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धरती की गर्मी से भी बिजली पैदा करेगा उत्तराखंड

  • तपोवन में भू-तापीय ऊर्जा परियोजना के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित
  • स्वच्छ ऊर्जा, रोजगार और हरित विकास को मिलेगी नई दिशा


देहरादून/चमोली, 3 जून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में उपलब्ध भू-तापीय (जियो थर्मल) ऊर्जा की संभावनाओं के दोहन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए चमोली जनपद के तपोवन क्षेत्र में भू-तापीय ऊर्जा परियोजना के विकास के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह ने बताया कि समिति परियोजना की तकनीकी, वित्तीय एवं वाणिज्यिक व्यवहार्यता का विस्तृत अध्ययन कर भू-तापीय ऊर्जा के दोहन तथा परियोजना के चरणबद्ध विकास के लिए कार्ययोजना तैयार करेगी। समिति विभिन्न विभागों, अनुसंधान संस्थानों और विशेषज्ञ एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर परियोजना के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेगी।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में उपलब्ध भू-तापीय ऊर्जा संसाधनों के वैज्ञानिक और सतत उपयोग की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम है। भू-तापीय ऊर्जा चौबीसों घंटे उपलब्ध रहने वाला स्वच्छ, विश्वसनीय और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है, जो राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अजय कुमार सिंह ने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटेगी तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी सहायता मिलेगी। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी तथा पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र को भी लाभ पहुंचेगा।
उन्होंने बताया कि भू-तापीय ऊर्जा परियोजना भविष्य में हरित हाइड्रोजन उत्पादन, जिला ताप प्रणाली, कृषि प्रसंस्करण तथा अन्य औद्योगिक उपयोगों के लिए भी नई संभावनाएं खोलेगी। परियोजना के सफल विकास से उत्तराखंड वैकल्पिक और नवाचार आधारित ऊर्जा तकनीकों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व और हरित ऊर्जा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन तथा ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि तपोवन क्षेत्र में उपलब्ध भू-तापीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग उत्तराखंड को ऊर्जा आत्मनिर्भरता, हरित विकास और सतत आर्थिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के साथ-साथ उत्तराखंड को देश के अग्रणी हरित ऊर्जा राज्यों में विशिष्ट पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगी।

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