राज्यों से नंदा भक्तों के कुरूड़ पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो शनिवार को भी लगातार जारी रहा। उन्होंने श्रद्धालुओं से बड़ी संख्या में यात्रा में शामिल होकर इस विश्व प्रसिद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा को सफल बनाने की अपील की।
इस अवसर पर नंदादेवी राजराजेश्वरी मंदिर समिति कुरूड़ के अध्यक्ष नरेश गौड़, पूर्व अध्यक्ष मनशा राम गौड़ और सुखवीर रौतेला ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी, राज्य मंत्री हरक सिंह नेगी, राम प्रसाद गौड़ सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, मंदिर एवं यात्रा समितियों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में नंदा भक्त मौजूद रहे।
कुरूड़ से नंदा की डोली रवाना होने के साथ ही बड़ी जात यात्रा का वह भावपूर्ण अध्याय शुरू हो गया, जिसमें नंदा को मायके से ससुराल अर्थात कैलाश के लिए विदा करने की सदियों पुरानी हिमालयी परंपरा, लोक आस्था और संस्कृति एक साथ जीवंत हो उठती है। यात्रा के आगे बढ़ने के साथ अब विभिन्न पड़ावों पर नंदा भक्त देवी का स्वागत करेंगे और यह धार्मिक-सांस्कृतिक यात्रा अपने निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ेगी।

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