आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने की तैयारी, सभी विभाग एक हफ्ते में देंगे कार्ययोजना

देहरादून, 22 जनवरी। उत्तराखंड में आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करने के उद्देश्य से सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बुधवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में विभिन्न विभागों द्वारा सेंडई फ्रेमवर्क (2015–2030) के तहत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सेंडई फ्रेमवर्क के लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति सुनिश्चित की जाए और सभी विभाग एक सप्ताह के भीतर अपनी विभागीय कार्ययोजना प्रस्तुत करें।
सचिव ने कहा कि सेंडई फ्रेमवर्क आपदाओं से होने वाली मृत्यु, प्रभावित लोगों की संख्या, आर्थिक क्षति तथा बुनियादी सेवाओं और महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं को होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने के लिए एक वैश्विक ढांचा है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक विभाग को अपनी आपदा प्रबंधन योजना तैयार करनी होगी और विभाग स्तर पर आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की स्थापना अनिवार्य की जाएगी।
उन्होंने बताया कि सेंडई फ्रेमवर्क की पहली प्राथमिकता आपदा जोखिम को समझना है। इसके तहत आपदाओं से संबंधित आंकड़ों का वैज्ञानिक ढंग से संग्रह और विश्लेषण किया जाएगा। आपदा से हुई क्षति के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रशिक्षण और जन-जागरूकता के माध्यम से अधिकारियों तथा आमजन की क्षमता बढ़ाई जाएगी।
दूसरी प्राथमिकता आपदा जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने से जुड़ी है। इसके अंतर्गत भूमि उपयोग, शहरी नियोजन, भवन निर्माण संहिता, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। जिला और राज्य स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण से जुड़े संस्थागत ढांचे को और सशक्त बनाया जाएगा।
तीसरी प्राथमिकता के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जोखिम कम करने वाली योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। विकास परियोजनाओं में आपदा जोखिम मूल्यांकन और मानचित्रण को अनिवार्य किया जाएगा तथा राज्य की महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं और सेवाओं को सुरक्षित बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति अपनाई जाएगी।
चौथी प्राथमिकता आपदा से पहले तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया और पुनर्वास से संबंधित है। सचिव ने कहा कि आपदा पूर्व तैयारी, संसाधनों की उपलब्धता और त्वरित राहत व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। आपदा के बाद पुनर्निर्माण कार्यों में ‘बिल्ड बैक बेटर’ की अवधारणा अपनाई जाएगी, ताकि भविष्य में नुकसान कम हो सके। साथ ही बहु-आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ कर चेतावनियों का समय पर प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा।
बैठक में वरिष्ठ आपदा जोखिम न्यूनीकरण विशेषज्ञ डॉ. पी.डी. माथुर ने सेंडई फ्रेमवर्क के प्रमुख लक्ष्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार, विभिन्न विभागों के अधिकारी और यूएसडीएमए के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
