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भारत में गुड़: प्राकृतिक मिठास का वैश्विक नेतृत्व

India accounts for over 70% of global jaggery production, firmly establishing itself as the world leader in natural sweeteners. Nearly 20–30% of the country’s sugarcane output is diverted towards jaggery production, supporting around 2.5 million rural livelihoods. The sector has also witnessed significant export growth. Jaggery exports have increased by 106.5% in value between 2015–16 and 2024–25, indicating rising international demand. Nutritionally rich in iron, minerals, and essential micronutrients, jaggery serves as a healthier alternative to refined sugar. Complementing this growth, government initiatives such as Pradhan Mantri Kisan SAMPADA Yojana, PM Formalization of Micro Food Processing Enterprises Scheme, and One District One Product, along with GI tagging, are playing a crucial role in promoting value addition, strengthening rural enterprises, and enhancing export potential.

 

-A PIB FEATURE EDITED BY USHA RAWAT-

भारत दुनिया के 70 प्रतिशत से ज्यादा गुड़ का उत्पादन करता है, जिससे वह प्राकृतिक मिठास के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। देश के गन्ने के कुल उत्पादन का लगभग 20-30 प्रतिशत हिस्सा गुड़ बनाने में इस्तेमाल होता है, जिससे लगभग 25 लाख ग्रामीण लोगों को आजीविका मिलती है। इस क्षेत्र में निर्यात में भी काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। वर्ष 2015-16 से 2024-25 के बीच गुड़ के निर्यात के मूल्य में 106.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो इसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग का संकेत है। आयरन, मिनरल्स और जरूरी माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होने के कारण गुड़ रिफाइंड चीनी का एक ज्यादा सेहतमंद विकल्प है।

इस बढ़ोतरी को और बढ़ावा देने के लिए सरकार की कई योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना, एक जिला एक उत्पाद तथा जीआई टैगिंग अहम भूमिका निभा रही हैं। ये योजनाएं उत्पादों की वैल्यू बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमों को मजबूत करने और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद कर रही हैं।

गुड़: एक पारंपरिक, प्राकृतिक और औषधीय मीठा पदार्थ

गुड़ एक पारंपरिक, बिना रिफाइन किया हुआ और प्राकृतिक मीठा पदार्थ है। इसे बिना किसी रसायन का इस्तेमाल किए, गन्ने के रस को गाढ़ा करके बनाया जाता है। इसे अक्सर “औषधीय चीनी” भी कहा जाता है। पोषक तत्वों के मामले में यह शहद के बराबर होता है।

गुड़ का सेवन एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है, जहां इसे अलग-अलग स्थानीय नामों से जाना जाता है। गुड़ को प्राकृतिक रूप से बनाने, पारंपरिक तरीकों और रसायन मुक्त मीठे पदार्थों के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती पसंद के कारण इसे काफी महत्व दिया जाता है।

उत्पादन, आर्थिक महत्व और ग्रामीण आजीविका

दुनिया भर में गुड़ के कुल उत्पादन का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा भारत में होता है। इस वजह से भारत दुनिया का सबसे बड़ा गुड़ उत्पादक देश है। देश में गन्ने के कुल उत्पादन का लगभग 20–30 प्रतिशत हिस्सा गुड़ बनाने में इस्तेमाल होता है। यह ग्रामीण भारत के प्रमुख कृषि-प्रसंस्करण उद्योगों में से एक है।

इस क्षेत्र की खासियत विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण, परिवहन की कम लागत, छोटे पैमाने पर उद्यमिता और कुटीर उद्योग है। इससे लगभग 25 लाख लोगों की आजीविका चलती है।

2024-25 में गन्ने का कुल उत्पादन 444.9 मिलियन टन रहने का अनुमान था। कुल उत्पादन में उत्तर प्रदेश का योगदान 48.5 प्रतिशत रहा, इसके बाद महाराष्ट्र (24.1 प्रतिशत) और कर्नाटक (10.5 प्रतिशत) का स्थान था। अन्य उत्पादक राज्यों में गुजरात, तमिलनाडु, बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश और हरियाणा शामिल हैं।

बढ़ती मिठास: भारत की गुड़ अर्थव्यवस्था और निर्यात वृद्धि

भारत गुड़ और कन्फेक्शनरी उत्पादों (जिनमें पारंपरिक भारतीय मिठाइयां और टॉफियां शामिल हैं) के प्रमुख निर्यातकों में से एक है।

  • 2015-16 में 292.8 मीट्रिक टन निर्यात से 197 मिलियन अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए।
  • 2024-25 तक निर्यात बढ़कर 471.9 मीट्रिक टन हो गया, जिससे 406.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए।

इस अवधि के दौरान मूल्य में लगभग 106.5 प्रतिशत और मात्रा में 61.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2024-25 में निर्यात के प्रमुख ठिकानों में इंडोनेशिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नाइजीरिया और नेपाल शामिल थे।

अप्रैल-जनवरी (2025-26) के दौरान निर्यात 450.1 मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जिसका मूल्य 384.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। यह 2024-25 की समान अवधि की तुलना में मात्रा में 16.5 प्रतिशत और मूल्य में 15.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है।

प्राकृतिक स्वीटनर्स की घरेलू मांग भी बढ़ी है। स्वीटनर क्षेत्र में गुड़ और शहद ने 2021-24 के दौरान 15–20 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की है। घरेलू बाजारों में गुड़ की बिक्री अगस्त 2024 तक सालाना लगभग 5,000 मीट्रिक टन तक पहुंच गई थी।

भारत की गुड़ परंपरा की प्राचीन जड़ें

गुड़ को व्यापक रूप से एक स्वदेशी भारतीय उत्पाद माना जाता है। इसका इतिहास गन्ने की खेती और प्रसंस्करण से गहराई से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत वैदिक काल से मानी जाती है। गन्ने की खेती का शुरुआती जिक्र भारतीय ग्रंथों में लगभग 1400–1000 ईसा पूर्व के आसपास मिलता है।

“शुगर” शब्द संस्कृत शब्द ‘शर्करा’ से लिया गया है। ऐतिहासिक विवरणों से पता चलता है कि 647 ईस्वी में एक चीनी प्रतिनिधिमंडल गन्ना प्रसंस्करण तकनीक सीखने के लिए मगध गया था। खेती, प्रसंस्करण और ज्ञान के आदान-प्रदान की इस लंबी परंपरा ने गुड़ उत्पादन में भारत को प्रमुख बनाया है।

पोषण और जन स्वास्थ्य के लिए गुड़

गुड़ को अब एक ‘सुपरफूड’ के तौर पर ज्यादा से ज्यादा पहचाना जा रहा है। यह रिफाइंड चीनी का एक प्राकृतिक और पोषक तत्वों से भरपूर विकल्प है। गुड़ को गन्ने के गाढ़े रस से, बिना किसी रासायनिक रिफाइनिंग के बनाया जाता है। इसलिए इसमें वे जरूरी खनिज और सूक्ष्म पोषक तत्व बने रहते हैं।

गुड़ का पोषण मूल्य गुड़ कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस, सोडियम, आयरन, जिंक, कॉपर और मैंगनीज जैसे खनिजों को सुरक्षित रखता है। अच्छी क्वालिटी के गुड़ में आमतौर पर 70 प्रतिशत से ज्यादा सुक्रोज, थोड़ी मात्रा में ग्लूकोज और फ्रक्टोज तथा लगभग 5 प्रतिशत खनिज होते हैं।

आयरन की मात्रा (हर 100 ग्राम में लगभग 10-13 mg) हीमोग्लोबिन के स्तर को बेहतर बनाने में मदद करती है, जबकि पोटैशियम और मैग्नीशियम हृदय संबंधी और मांसपेशियों के काम को ठीक रखने में सहायक होते हैं।

गुड़ के स्वास्थ्य संबंधी फायदे

  • लंबे समय तक सतत ऊर्जा प्रदान करता है।
  • एनीमिया के इलाज में फायदेमंद।
  • पाचन क्रिया सुधारता है।
  • आयुर्वेद में गले, खांसी, कफ और श्वसन संबंधी समस्याओं में लाभकारी।
  • रक्त शुद्धिकरण, डिटॉक्स और थकान कम करने में सहायक।
  • हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा।

पोषण उपायों में गुड़ का उपयोग

तमिलनाडु में बच्चों के कुपोषण को दूर करने और स्कूल भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘पौष्टिक भोजन कार्यक्रम’ और आईसीडीएस के तहत गुड़ को शामिल किया गया है। ‘सथुमावु’ नामक पूरक आहार में गुड़ की हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत होती है। यह कार्यक्रम 32.75 लाख लाभार्थियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराता है और महिला स्व-सहायता समूहों को भी आजीविका प्रदान करता है।

गन्ने से आजीविका तक: ग्रामीण विकास में गुड़ की भूमिका

गुड़ उत्पादन असंगठित कृषि-प्रसंस्करण क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय रोजगार पैदा करने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान देता है। मूल्य संवर्धन से किसानों को मिलों को कच्चा गन्ना बेचने की तुलना में ज्यादा मुनाफा मिलता है।

सफल उदाहरण: तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के किसान एंथनीसामी ऑर्गेनिक गुड़ पाउडर बनाते हैं, जो 75 रुपये प्रति किलो बिकता है जबकि सामान्य गुड़ 50 रुपये प्रति किलो बिकता है। उन्होंने गुड़ स्वाद वाली चॉकलेट और अन्य मूल्य-वर्धित उत्पाद भी विकसित किए हैं।

गुड़ मूल्य शृंखला को सशक्त बनाना: सरकारी नीतिगत पहल

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की प्रमुख योजनाएं:

  • प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY)
  • प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME)
  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLISFPI)
  • एक जिला एक उत्पाद (ODOP)

PMFME योजना के तहत 3,528 गुड़ आधारित सूक्ष्म इकाइयों को 102.31 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है। 19 जिलों में गुड़ को ODOP उत्पाद के रूप में पहचाना गया है। एगमार्क प्रमाणन और जीआई टैगिंग गुणवत्ता एवं ब्रांडिंग को मजबूत कर रही हैं।

भारत में जीआई टैग प्राप्त गुड़ की प्रमुख किस्में

  • कोल्हापुर गुड़ (महाराष्ट्र) — सुनहरा रंग और उच्च सुक्रोज
  • मुजफ्फरनगर गुड़ (उत्तर प्रदेश) — निर्यातोन्मुख उच्च गुणवत्ता
  • मरायूर और मध्य त्रावणकोर गुड़ (केरल) — शुद्धता और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध

गुड़ का उत्पादन और प्रसंस्करण भारत की कृषि अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। यह पोषण, ग्रामीण आजीविका, सांस्कृतिक विरासत और निर्यात को आपस में जोड़ता है। सरकारी समर्थन, मूल्य संवर्धन, जीआई टैगिंग और बढ़ती वैश्विक मांग के साथ गुड़ क्षेत्र समावेशी एवं टिकाऊ ग्रामीण विकास की अपार संभावनाएं रखता है। प्राकृतिक मिठास की ओर बढ़ते विश्वव्यापी रुझान में भारत का गुड़ स्वस्थ और पौष्टिक विकल्प के रूप में दुनिया के सामने चमक रहा है।

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