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देश के 45 प्रतिशत मुख्यमंत्रियों पर आपराधिक मामले, 11 पर गंभीर आरोप; औसत संपत्ति ₹118 करोड़: एडीआर रिपोर्ट

A recent report by the Association for Democratic Reforms (ADR) and National Election Watch sheds light on the criminal background, assets, liabilities, and educational qualifications of India’s current Chief Ministers. According to the report, 14 of the 31 incumbent Chief Ministers (45%) across 28 states and three Union Territories have declared criminal cases against themselves in their election affidavits. Of these, 11 Chief Ministers (35%) have disclosed serious criminal cases, including charges related to attempt to murder, bribery, criminal intimidation, and other grave offences.

 

नई दिल्ली। देश के मौजूदा मुख्यमंत्रियों की आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्ति, देनदारियों और शैक्षणिक योग्यता को लेकर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने लाती है। रिपोर्ट के अनुसार देश के 28 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 31 वर्तमान मुख्यमंत्रियों में से 14 (45 प्रतिशत) ने अपने चुनावी हलफनामों में स्वयं पर आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है। इनमें से 11 मुख्यमंत्रियों (35 प्रतिशत) पर हत्या के प्रयास, रिश्वतखोरी, आपराधिक धमकी और अन्य गंभीर प्रकृति के मामले दर्ज हैं।

एडीआर ने यह विश्लेषण मुख्यमंत्रियों द्वारा अपने-अपने विधानसभा चुनावों के दौरान निर्वाचन आयोग को सौंपे गए स्व-घोषित शपथपत्रों के आधार पर तैयार किया है। रिपोर्ट का उद्देश्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की पृष्ठभूमि को सार्वजनिक करना और मतदाताओं के सामने तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराना है।

रिपोर्ट के वित्तीय विश्लेषण में सामने आया है कि देश के 31 मुख्यमंत्रियों की औसत घोषित संपत्ति ₹118.07 करोड़ है। इनमें चार मुख्यमंत्री ऐसे हैं जिनकी घोषित संपत्ति ₹100 करोड़ से अधिक है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में रहे डी.के. शिवकुमार ₹1,413 करोड़ से अधिक की घोषित संपत्ति के साथ देश के सबसे धनी मुख्यमंत्री हैं। उनके बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू की घोषित संपत्ति ₹931 करोड़ से अधिक है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने ₹648 करोड़ से अधिक की संपत्ति घोषित की है, जबकि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू की घोषित संपत्ति ₹332 करोड़ से अधिक है।

इसके विपरीत कुछ मुख्यमंत्रियों ने अपेक्षाकृत कम संपत्ति घोषित की है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लगभग ₹55 लाख की संपत्ति घोषित की है, जबकि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की घोषित संपत्ति ₹85 लाख से अधिक है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने अपनी कुल संपत्ति लगभग ₹1.46 करोड़ घोषित की है।

देनदारियों के मामले में भी रिपोर्ट कई रोचक तथ्य सामने लाती है। कर्नाटक के डी.के. शिवकुमार ने ₹265 करोड़ से अधिक की देनदारियां घोषित की हैं, जो सभी मुख्यमंत्रियों में सबसे अधिक हैं। दूसरे स्थान पर अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू हैं, जिन्होंने ₹180 करोड़ से अधिक की देनदारियां घोषित की हैं।

शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अधिकांश मुख्यमंत्री उच्च शिक्षित हैं। रिपोर्ट के अनुसार 31 में से 13 मुख्यमंत्री (42 प्रतिशत) स्नातक अथवा पेशेवर स्नातक हैं। वहीं 13 मुख्यमंत्री (42 प्रतिशत) स्नातकोत्तर, डॉक्टरेट या डिप्लोमा जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यता रखते हैं। शेष मुख्यमंत्रियों की शैक्षणिक योग्यता इससे अलग श्रेणियों में आती है।

रिपोर्ट में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। वर्तमान में देश के 31 मुख्यमंत्रियों में केवल एक महिला मुख्यमंत्री हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता देश की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री हैं, जिससे शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी महज तीन प्रतिशत रह जाती है।

आयु के आधार पर देखा जाए तो अधिकांश मुख्यमंत्री मध्यम आयु वर्ग से हैं। रिपोर्ट के अनुसार 31 में से 17 मुख्यमंत्री 51 से 60 वर्ष के आयु वर्ग में आते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि राज्यों की राजनीतिक कमान मुख्य रूप से अनुभवी और लंबे राजनीतिक जीवन वाले नेताओं के हाथों में है।

एडीआर का कहना है कि यह रिपोर्ट पूरी तरह मुख्यमंत्रियों द्वारा निर्वाचन आयोग को दिए गए स्व-घोषित चुनावी शपथपत्रों पर आधारित है। संस्था का मानना है कि उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्ति, देनदारियों और शैक्षणिक योग्यता जैसी जानकारियों का सार्वजनिक होना लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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