तारों का ब्रह्मांडीय नृत्य और जीवन के रहस्यों की खोज


-ज्योति रावत –
2007 की सर्दियों में दुनिया भर के खगोल भौतिकीविद सुदूर अंतरिक्ष में घटी एक दुर्लभ घटना को देखने के लिए वेधशालाओं में मुस्तैद थे। अंतरिक्ष में एक श्वेत वामन (व्हाईट ड्वार्फ) और उसके साथी तारे के बीच अनोखा ‘ब्रह्मांडीय नृत्य’ चल रहा था। इस दौरान हुए एक भयंकर विस्फोट (नोवा) के बाद चारों ओर मोटी धूल का गुबार छा गया। इस खास नोवा को वी 1280 स्कॉर्पी (Nova V1280 Scorpii) नाम दिया गया। एसएन बोस सेंटर फॉर बेसिक साइंस (SNBCBS) के वैज्ञानिक डॉ. आर. के. दास और उनकी टीम ने माउंट आबू वेधशाला (राजस्थान) से इस घटना पर करीब से नजर रखी और पाया कि विस्फोट के एक महीने बाद बनी यह मोटी धूल परत अगले 250 दिनों तक अंतरिक्ष में बनी रही।
माउंट आबू से चिली तक: डेटा और तकनीकों का संगम
भारतीय वैज्ञानिकों ने नोवा के इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रा से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग करके एक मॉडल तैयार किया। इस मॉडल की मदद से धूल बनने से पहले और बाद के चरणों में हाइड्रोजन घनत्व, तापमान, चमक और मौलिक तत्वों की प्रचुरता का सटीक अनुमान लगाया गया।
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अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: चिली स्थित ‘वेरी लार्ज टेलीस्कोप इंटरफेरोमीटर’ के सहयोग से वैज्ञानिकों ने पहली बार किसी नोवा के चारों ओर धूल के आवरण (Dust Shell) के विस्तार की दर का सटीक मापन किया।
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व्यापक सिमुलेशन: वैज्ञानिकों ने अलग-अलग स्थितियों का आंकलन करने के लिए 50,000 से अधिक मॉडल तैयार किए और फिर देखे गए स्पेक्ट्रम से उनका मिलान किया। इस विस्तृत प्रक्रिया में कई वर्षों का समय लगा।
अंतरिक्ष में धूल का निर्माण: एक अनसुलझी गुत्थी
आमतौर पर तारों के बीच अंतरतारकीय धूल (Interstellar Dust) बनने में हजारों साल का समय लगता है। लेकिन नोवा इजेक्शन जैसी प्रतिकूल स्थितियों में विस्फोट के महज 30 से 100 दिनों के भीतर ही धूल की मोटी परत बन जाती है। ऐसी ब्रह्मांडीय धूल हर दिन सैकड़ों किलोग्राम की मात्रा में पृथ्वी पर भी गिरती है, लेकिन इसके निर्माण और सटीक संरचना को समझना हमेशा से वैज्ञानिकों के लिए एक चुनौती रहा है। V1280 स्कॉर्पी ने वैज्ञानिकों को इस प्रक्रिया को गहराई से समझने का अवसर दिया।

जीवन के शुरुआती तत्वों का सुराग
वैज्ञानिकों ने उत्सर्जन (Ejecta) में कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के साथ-साथ छोटे अक्रिस्टलीय (Amorphous) कार्बन कणों और बड़े खगोलीय सिलिकेट कणों का मिश्रण पाया। सबसे महत्वपूर्ण खोज यह रही कि इसमें मिश्रित एरोमैटिक-ऐलीफैटिक (Aromatic-Aliphatic) संरचना वाले जटिल कार्बनिक यौगिक मौजूद थे।
ये कार्बनिक यौगिक सितारों और ग्रहों के आसपास आणविक बादलों (Molecular Clouds) के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। यह अध्ययन दर्शाता है कि अंतरिक्ष में धूल के कणों का टकराव और उनका फैलाव ही वह माध्यम हो सकता है जो ग्रहों पर जीवन की शुरुआत के लिए आवश्यक मूलभूत तत्वों को पहुंचाता है।
भविष्य की दिशा
एस्ट्रोफिजिकल जर्नल (The Astrophysical Journal) में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, V1280 स्कॉर्पी से फैली धूल का यह आवरण धीरे-धीरे अंतरतारकीय पदार्थ में विलीन हो जाएगा। यद्यपि इस पूरी प्रक्रिया में हजारों वर्ष लगेंगे, लेकिन ब्रह्मांडीय समय चक्र की दृष्टि से यह बेहद कम अवधि है। यह खोज हमें यह समझने में मदद करती है कि कैसे तारों के विनाश और विस्फोट से ही अंततः जीवन के बीज अंकुरित होते हैं।
श्वेत वामन (White Dwarf) क्या होता है
श्वेत वामन (White Dwarf) किसी मध्यम या कम द्रव्यमान वाले तारे (जैसे हमारे सूर्य) के जीवन चक्र का अंतिम अवशेष होता है। जब तारे का मुख्य ईंधन समाप्त हो जाता है, तो वह अपनी बाहरी परतों को अंतरिक्ष में त्याग देता है और पीछे पृथ्वी के आकार का एक अत्यंत घना, अत्यधिक गर्म और निष्प्राण केंद्र छोड़ जाता है, जिसमें अब कोई परमाणु संलयन नहीं होता। हालांकि, जब ऐसा श्वेत वामन किसी द्वितारा प्रणाली (Binary Star System) में अपने साथी तारे के बहुत समीप परिक्रमा करता है, तो उसके प्रचंड गुरुत्वाकर्षण के कारण साथी तारे के वायुमंडल से मुख्य रूप से हाइड्रोजन गैस बहकर श्वेत वामन की सतह पर एक्रिशन डिस्क (Accretion Disk) के रूप में जमा होने लगती है।
जैसे-जैसे हाइड्रोजन की यह परत मोटी होती जाती है, श्वेत वामन का अत्यधिक गुरुत्वीय दबाव और असीम तापमान इसे एक नाज़ुक मोड़ पर पहुँचा देता है। चूँकि श्वेत वामन की सतह अपभ्रष्ट पदार्थ (Degenerate Matter) से बनी होती है जो आसानी से फैलती नहीं, इसलिए बढ़ता तापमान दबाव को विस्फोटक सीमा तक ले जाता है। एक बिंदु पर पहुँचकर सतह पर मौजूद हाइड्रोजन में अचानक तीव्र परमाणु संलयन (Nuclear Fusion) भड़क उठता है, जिसे “रनअवे थर्मोन्यूक्लियर रिएक्शन” कहा जाता है।
इस भयंकर सतह-विस्फोट के कारण तारे की चमक अचानक 10,000 से 1,000,000 गुना तक बढ़ जाती है और भारी मात्रा में ऊर्जा, प्रदीप्त गैसें तथा कार्बन व सिलिकेट धूल के कण अत्यधिक तीव्र गति से अंतरिक्ष में उत्सर्जित हो जाते हैं। नोवा विस्फोट की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि इसमें केवल श्वेत वामन की बाहरी सतह का मलबा नष्ट होता है, जबकि खुद श्वेत वामन सुरक्षित बचा रहता है—जिससे भविष्य में पुनः पदार्थ जमा होने पर यह चक्र फिर से दोहराया जा सकता है। इसके विपरीत, यदि श्वेत वामन का कुल द्रव्यमान चंद्रशेखर सीमा (1.4 सौर द्रव्यमान) को पार कर जाए, तो वह सतह विस्फोट तक सीमित न रहकर Type Ia सुपरनोवा के रूप में पूरी तरह नष्ट हो जाता है।

नोवा विस्फोट के बाद अंतरिक्ष में फैलने वाली ब्रह्मांडीय धूल
नोवा विस्फोट के बाद अंतरिक्ष में फैलने वाली ब्रह्मांडीय धूल (Cosmic Dust) और जटिल कार्बनिक यौगिक (Complex Organic Compounds) केवल तारों का मलबा नहीं होते, बल्कि ये नए तारों, ग्रहों और जीवन के निर्माण में मौलिक निर्माण खंडों की भूमिका निभाते हैं। जब नोवा विस्फोट के बाद अत्यधिक वेग से उत्सर्जित गैसें और धूल के कण अंतरिक्ष में फैलते हैं, तो वे ठंडे होकर अंतरतारकीय बादलों (Interstellar Clouds) में मिल जाते हैं। जब ये बादल गुरुत्वाकर्षण के कारण ढहते हैं और किसी नए तारे का जन्म होता है, तो तारे के चारों ओर धूल और गैस की प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क (Protoplanetary Disk) बनती है। नोवा से निकली धूल के छोटे-छोटे अक्रिस्टलीय कार्बन और सिलिकेट कण इसी डिस्क में आपस में चिपककर कंकड़, प्लैनेटेसिमल्स (चट्टानी भ्रूण) और अंततः पृथ्वी जैसे ठोस ग्रहों के निर्माण का आधार बनते हैं। सिलिकेट धूल ग्रहों की ऊपरी परत और मेंटल के निर्माण के लिए सिलिकॉन और ऑक्सीजन प्रदान करती है, जिसके बिना बनने वाले ग्रह केवल गैस के गोले ही रह जाते।
इसके साथ ही, V1280 स्कॉर्पी जैसे नोवा विस्फोटों के दौरान बनने वाले मिश्रित एरोमैटिक-ऐलीफैटिक (Aromatic-Aliphatic) संरचना वाले जटिल कार्बनिक यौगिक अत्यधिक प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सुरक्षित रहकर बर्फ और सिलिकेट धूल के कणों पर जम जाते हैं। जब नवजात ग्रहों की सतह पर धूमकेतु (Comets) और क्षुद्रग्रह (Asteroids) टकराते हैं, तो वे इन नोवा-निर्मित कार्बनिक अणुओं और एमिनो एसिड के पूर्वजों को ग्रहों की सतह पर सुरक्षित पहुँचा देते हैं, जो पृथ्वी जैसे ग्रहों पर जीवन की जैविक शुरुआत (Prebiotic Chemistry) के लिए आवश्यक सामग्री प्रदान करते हैं। इसके अलावा, अंतरिक्ष में फैली यह सूक्ष्म धूल ऊष्मा को इन्फ्रारेड विकिरण के रूप में बाहर निकालकर अंतरतारकीय बादलों के तापमान को कम करती है, जिससे वे आसानी से सिकुड़कर नई ग्रह प्रणालियों को जन्म दे पाते हैं। इस प्रकार, नोवा विस्फोट ब्रह्मांड के रासायनिक पुनर्चक्रण कारखाने (Chemical Recycling Plants) की तरह काम करते हैं, जो मृत तारों के अवशेषों से नए ग्रहों की संरचना और जीवन के आधार स्तंभ तैयार करते हैं।
