जल परिवहन : सड़कों का बोझ नदियों के हवाले
This article highlights India’s strategic push under Maritime India Vision 2030 and Maritime Amrit Kaal Vision 2047 to transform inland waterways into a major transport pillar. Led by the Inland Waterways Authority of India (IWAI), developing river transport offers significantly lower freight costs (₹1.06/ton-km) and reduced pollution compared to road and rail. Supported by digital portals like PANI and CAR-D, policy reforms, and regional expansions across 32 active national waterways, India aims to double the logistics share of inland waterways to 12% by 2047, driving a sustainable, eco-friendly, and competitive economy.
भारत में अंतर्देशीय जलमार्गों का विकास और लॉजिस्टिक्स क्रांति का नया दौर

— जयसिंह रावत
भारत अपनी राष्ट्रीय परिवहन व्यवस्था में एक बड़े और दूरदर्शी परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। देश की आर्थिक प्रगति को नई गति देने और लॉजिस्टिक्स यानी रसद लागत को कम करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने अंतर्देशीय जल परिवहन को राष्ट्रीय परिवहन प्रणाली के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित करने का महाअभियान शुरू किया है। मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के तहत देश की सदियों पुरानी नदियों, नहरों और खाड़ियों को आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और अत्यंत किफायती व्यापारिक मार्गों में बदला जा रहा है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) इस पूरे कायाकल्प की मुख्य धुरी बना हुआ है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि भारत का यह नीली अर्थव्यवस्था का विजन अब पूरी तरह धरातल पर आकार ले रहा है।
आर्थिक और पर्यावरणीय श्रेष्ठता का गणित
भारत में अंतर्देशीय जल परिवहन केवल परिवहन का एक वैकल्पिक साधन नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों मोर्चों पर सड़क और रेल परिवहन की तुलना में बेहद सक्षम विकल्प सिद्ध हो रहा है। माल ढुलाई की लागत के मामले में जलमार्ग सबसे सस्ते माध्यम के रूप में उभरते हैं। 2014 के मूल्य मानकों के अनुसार, जलमार्गों के जरिए माल भेजने का खर्च महज ₹1.06 प्रति टन-किलोमीटर आता है, जबकि रेलवे में यह ₹1.36 और सड़कों पर ₹2.50 प्रति टन-किलोमीटर बैठता है। इस तरह सड़कों पर बढ़ती वाहनों की भीड़ और रसद लागत को नियंत्रित करने के लिए जलमार्ग सर्वोत्तम उपाय हैं।
इसके साथ ही, पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी जलमार्ग काफी सुरक्षित हैं। जल परिवहन में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन और वायु प्रदूषण सड़क मार्ग की तुलना में नगण्य है। जहां सड़क मार्ग से वायु प्रदूषण की लागत ₹0.202 प्रति टन-किलोमीटर होती है, वहीं जल मार्ग में यह लागत मात्र ₹0.03 प्रति टन-किलोमीटर ही बैठती है। इसके अलावा, जल परिवहन से ध्वनि, मृदा और जल प्रदूषण पर भी न के बराबर प्रभाव पड़ता है।
डिजिटल तकनीक से आसान होता नौपरिवहन
जलमार्गों के कुशल संचालन और व्यापार को आसान बनाने के लिए IWAI ने कई अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं। नौवहन की सुगम योजनाओं के लिए पानी (PANI) पोर्टल विकसित किया गया है, जबकि जहाजों और उनके चालक दल के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए ‘जलयान और नाविक’ पोर्टल की शुरुआत की गई है, जो सड़क परिवहन के ‘वाहन’ और ‘सारथी’ पोर्टल की तर्ज पर काम करता है। माल की आवाजाही पर रियल-टाइम नज़र रखने के लिए सीएआर-डी (CAR-D) कार्गो डेटा पोर्टल और व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए ‘जल समृद्धि’ पोर्टल काम कर रहे हैं।
सुरक्षा के लिहाज से गंगा नदी पर रिवर इन्फॉर्मेशन सिस्टम (RIS) लागू किया गया है, जिसमें 4 नियंत्रण केंद्र, 13 बेस स्टेशन, वीएचएफ संचार और मौसम संबंधी सेंसर लगे हैं। इसके अलावा, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक नेविगेशनल चार्ट्स (ENC) डिजिटल रूप से उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे नाविकों को वास्तविक समय में मौसम और ट्रैफिक की सटीक जानकारी मिलती है।
व्यापक नीतिगत सुधार और निजी निवेश को प्रोत्साहन
जलमार्गों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और निजी पूंजी को आकर्षित करने के लिए सरकार ने ऐतिहासिक नीतियां बनाई हैं। भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग पर माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए ‘जलवाहक योजना’ शुरू की गई है, जिसके तहत वित्तीय सहायता दी जा रही है। 2025 के केंद्रीय बजट में अंतर्देशीय जहाजों के लिए ‘टन भार कर’ प्रणाली लागू की गई, जिससे शुद्ध लाभ के बजाय जहाज के आकार के आधार पर स्थिर और कम कर व्यवस्था सुनिश्चित हुई है।
निजी क्षेत्र के निवेश को पारदर्शी बनाने के लिए राष्ट्रीय जलमार्ग विनियम 2025 अधिसूचित किए गए हैं, जबकि मार्च 2026 से प्रभावी तटीय नौवहन अधिनियम 2025 ने अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नियमों को सरल बनाया है। इसके साथ ही, इस्पात, कोयला, उर्वरक और पेट्रोलियम जैसे प्रमुख क्षेत्रों के 140 से अधिक सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) को अपनी माल ढुलाई का एक हिस्सा जलमार्गों पर स्थानांतरित करना अनिवार्य किया गया है।
देश के कोने–कोने में जलमार्गों का क्षेत्रीय विस्तार
देश भर में 32 राष्ट्रीय जलमार्गों में परिचालन शुरू हो चुका है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को सीधा लाभ मिल रहा है। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों को जोड़ते हुए जोगीघोपा में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क, पांडू में ₹288 करोड़ की जहाज मरम्मत सुविधा और डिब्रूगढ़ में ₹188 करोड़ का क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र विकसित किया जा रहा है।
गंगा नदी पर ₹5,061 करोड़ की ‘जल मार्ग विकास परियोजना’ के तहत वाराणसी, साहिबगंज और हल्दिया में मल्टी-मॉडल टर्मिनल और कालूघाट में इंटरमॉडल टर्मिनल बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 66 सामुदायिक जेटियों का निर्माण किया गया है, जिससे स्थानीय किसानों और व्यापारियों को बड़ा बाजार मिल रहा है।
दक्षिण भारत में केरल की नहरों और नदियों पर 24 घंटे चलने वाले नौवहन उपकरण लगाए गए हैं, जबकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कृष्णा नदी के किनारे रो-रो टर्मिनलों का निर्माण हुआ है। सागरमाला योजना के तहत आंध्र प्रदेश में ₹1,286 करोड़ की 9 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। गुजरात की नर्मदा व तापी, गोवा की मांडोवी व जुआरी, ओडिशा की महानदी और जम्मू-कश्मीर की झेलम, चेनाब व रावी नदियों पर भी आधुनिक फ्लोटिंग जेटियां और तटवर्ती सुविधाएं तैयार की जा रही हैं।
भारत के नीले और सतत भविष्य का रोडमैप
भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक देश की कुल परिवहन प्रणाली में अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय जहाजरानी की हिस्सेदारी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करना है। वाराणसी में प्रस्तावित एमएमएलपी-फ्रेट विलेज, वाराणसी-पटना-कोलकाता में प्रस्तावित जल मेट्रो, और हरित हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक जहाजों का निर्माण इस बात का प्रमाण है कि भारत के जलमार्ग आधुनिक तकनीक और पर्यावरण संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण बनने जा रहे हैं।
नदियों के इस विशाल नेटवर्क को पुनर्जीवित करके और सड़कों का सारा बोझ नदियों के हवाले करके, भारत न केवल अपनी लॉजिस्टिक्स लागत घटा रहा है, बल्कि ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में रोजगार व पर्यटन की नई राहें भी खोल रहा है। पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ एकीकृत होकर यह जलमार्ग अभियान भारत को एक टिकाऊ, समृद्ध और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में सबसे मजबूत कड़ी साबित हो रहा है।
