संविधान दिवस उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस ने भीमराव अम्बेडकर का स्मरण कर संविधान की शपथ

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उत्तराखंड हिमालय ब्यूरो

देहरादून, 26  नवंबर।   उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री करण माहरा की अध्यक्षा में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय  में आयोजित  संविधान दिवस की गोष्ठी के अवसर पर संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं को सविधान दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि 26 नवम्बर के दिन देश की संविधान सभा ने संविधान को अपनाया था। यह संविधान ही है जो हमें एक आजाद देश का आजाद नागरिक की भावना का एहसास कराता है। उन्होंने कहा कि जहॉ संविधान के मौलिक अधिकार हमारी ढॉल बनकर हमें हमारा हक दिलाते हैं वहीं इसमें दिये गये मौलिक कर्तव्य हमें हमारी जिम्मेदारियांे को भी याद दिलाते हैं। उन्होेंने कहा कि हम सबको यह भी जानना जरूरी है कि 26 नवम्बर देश के राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में मनाया जाता है।


करन माहरा ने कहा कि आजादी के बाद हमारे पास अपना कोई संविधान नही था इसलिए इसको बनाने के लिए एक संविधान सभा का गठन किया गया।  जिस सभा मंे पंडित जवाहर लाल नेहरू, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद बाबा सहाब भीमराव अंबेडकर, सरदार बल्लभ भाई पटेल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, मौलाना अबुल कलाम आजाद, आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। संविधान की ड्रफ्ंिटिंग समिति के अध्यक्ष बाबा साहब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर थे इसलिए उन्हें संविधान निर्माता कहा जाता है।

माहरा ने कहा कि संविधान दिवस के अवसर पर हम सबको जीवन भर अपने मौलिक अधिकारों एवं कर्तब्यों के साथ-साथ कानून का पालन करने का प्रण लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश का अच्छा और जिम्मेदार नागरिक बनने से न सिर्फ संविधान का मकसद पूरा होगा बल्कि संविधान निर्माताओं के सपनों के राष्ट का निर्माण भी होगा।

करण माहरा ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर एवं संविधानसभा ने हमारे देश को एक ऐसा लोकतंात्रिक गणराज्य घोषित किया जहां देश के लोग सर्वोच्च शक्ति रखते हैं। संविधान की प्रस्तावना का ‘हम’ शब्द इंगित करता है कि इस देश के लोग सरकार को शक्ति देते हैं और यह अपना अधिकार लोगों की इच्छा से प्राप्त करता है। हमारा संविधान समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय की आकांक्षाओं को आवाज देता है। संविधान का उद्देश्य जाति, वर्ग, नस्ल, लिंग और धर्म के आधार पर भारत में मौजूद विशाल असमानताओं को दूर करना और सभी क्षेत्रों में सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करना था। बाबा साहब द्वारा बनाये गये संविधान में समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, जीवन का अधिकार, शोषण के खिलाफ अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार, सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार, संवैधानिक उपचार का अधिकार संविधान में प्रदत्त किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने अपने अंतिम भाषण में चेतावनी दी थी कि यदि संविधान का अक्षरतः पालन नहीं किया गया तो भारत एकबार फिर से अपनी स्वतंत्रता खो देगा। उन्होंने कहा था कि संविधान स्वयं दस्तावेज पर नही बल्कि इसे क्रियान्वित करने के प्रभावी लोगों के प्रभाव पर निर्भर है। उन्होंने कहा था राजनीति में नायक-पूजा गिरावट और तानाशाही का एक गारंटीकृत मार्ग होगा और केवल राजनीतिक लोकतंत्र पर्याप्त नहीं होगा, हमें समाजिक लोकतंत्र को प्राप्त करने की आकांक्षा भी रखनी होगी। उन्होंने कहा कि आज कुछ ताकतों द्वारा भारत के संविधान में उल्लिखित अधिकारों से खिलवाड किया जा रहा है कांग्रेस पार्टी को इन अधिकारों की रक्षा करनी है। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री करन माहरा ने उपस्थित कार्यकर्ताओं को संविधान की शपथ दिलाई।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                              इस असवर पर सेवादल द्वारा झण्डारोहण करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया तत्पश्चात सेवादल की टुकडी ने बन्दे मातरम, ध्वजगीत एवं राष्ट्रगान प्रस्तुत किया. महानगर कांग्रेस कमेटी के कार्य. अध्यक्ष डॉ. जसविन्दर सिंह गोगी ने संचालन करते हुए सभी को संविधान दिवस की शुभकामनायें दी।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, प्रदेश उपाध्यक्ष संगठन मथुरा दत्त जोशी, सूर्यकान्त धस्माना, महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. जसविन्दर सिंह गोगी, महामंत्री नवीन जोशी, डॉ. प्रेम बहुखण्डी, डा. अरूण रतूडी, डॉ. प्रदीप जोशी, हेमा पुरोहित, याकूब सिद्विकी, सुजाता पॉल, मनीश नागपाल, गोदावरी थापली, अनुकृति गुसांई रावत, सत्या पोखरियाल, आशा टम्टा, उपेन्द्र थापली, विजय चौहान, अनिल नेगी संजय गौतम नीरज त्यागी, सोनू रावत, पिया थापा, किरन क्षेत्री ने अपने महत्वपूर्ण विचार रखे।

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