हंस जी महाराज ने ज्ञान से बदला करोड़ों लोगों का जीवन : मंगला जी

हरिद्वार, 9 नवंबर (त्यागी)।/विश्व की महान आध्यात्मिक विभूति योगीराज हंस जी महाराज की 125वीं जयंती के अवसर पर ऋषिकुल कॉलेज मैदान में आज विधि-विधानपूर्वक दो दिवसीय जनकल्याण समारोह का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन हंस ज्योति – ए यूनिट ऑफ हंस कल्चरल सेंटर, नई दिल्ली द्वारा किया गया।
द हंस फाउंडेशन के प्रेरणास्रोत भोले जी महाराज और मंगला जी के सानिध्य में आयोजित इस समारोह में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और भक्त हरिद्वार पहुंचे।
इस अवसर पर भोले जी महाराज ने “सुनो-सुनो वचन नर नारी, हरि भजन करो सुख कारी” और “गुरु चरण कमल बलिहारी रे” जैसे भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान, मानव सेवा और परोपकार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
समारोह के दौरान मंगला जी ने हंस जी महाराज और राजेश्वरी देवी के चित्रों के समक्ष नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए अत्यंत हर्ष का विषय है कि आज हम मां गंगा के पावन तट पर योगीराज हंस जी महाराज की 125वीं जयंती मना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हंस जी महाराज अपने समय के अलौकिक संत और महान योगी थे। हरिद्वार उनकी जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों रही है, जहां से उन्होंने अध्यात्म, ज्ञान और जनकल्याण के कार्यों की शुरुआत की थी। अध्यात्म ज्ञान का जो छोटा पौधा उन्होंने रोपा था, वह आज विशाल वटवृक्ष बन चुका है। आज न केवल भारत में, बल्कि विश्व के अनेक देशों में भी उनके ज्ञान का प्रकाश फैल चुका है।
मंगला जी ने यह भी कहा कि हंस जी महाराज का भारत की स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने अध्यात्म के माध्यम से लोगों की चेतना को जगाकर उन्हें अंग्रेजी शासन के विरुद्ध एकजुट किया। उनकी महानता का प्रमाण यह है कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उनके शिष्य रहे और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की धर्मपत्नी गायत्री देवी उनकी शिष्या थीं।
समारोह में देश के विभिन्न तीर्थों से पधारे संत-महात्माओं ने सत्संग के माध्यम से श्रद्धालुओं को ज्ञान और भक्ति की गंगा में स्नान कराया। भजन गायकों की मधुर प्रस्तुतियों से पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया।
