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मुख्यमंत्री धामी ने दिया गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय को राहत का भरोसा

 

चैरास स्टेडियम प्रकरण में 9.90 करोड़ रुपये की रॉयल्टी व अर्थदंड माफ करने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाने का आश्वासन

श्रीनगर (गढ़वाल), 25 जुलाई। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय पर जिला प्रशासन टिहरी द्वारा लगाए गए 9.90 करोड़ रुपये के रॉयल्टी एवं अर्थदंड के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहत का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल को इस संबंध में आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव लाने का आश्वासन दिया।
कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह के नेतृत्व में विश्वविद्यालय के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की जानकारी दी और जनहित तथा विश्वविद्यालय हित को देखते हुए रॉयल्टी एवं अर्थदंड की राशि पूरी तरह माफ करने का अनुरोध किया। प्रतिनिधिमंडल में स्कूल ऑफ अर्थ साइंस के डीन प्रो. महावीर सिंह नेगी, डीन (नियुक्ति एवं पदोन्नति) प्रो. एम.एस. पवार तथा जनसंपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा शामिल थे।
बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि शुरुआत में इस मामले में 1.90 करोड़ रुपये की रॉयल्टी निर्धारित की गई थी, जिसे बाद में पांच गुना बढ़ाकर अर्थदंड सहित 9.90 करोड़ रुपये कर दिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि रेलवे सुरंगों से निकले मलबे का उपयोग पूरी तरह जनहित के उद्देश्य से किया गया था। इसी समतल क्षेत्र के ऊपर वर्तमान में कई गांवों को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण भी किया जा रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय को इस कार्य से कोई व्यावसायिक लाभ नहीं हुआ।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान अलकनंदा नदी के कटाव से श्रीनगर-चैरास मार्ग तथा विश्वविद्यालय का खेल मैदान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। क्षेत्र की सुरक्षा, तटबंधों को मजबूत करने और आवागमन बहाल करने के लिए विश्वविद्यालय ने रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) की ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की सुरंगों से निकले मलबे का उपयोग कटावग्रस्त क्षेत्र के पुनर्भरण में कराया था। यह कार्य पूरी तरह आपदा पुनर्वास और सार्वजनिक हित से जुड़ा था।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुख्यमंत्री को यह भी स्मरण कराया कि इससे पहले एक छात्र कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस मामले को सकारात्मक रूप से लेते हुए कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर राहत दिलाने का आश्वासन दिया था। प्रतिनिधिमंडल ने अनुरोध किया कि आगामी कैबिनेट बैठक में इस विषय को शामिल कर विश्वविद्यालय पर लगाए गए 9.90 करोड़ रुपये के रॉयल्टी एवं अर्थदंड को पूर्णतः माफ किया जाए।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि इस मामले में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी सहित कई जनप्रतिनिधियों का लगातार सहयोग मिला है। जुलाई 2023 में जनप्रतिनिधियों के प्रयास से तत्कालीन जिलाधिकारी टिहरी ने भी शासन को रॉयल्टी माफी का प्रस्ताव भेजा था। हाल ही में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव (खनन) बृजेश कुमार संत तथा निदेशक (खनन) राजपाल लेघा से भी मिलकर मामले की वस्तुस्थिति से अवगत करा चुका है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने आशा व्यक्त की है कि राज्य सरकार जनहित, छात्रहित और विश्वविद्यालय हित को ध्यान में रखते हुए इस गैर-लाभकारी केंद्रीय शिक्षण संस्थान को राहत प्रदान करेगी तथा आगामी कैबिनेट बैठक में 9.90 करोड़ रुपये की रॉयल्टी एवं अर्थदंड माफ करने का निर्णय लिया जाएगा।

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