ब्लॉग

क्या महंगाई पर अंकुश के लिए है रिजर्व बैंक का रेपो रेट बढ़ाने का कदम ?

 

– ऊषा रावत-
ब्याज दरों में मामूली वृद्धि से उपभोक्ताओं और निवेशकों को संकेत, महंगाई नियंत्रण के साथ आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखना भी चुनौती
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति का सीधा संबंध केवल बैंकों की ब्याज दरों से नहीं, बल्कि आम आदमी की रसोई, मकान की मासिक किस्त, उद्योगों के निवेश और देश की आर्थिक विकास दर से भी है। यही कारण है कि नीतिगत ब्याज दर में मामूली परिवर्तन भी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संदेश लेकर आता है। महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में चौथाई प्रतिशत की वृद्धि का निर्णय इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह कदम न तो आर्थिक गतिविधियों पर अचानक ब्रेक लगाने के लिए है और न ही उपभोक्ताओं को भयभीत करने के लिए, बल्कि बाजार को सावधान करने और महंगाई की संभावित चुनौतियों से निपटने का संकेत है।
संदर्भित मौद्रिक निर्णय में रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 25 आधार अंकों अर्थात 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 5.50 प्रतिशत किया है। यह वृद्धि देखने में छोटी अवश्य है, लेकिन इसके आर्थिक निहितार्थ व्यापक हैं। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कीमतों में लगातार बढ़ोतरी को अनदेखा नहीं किया जा सकता। हालांकि ब्याज दर बढ़ाते समय यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि उपभोग, उत्पादन और निवेश की गति अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!