उत्तराखंड के वरिष्ठ नेता हीरा सिंह बिष्ट का निधन, राजनीति और श्रमिक आंदोलन में अपूरणीय क्षति
देहरादून, 26 जुलाई। उत्तराखंड के वरिष्ठतम राजनेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री और प्रदेश में ट्रेड यूनियन आंदोलन के प्रमुख स्तंभ हीरा सिंह बिष्ट का रविवार सुबह देहरादून में निधन हो गया। वे 82 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से प्रदेश की राजनीति, श्रमिक आंदोलन और सामाजिक जीवन में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न राजनीतिक दलों, श्रमिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने उनके निधन को राज्य के सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
हीरा सिंह बिष्ट का राजनीतिक सफर देहरादून के ऐतिहासिक डी.ए.वी. (पीजी) कॉलेज की छात्र राजनीति से शुरू हुआ। छात्र जीवन में ही उन्होंने अपने प्रभावशाली नेतृत्व और संगठन क्षमता के बल पर अलग पहचान बनाई। इसके बाद वे कांग्रेस संगठन और ट्रेड यूनियन आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने एक जुझारू, सरल और जनसरोकारों से जुड़े नेता की छवि कायम रखी।
उनका राजनीतिक जीवन 1977 के आम चुनाव से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। आपातकाल के बाद पूरे उत्तर भारत में कांग्रेस विरोधी लहर के बीच पार्टी ने उन्हें टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कड़ा मुकाबला किया। वे भारतीय लोक दल के उम्मीदवार परिपूर्णानंद पैन्यूली से बेहद मामूली अंतर से पराजित हुए। उस समय अविभाजित उत्तर प्रदेश में वे सबसे कम मतों के अंतर से हारने वाले कांग्रेस प्रत्याशी रहे, जिसकी व्यापक चर्चा हुई।
इसके बाद उन्होंने विधानसभा राजनीति में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। वर्ष 1985 में अविभाजित उत्तर प्रदेश की देहरादून विधानसभा सीट से पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में राजपुर विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज कर पहली विधानसभा के सदस्य बने। वर्ष 2014 में डोईवाला विधानसभा उपचुनाव जीतकर तीसरी बार विधानसभा पहुंचे। एन. डी. तिवारी के नेतृत्व वाली पहली निर्वाचित उत्तराखंड सरकार में उन्होंने परिवहन, श्रम, रोजगार और तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया। अपने कार्यकाल में उन्होंने श्रमिक हितों, परिवहन व्यवस्था और तकनीकी शिक्षा के विस्तार से जुड़े अनेक निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हीरा सिंह बिष्ट केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि प्रदेश के श्रमिक आंदोलन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में भी गिने जाते थे। इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने दशकों तक कर्मचारियों और श्रमिकों के अधिकारों की आवाज बुलंद की। उत्तराखंड जल संस्थान, परिवहन निगम तथा विभिन्न सार्वजनिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण आंदोलन और वार्ताएं संचालित कीं। श्रमिक संगठनों के बीच उनकी पहचान एक संघर्षशील, सहज और भरोसेमंद नेता की रही।
खेलों के विकास में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा। वे क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। देहरादून के रायपुर स्थित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। उनके प्रयासों ने उत्तराखंड में क्रिकेट के बुनियादी ढांचे के विकास को नई दिशा दी।
हीरा सिंह बिष्ट के निधन पर मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्रियों, वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं, विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों, श्रमिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें एक सादगीपूर्ण, संघर्षशील, जनोन्मुख और श्रमिकों तथा आम जनता के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले जननेता के रूप में याद किया। उनके निधन से उत्तराखंड ने एक ऐसे अनुभवी राजनेता को खो दिया है, जिसने छात्र राजनीति से लेकर मंत्री पद तक के अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में जनसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
