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ऑरेंज अलर्ट के बीच उत्तराखंड में हाई अलर्ट, सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश

देहरादून, 25 जुलाई। राज्य में सक्रिय मानसून और आगामी दिनों के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने शनिवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को पूर्व तैयारी, त्वरित राहत और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में सचिव ने मानसून के दौरान विभिन्न जिलों में हुई क्षति, राहत एवं पुनर्बहाली कार्यों की समीक्षा करते हुए सभी जिलाधिकारियों को क्षति का आकलन शीघ्र शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिलों से प्राप्त सूचनाओं का नियमित विश्लेषण कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई और अन्य कार्यदायी संस्थाओं को बंद पड़े सभी मार्ग, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों, को प्राथमिकता के आधार पर खोलने के निर्देश दिए। साथ ही जिन स्थानों पर मार्ग खोलने में कठिनाइयाँ आ रही हैं, उनका तत्काल समाधान करने को कहा ताकि प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री और आवश्यक सेवाएँ बिना बाधा पहुँच सकें।

बैठक में राज्य के प्रमुख बांधों और बैराजों के जलस्तर की भी समीक्षा की गई तथा संबंधित विभागों को लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

सचिव ने बताया कि मौसम विभाग ने 27 जुलाई को देहरादून और बागेश्वर, 28 जुलाई को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल और देहरादून तथा 29 जुलाई को उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसे देखते हुए सभी जिलों को आपदा प्रबंधन की तैयारियाँ पूरी रखने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका को देखते हुए आवश्यकतानुसार रात्रिकालीन वाहन संचालन को नियंत्रित या प्रतिबंधित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। चारधाम यात्रा के दौरान प्रत्येक धाम में रात्रि विश्राम कर रहे यात्रियों की दैनिक जानकारी राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र को उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लिया जा सके।

बैठक में कैलाश मानसरोवर यात्रा की भी समीक्षा की गई। सचिव ने यात्रा दलों की वर्तमान स्थिति, मार्ग और सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। आगामी कांवड़ यात्रा के मद्देनजर संबंधित जिलों को भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, आपदा प्रतिक्रिया दलों की तैनाती, चिकित्सा सुविधाओं और संचार व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए।

उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों को मिलेगा सम्मान

सचिव विनोद कुमार सुमन ने निर्देश दिए कि आपदा के दौरान साहस, उत्कृष्ट सेवा और असाधारण कार्य करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्मिकों को 26 जनवरी, 15 अगस्त और उत्तराखंड स्थापना दिवस (9 नवम्बर) के अवसर पर सम्मानित किया जाए।

आईडीआरएन पोर्टल पर अपलोड होगी संसाधनों की जानकारी

उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिए कि उपलब्ध आपदा प्रबंधन उपकरणों, मशीनरी और प्रशिक्षित मानव संसाधनों का पूरा विवरण आईडीआरएन पोर्टल पर अपलोड किया जाए। इससे आपदा के समय यह जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी कि किस जिले में कौन-से संसाधन उपलब्ध हैं और उन्हें आवश्यकता वाले क्षेत्रों में शीघ्र भेजा जा सकेगा।

तकनीकी रूप से सशक्त होंगी तहसीलें

सचिव ने बताया कि विश्व बैंक सहायता प्राप्त यूप्रिपेयर (U-PREPARE) परियोजना के तहत राज्य की तहसीलों को आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। इसके अंतर्गत तहसीलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष, डिजिटल स्क्रीन, लैपटॉप, कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट और वाई-फाई जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि इससे राज्य, जिला और तहसील स्तर के बीच समन्वय और आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी। आवश्यकता पड़ने पर इन सुविधाओं का उपयोग तहसील स्तर के कंट्रोल रूम के रूप में भी किया जा सकेगा।

बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा, डॉ. पी.डी. माथुर, यूएसडीएमए के विशेषज्ञों तथा विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।

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